चंद्र (MOON)

नंदी ..ओ ..नंदी ..

कहाँ हो..

मामा के घर से घूम के आने के बाद अब कुछ पढ़ भी लो|

दो महीने होने को आये,ज्योतिष की क्लास भी नहीं लगी है तुम्हारी| कुछ याद भी है या सबकुछ भूल भल गयी?

कुछ नहीं भूले हैं बाबा| सब याद है|

बस आ गए कॉपी कलम लेके|

हाँ तो बाबा आज क्या बताईयेगा ज्योतिष में?

आज हम चंदा मामा के बारे में बताएँगे| तुम्हारे लिए जो चंदा मामा हैं उस मामा के बारे में कुछ और जानेंगे। पौराणिक कथा, वेद, उपनिषद, NASA.. क्या कहते हैं इस मामा के बारे में साथ ही साथ इस मामा के बारे में ज्योतिष क्या कहता है इसे भी जानेंगे।

आओ जाने..

पौराणिक कथा के अनुसार –

चंद्र, बृहस्पति का शिष्य था| बृहस्पति के पास शिक्षा ग्रहण करने जाता था| इसी दरम्यान बृहस्पति की पत्नी तारा और इसके बीच प्रेम सम्बन्ध बने| जिसके परिणाम स्वरुप बुध का जन्म हुआ|

चंद्र, अदिति का पुत्र है|

वेद और उपनिषद में इसे औषधि का कारक माना गया है|

ज्योतिष के अनुसार-

स्वयं की राशि – कर्क है|

स्वयं का नक्षत्र- रोहिणी, हस्त, श्रवण है|

उच्च  राशि- वृषभ है|

नीच राशि- वृश्चिक है|

मूल त्रिकोण राशि- वृषभ है|

दिशा- उत्तर पश्चिम( वायव्य) है|

वार- सोमवार है|

धातु- चाँदी है|

शरीर के अंग जिनपर इसका आधिपत्य है- आँख, फेफड़ा, हृदय, शरीर के तरल पदार्थ|

इसके द्वारा होने वाले रोग- अवसाद, हृदय रोग, श्वांस संबंधी रोग, क्षय रोग, डर, भय, आँखों से सम्बंधित रोग, गर्भाशय से सम्बंधित रोग आदि|

चंद्र को माँ का कारक माना गया है|

चंद्र, स्त्रियों के ऋतु चक्र को संतुलित या असंतुलित करता है| चिकित्सा विज्ञान भी इससे अपनी सहमति जताता है|

चंद्र को मन का कारक माना गया है|

श्रीनादभागवत के अनुसार मन में अपार शक्तियां अन्तर्निहित हैं| भगवान् के पास माया है, जीव के पास मन है|

मनुष्य जो सृष्टि करता है, उसके मूल में मन है|

भगवद गीता में मन को छठी इन्द्रिय कहा गया है| अन्य इन्द्रियों की गति जहाँ सिर्फ वर्तमान में होती है वहीं मन की गति भूत, वर्तमान और भविष्य, तीनो कालों में होती है|

मन को दिव्य चक्षु कहा गया है|

मन का सबसे परिष्कृत रूप है- समाधि|

विज्ञान के अनुसार –

The Moon’s presence helps stabilize our planet’s wobble and moderate our climate – NASA .

बस बाबा बस| आज के लिए बस इतना ही| पहले इतना समझ लें फिर आगे बताइयेगा|

ठीक है नंदू| इसको अच्छे से समझो फिर बताएँगे कि किस प्रकार चंद्र, काल भी है और कालातीत भी है|