जीवन.. प्रवाह (Flowchart)

FLOWCHART – “a diagram that shows the stages of a process”

फ्लोचार्ट के माध्यम से, किसी भी प्रक्रिया के भिन्न भिन्न अवस्थाओं को सरल और सहज तरीके से  समझा जा सकता है|

ज्योतिष में, जीवन के भिन्न भिन्न अवस्थाओं को कुंडली( flowchart) के माध्यम से बड़ी ही सरलता और सहजता से समझा जाता है| 

पश्यन्शृण्वन्स्पृशन्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपन्श्वसन्

देखते, सुनते, छूते, सूंघते, खाते, चलते, सोते और साँस लेते अपनी अपनी कुंडली के इन द्वादश भावों का मनन अगर  हम सब करेंगे तो यह आसानी से समझ पाएंगे कि क्यों रामचरितमानस में कहा गया है – “जीव अविनासी” और भवद्गीता में कहा गया है- “ममैवांशो जीवलोके”|

भिन्न भिन्न प्रकार के आवरण की जानकारी तो मिलेगी ही साथ ही परकाया प्रवेश की विधि भी समझ में आ जाएगी|

प्रथम भाव से शुरू होकर द्वादश भाव तक|

जीवन का प्रवाह

हर भाव के बारह परत और हर परत के पुनः बारह अन्तः परत|

यहाँ मैंने सिर्फ एक बाह्य स्थूल परत दिखाया है|

स्वयं से लेकर आय और व्यय तक|

तो क्यों न एक बार परत दर परत ऊर्जा के प्रवाह के साथ  साथ एकात्म स्थापित करें ..

जीवन का सार पाएं ..