अपने स्वास्थ्य के नियंता स्वयं बनिए

कोरोना संक्रमण से बाहर आने के बाद सोचती कि अब लिखना शुरू करना है, कोई ऐसी खबर आ जाती कि फिर लिखना रह ही जाता था| लेकिन इससे हमें बाहर तो आना होगा| इस तरह तो जिया नहीं जा सकता| हिम्मत करके मैंने लिखने का मन बनाया है|

इस आलेख को लिखने के पीछे कुछ वजहें  है|

पहली वजह तो यह कि वर्तमान समय में जिस अँधेरी सुरंग में हम सब चल रहे हैं वहां इस विषाणु का अभी तक सही पता नहीं चल रहा है| हर रोज इसका नया रूप सामने आ रहा है| अब जब इसकी पहचान ही नहीं हो पा रही है तो इसका इलाज कैसे किया जाये?

इस संक्रमण से इलाज हेतु आयुर्वेद बनाम एलोपैथ बनाम योग पर बहस छिड़ा है कि इन सबमें कौन  बेहतर है|

अगर हमें कोई ऐसा हथियार मिल जाये जो एक साथ आयुर्वेद, एलोपैथ और योग का सर्वांग दर्शन तो करवाए ही साथ ही साथ समस्या से मुक्ति का समाधान भी दे दे तो क्या यह हर्ष का विषय नहीं होगा?

वह हथियार है ज्योतिष| ज्योतिष के रूप में हमारे पूर्वजों ने एक ऐसा अमोघ अस्त्र प्रदान किया है जिसके इस्तेमाल की सही जानकारी अगर हमें प्राप्त हो जाये तो जीवन निर्द्वन्द, निश्छल और सहज हो जायेगा| हर प्रकार की व्याधि के चपेट में जाने से हम बचेंगे| स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों की अनुपस्थिति का नाम नहीं है। सर्वांगीण स्वास्थ्य के बारे में जानकारी होना बहुत आवश्यक है।दैहिक, मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होना ही स्वास्थ्य है।

दूसरी वजह यह कि कुछ समय से ज्योतिष पर लगातार प्रहार किया जा रहा है यह कहकर कि यह बकवास है| यह प्रहार ऐसे मठाधीशों द्वारा किया जा रहा है, दुनिया भर में जिनके लाखों करोड़ो अनुयायी हैं|

1 – यही मठाधीश योग को तो बढ़ावा देते हैं किन्तु ज्योतिष को बकवास कहते हैं यह हास्यास्पद तो है ही, ज्योतिष को लेकर इनकी अज्ञानता को भी दर्शाता है| अपनी अज्ञानता में योग के नाम पर ये सिर्फ कुछ आसन, प्राणायाम और मेडिटेशन करवाते हैं| इसके आधार पर ये व्यक्ति विशेष को सुखी और संतुलित जीवन जीने की कला सिखाते हैं ऐसा इन मठाधीशों  का दावा है| किन्तु क्या सच में ऐसा हो रहा है? सच्चाई तो इससे कहीं परे है| एक शोध के अनुसार विश्व में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है| ब्लड प्रेशर, शुगर, थाइरॉइड से युवा तो युवा बच्चे भी पीड़ित हो रहे हैं| ऐसा क्यों हो रहा है? सुखी और संतुलित जीवन क्यों दुःख पूर्ण और असंतुलित हो रहा है|

2 – ज्योतिष को बकवास कहते हुए ये कहते हैं कि अगले पल क्या होने वाला है ज्योतिष हमें नहीं बतला पाता है|

एक सवाल तो उनसे पूछना बनता है कि यही सवाल वे चिकित्सा विज्ञान से क्यों नहीं करते? क्या वह यह बता पाता है कि अगले पल बीमार व्यक्ति के साथ क्या होने वाला है?? किसी बच्चे के जन्म समय को लेकर चिकित्सा विज्ञान क्या उनके जन्म समय को ठीक ठीक बता पाता है??

यही सवाल वे नासा से या इसरो के वैज्ञानिकों से क्यों नहीं करते कि क्या वे अंतरिक्ष मिशन में अगले पल क्या होने वाला है बता पाते हैं??

यही सवाल वे मौसम वैज्ञानिक से क्यों नहीं करते कि क्यों वह मौसम की सही जानकारी नहीं दे पाता?? अगले पल की खबर वह क्यों नहीं बता पाता?

ज्योतिष ही एक ऐसी विधा है जो यह सही सही बतला पाता है कि अगले पल क्या होने वाला है| इसके लिए जरूरी है ज्योतिष का सही ज्ञान होना|

कुछ ज्योतिषियों द्वारा राशि फल कथन करने को अगर ज्योतिष समझेंगे और उस आधार पर ज्योतिष के बारे में अपने राय बनाएंगे तो यह बेबकूफी ही कही जाएगी| या कहें कि बड़ी ही चालाकी से ज्योतिषी को नकारने के बदले ज्योतिष को ही नकारने लगते हैं|

ऐसे समय में जब देश एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की मुख्य भूमिका होगी उस समय में युवा वर्ग को दिग्भ्रमित करना क्या देशद्रोह नहीं कहा जायेगा?

