स्मार्ट फोन

4 Ways to Transform Your Marketing In An Analytical World
फोटो, साभार: Google

आज मेरे स्मार्ट फोन ने हमें भी थोड़ा स्मार्ट बनाया| कुछ बातों को समझने में मेरी मदद की|

हुआ यूँ कि मैंने अपने फोन को चार्ज में लगाया| १००% चार्ज हो जाने पर उसे चार्ज से हटाकर ले आयी और बगल में रखके अपनी पढाई शुरू की| दस मिनट के बाद फोन की घंटी बजी| दोस्त का फोन था| मैं उसके साथ बात में मशगूल हो गयी| लेकिन ये क्या .. बात शुरू किये अभी पांच मिनट भी नहीं हुए कि फोन डिस्चार्ज हो गया| अभी तो फोन १००% चार्ज था और तुरंत में ऐसा कैसे? मैंने जब इस बात की पड़ताल शुरू की तब पाया कि बैकग्राउंड में कई ऐप  खुले थे जो कि फोन की बैटरी के सम्पूर्ण ऊर्जा का उपयोग कर रहे थे|

मैंने आज जाना की …

ठीक इसी प्रकार हम सब के भीतर भी कुछ चिंताएं इसी बैकग्राउंड ऐप की तरह होती हैं जो हमारी सारी ऊर्जा का उपयोग करती रहती हैं और हमें ऊर्जाहीन बनाती रहती हैं|

इससे बचने का उपाय क्या…

एकदम से कुंडली का सातवां भाव अपने नए रूप में सामने आ गया..

चिंता से चिता की ओर या चिंता से सच्चिदानंद की प्राप्ति…

१००% ऊर्जा या बैकग्राउंड में चलने वाली अनावश्यक ऐप (चिंता) की वजह से ऊर्जा का क्षय…

निर्णय हमारा ..

“अभयं वै जनक प्राप्तोसि”

“अभयं प्रतिष्ठां विन्दते”