मैं कौन हूँ ..(Who Am I..)

आज मनुष्य बड़े बड़े यंत्रों, महायंत्रों की सहायता से अंतरिक्ष को जानने का दावा करता है| सूर्य को जान लेने की बात करता है| ग्रहों को जान लेने की बात करता है| यंत्रों और महायंत्रों की सहायता से वह ग्रहों तक अपनी पहुँच बना पाने में सफल हो चुका है| लेकिन क्या, आज यही मनुष्य …

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‘गीता’ और नैदानिक मनोविज्ञान (Clinical Psychology)

ज्योतिष को अपरा ( चारों वेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष ) और परा के बीच का सेतु कहा गया है |चारों वेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और तब आता है ज्योतिष |कहने का तात्पर्य यह कि ज्योतिष को अगर सम्पूर्णता में समझना है तो हमें वेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद …

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परमाणु- पालक भी, संहारक भी

ज्योतिष को अपरा (चारों वेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और ज्योतिष )और परा के बीच का सेतु कहा गया है |चारों वेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद और तब आता है ज्योतिष |कहने का तात्पर्य यह कि ज्योतिष को अगर सम्पूर्णता में समझना है तो हमें वेद, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद को जानना …

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रे मन धीरज धर

   30 जून 2020 को ग्रहों द्वारा कुछ ऐसे योग निर्मित हो रहे हैं जिनके बारे में ज्योतिषशास्त्र अन्य फलों के अलावा एक फल जो कहता है वह यह कि इस योग के निर्माण से वर्णसंकरों का नाश होता है | ' वर्णसंकर' शब्द का इस्तेमाल शास्त्रकारों ने क्यों किया ??  क्या तात्पर्य है ?? इसे …

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सफल होने का सूत्र

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम | सकलगुणनिधानं वनराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि || अतुलित बल के धाम, दैत्यों के बन के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, रघुपति के प्रिय दूत और भक्त वायुनंदन कपीश श्री हनुमान जी को मेरा प्रणाम | जब हम किसी भी वस्तु, पदार्थ या परम …

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