3 – यही मठाधीश कहते हैं कि कोई ग्रह क्यों आपको प्रभावित करे, आप ग्रहों को प्रभावित करें | उनकी इस बात पर दिग्भ्रमित युवा वाह वाह करती है|

उनके इस तरह के सवाल से उनकी अवस्था और उनकी अज्ञानता पर तरस आता है|

छान्दोग्य उपनिषद में स्पष्ट लिखा है कि सिर्फ ग्रह ही हम पर प्रभाव नहीं डालते वरन हम सब भी ग्रहों पर प्रभाव डालते हैं|

चलिए उपनिषद तक तो वे नहीं ही पहुंचे हैं, लगता है प्रख्यात वैज्ञानिक न्यूटन को भी नहीं जानते हैं क्योंकि न्यूटन का तीसरा नियम यह कहता है कि – “To every action, there is equal and opposite reaction”.

मतलब सब एक दूसरे पर प्रभाव डालते हैं|

न्यूटन ज्योतिष के अच्छे जानकार थे यह सभी जानते हैं|

सोचिये जरा इनकी अधकचरी जानकारी से पूरा का पूरा एक वर्ग दिग्भ्रमित हो रहा है|

ऐसे लोगों से हम किस प्रकार एक स्वस्थ और संतुलित समाज के निर्माण की कल्पना कर सकते हैं|

योग का सही मतलब ये तब तक नहीं समझेंगे जब तक ज्योतिष को नहीं जानेंगे|

स्वास्थ्य का मतलब तब तक नहीं समझेंगे जब तक Sickcare  को Healthcare समझते रहेंगे|

ये लोग कभी नहीं चाहेंगे कि लोग ज्योतिष को जानकर भ्रम से बाहर आ जाएं, सही जानकारी प्राप्त करें| क्योंकि जिस दिन लोग भ्रम से बाहर आ जायेंगे, इनकी मठाधीशी समाप्त तो होगी ही, हर व्यक्ति स्वस्थ हो जायेगा और परिणाम होगा कि हर व्यक्ति का मेडिकल बिल शून्य हो जायेगा|

आइये आज हम सब अपने आपको निरोगी बनाने और अपने मेडिकल बिल को शून्य करने की दिशा में, ज्योतिष के मार्गदर्शन में पहला कदम बढ़ाएं

कुंडली का पहले भाव और दूसरे भाव का सूक्ष्म विश्लेषण करें न सिर्फ जन्म कुंडली में, नवांश कुंडली में भी| इसके विश्लेषण से हमें यह पता चलेगा कि व्यक्ति कितना संयमित है और नियम बद्ध है| इन दोनों को जाने बगैर हम सब कितना भी आसन और प्राणायाम कर लें, परिणाम वही ढाक के तीन पात|

कोई व्यक्ति कितना संयमित है और उसके जीवन में कितनी अनियमितता है और इस असंयम और अनियमितता की वजह क्या है, यह हर व्यक्ति की कुंडली के सिर्फ दो भावों के विश्लेषण से जाना जा सकता है| इन भिन्न भिन्न वजहों के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति का उपचार भी भिन्न भिन्न किया जाता है|

हर व्यक्ति एक ही प्रकार के रोग से ग्रसित है, लेकिन उनकी चिकित्सा पद्धति भिन्न होगी, ऐसा ज्योतिष कहता है|

कुंडली में भिन्न भिन्न ग्रहों का भिन्न भिन्न नक्षत्रों में स्थित होना, शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन है या असंतुलन इसको बहुत ही अच्छे से बता देता है| अगर पित्त का प्रकोप है तो ज्योतिष के माध्यम से कुंडली का सही ज्ञान यह बता पाने में सक्षम होता है कि इसकी वजह से आँखों की परेशानी है, ह्रदय की परेशानी है, लिवर की परेशानी है या कुछ और परेशानी है|

कुंडली के द्वारा यह भी देखा जा सकता है कि जीवन के किस अवस्था में व्यक्ति इस  प्रकार के रोग से ग्रसित होगा, कब उससे बाहर आएगा या कब उसके लिए घातक हो जायेगा|

कुंडली का सिर्फ दो भाव और नक्षत्रों में ग्रहों की उपस्थिति से इतने सारे बातों कि न सिर्फ जानकारी मिलती है अपितु समस्या से बाहर आने का दरवाजा भी खुलता है|

इसके साथ देश, काल, पात्र को मिलाना होता है तब ज्योतिषीय फलादेश की जाती है|

इसके साथ साथ ग्रह, भाव और राशि से बनने वाले योग के साथ साथ कोट चक्र, सर्वतोभद्र चक्र, दशा आदि का सूक्ष्म विश्लेषण करने के बाद ही फलादेश किया जाता है|

सोचिये जब आप स्वयं इन चीजों को जान जायेंगे तो क्या आप स्वस्थ नहीं होंगे? और आप स्वस्थ होंगे और तनावमुक्त रहने लगेंगे तो आपका मेडिकल बिल क्या शून्य नहीं हो जायेगा| क्या आपका जीवन आनंदमय नहीं होगा|

क्या आप ऐसी विधा, ज्योतिष विधा को जानना नहीं चाहेंगे?

तो देर किस बात की??

दिशाहीन समाज और दिग्भ्रमित युवाओं का निर्माण करनेवाले मठाधीशों से बचिए |

उठिये, जागिये और पूरी शिद्दत से ज्योतिष को स्वयं जानने का प्रयास शुरू कीजिये|

अपने स्वास्थ्य के नियंता स्वयं बनिए|

ऐसा मैं इसलिए कह पा रही हूँ क्योंकि ज्योतिष में मेरी रूचि है और पिछले 16 वर्षों से प्रकृति के रहस्यों को ज्योतिष के माध्यम से समझने हेतु प्रयास रत हूँ| शोध रत हूँ|