होलिका दहन

Holi 2021: All you need to know about story of Prahlad and Lord Narasimha  on Holika Dahan

(फोटो, साभार: google )


नंदी ओ नंदी कहाँ हो तुम .. वशिष्ठ बाबू ने अपनी दुलारी पोती नंदी को आवाज दी।
बस यहीं हैं बाबा। खाना खा रहे हैं। बताइए क्या बात है।
अच्छा अच्छा, खाना खा लो फिर आओ आज तुमको एक जादू के बारे में बताएंगे।
आप तो ज्योतिष के बारे में बता रहे थे न बाबा त अब इ जादू कहाँ से आ गया??
अरे ज्योतिष का ही जादू बतलाएंगे ।
बाबा आप क्या कह रहे हैं हमको त कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है।
आते हैं हम खाना खा के।
हाँ बाबा हम आ गए।अब बताइए हमको आप जादू के बारे में।
वशिष्ठ बाबू ने स्नेह से नंदी के सर पर हाथ फेरते हुए कहा ..
आओ होलिका दहन के बारे में बताएं।
उ त हम जानते हैं बाबा कि होलिका, #प्रह्लाद को गोदी में लेकर आग में बैठ गई त होलिका जल गई आ प्रह्लाद बच गया।

क्या ये जानती हो नंदी..

प्रह्लाद को न तो अस्त्र शस्त्र के द्वारा मारा जा सका न तो जल में डूबा कर मारा जा सका और न ही उसे अग्नि जला सकी ..

क्यों??

क्या उसका शरीर अन्य प्राणियों से भिन्न था ??

क्या उसका शरीर प्रकृति के नियमों के विरुद्ध काम कर रहा था ??

बाबा एतना बड़का बड़का बात सुन के त मेरे दिमाग का बत्तीए भुकभुकाने लगा है। आप ही बताइए।

इसका जवाब है #ज्योतिष के पास.. वशिष्ठ बाबू ने कहा।

उ कइसे बाबा ??

आत्मा –
“नायँ हन्ति न हन्यते”

“अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
न हन्यते हन्यमान शरीरे ।।”

शरीर के माध्यम से मन को साधकर, शरीर को ऐसा बना देना कि न तो अस्त्र से न शस्त्र से न जल से न अग्नि से इसका नाश हो सके। मतलब आत्मा के गुण को शरीर पर आक्षेपित कर देना।

त इसमें ज्योतिष कहाँ आया बाबा .. नंदी ने अधीर होते हुए पूछा।

कुंडली का लग्न भाव, #चंद्र और #सूर्य इन तीनों के सम्यक् ज्ञान के द्वारा हर मनुष्य चाहे तो मन को आत्मा बना ले या आत्मा को मन बना ले।
आत्मा को मन बनाकर जीवन मरण के चक्र में घूमें या मन को आत्मा बना कर इस चक्र से मुक्त हो जाएँ ..
निर्णय हमारे हाथ में है…

कुछ समझी पोतू..

जी बाबा थोड़ा थोड़ा दिमाग में घुस रहा है।
कुछ समय लगेगा दिमाग का बत्ती जलने में।
चंद्र, सूर्य और लग्न को समझने में …

मन और आत्मा का रंग मुबारक!
जीवन का हर रंग मुबारक!!