पर्यावरण और ज्योतिष

उदंती.com: वेदों में पर्यावरण
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ज्योतिष में राशियों को उनके तत्वों के आधार पर अग्नि तत्व राशि , पृथ्वी तत्व राशि, वायु तत्व राशि और जल तत्व राशि में बांटा गया है।

इन सभी में निहित गूढ़ार्थ को समझने की जरूरत है। इन सबके बीच उपस्थित आकाश तत्व को समझने की जरूरत है।

अकेले पृथ्वी तत्व को समझने के लिए हमें ..विश्वंभरा, वसुधानी, प्रतिष्ठा, अग्निवासा, हिरण्यवक्षा, पप्रथाना, रासमाना, सेवना, कल्याणी, शिवा, सुमंगली, सर्वम् सहा, अग्रेत्वई, पूर्व कृतवई, विभ्रिकवई, अस्मा, पांशु आदि के साथ एकात्म स्थापित करना होगा।

इसी प्रकार अन्य तत्वों के भी भिन्न भिन्न रूपों को समझकर उनके साथ एकात्म स्थापित करना होगा।

हमें, इसके साथ साथ मन बुद्धि और अहंकार को कुंडली के भावों और ग्रहों के आधार पर समझना होगा साथ साथ इन सबका दशा के साथ भी एकात्म स्थापित करना होगा क्योंकि प्रदूषण केवल पंच महाभूतों के कारण नहीं होता वरन् मनुष्य के मन में जो लोभ है, स्वार्थ है, मनुष्य का जो अहंकार है उसके कारण से भी पर्यावरण की समस्याएँ पैदा होती है।

है हममें सब

हैं सबमें हम..

ज्योतिष, का एक महत्वपूर्ण आयाम यह भी ..

इतना महत्वपूर्ण और असरदार हथियार जब हम सबके पास है तो क्यों नहीं इसका प्रयोग करते …

छोटी सी यात्रा को कष्ट रहित बनाने हेतु हम अपनी अपनी गाड़ियों में GPS लगवाते हैं ..

तो फिर अपने जीवन यात्रा से बेरूखी क्यों ..

ज्योतिष के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम और चलाए जा रहे व्यापार से बाहर आकर..

इस GPS के बारे में ..

सोचिएगा जरूर ..