शिवशक्ति

सती ने जब सीता  जी का रूप बनाया तब शंकर जी ने सोचा कि अब तो ये मेरी माँ हो गयी तो ऐसी स्थिति में मैं इनका पति कैसे बना रह सकता हूँ|

” जौं अब करउँ सती सन प्रीति| मिटइ भगति पथु होइ अनीति||”

शिव ने सती का त्याग किया|

सती जब पार्वती हुईं तब सालों साल तपस्या करने के बाद फिर से शिव और पार्वती एक हुए|

पर कब ??

सती जब पार्वती हुईं|

सती – दक्ष कुमार की बेटी, बुद्धि से भरपूर| अपनी बुद्धि पर ज्यादा भरोसा होना| चतुराई दिखाना|

दक्ष कन्या से जब हिमाचल पुत्री बनीं तब धीरता आयी| भक्ति और विश्वास का प्राकट्य हुआ| पार्वती ने तप किया और शिव पार्वती एक हुए|

इस प्रसंग में सुखमय / दुखमय  वैवाहिक जीवन हेतु ज्योतिषीय योगों की विस्तार से चर्चा है| उसकी चर्चा फिर कभी|

आज, सुखमय जीवन और समृद्ध जीवन कैसे हो इसके लिए सम्पूर्ण मानव जाति को शिव के द्वारा प्रदत्त    मूल मन्त्रों की चर्चा करें और जानें कि वह क्या है|

वह है-

 भक्ति, श्रद्धा और विश्वास|

साथ में..

चतुराई नहीं, सत्य और समर्पण|

आइये शिव और माँ गौरी के प्रति भक्ति भाव से, सत्य, श्रद्धा और विश्वास के साथ समर्पित हो जाएँ|

#महाशिवरात्रि

११/०३/२०२१