जानें तिथि

नंदी ओ नंदी कहाँ हो? वशिष्ठ बाबू ने दलान पर से नंदी को आवाज देते हुए कहा|

यहीं हैं घर में बाबा, खाना बनाने में माँ का हाथ बंटा रहे हैं| माँ कह रही है कि आज सप्तमी तिथि है, आज मंदिर में भोग बनाकर लेकर जाएगी|

अरे वाह! तुम तो खूब होशियार हो गयी हो| अच्छा सुनो, काम निपटा के आ जाना अपना पोथी पत्रा ले के|

आज क्या सिखाईयेगा बाबा?

आज हम तुमको तिथि बनने की बात सिखाएंगे, जिससे कि दुल्हिन जब रामवरण को पंडित जी के यहाँ भेजेगी यह पूछने  कि पूर्णिमा कब है, एकादशी कब है या और भी कोई तिथि तो तुम फटाक से बता देना|

वाह बाबा ये तो बहुत बढ़िया रहेगा| हम अपने दोस्तों को भी बताएँगे|

थोड़ी देर पश्चात् नंदी अपने पोथी पत्रा के साथ वशिष्ठ बाबू के सामने हाजिर हो गयी|

आ गयी बाबा, अब बताईये|

हाँ तो सुनो-

1 घटी = 24 मिनट ।

2 घटी = 48 मिनट (एक मुहूर्त)

2.5 घटी (ढाई घटी) = एक घंटा

60 घटी = 24 घंटे = एक तिथि

एक तिथि, सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक का समय होता है| हर पक्ष में पंद्रह तिथियां होती है| एक पक्ष में प्रतिपदा से अमावस्या तक और दूसरे पक्ष में अमावस्या के बाद पुनः प्रतिपदा से शुरू होकर पूर्णिमा तक|

इसमें ध्यान रखने वाली बात यह है नंदी बेटा कि हर दिन बारह घंटे का और हर रात बारह घंटे का यानि बराबर बराबर घंटों का नहीं होता| ऐसा पूरे साल में केवल दो दिन ही होता है| बाकी के दिन ये घटते, बढ़ते रहते हैं| इसी के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त होता है| इसको विस्तार से बाद में बताएँगे| चंद्र की गति घटने बढ़ने के कारण तिथि घटती या बढ़ती रहती है| इन तिथियों के भी नाम होते हैं|

वैसा नाम, जैसा मेरा नाम है बाबा?

हाँ वैसा ही नाम| लेकिन  इसको भी हम दूसरे दिन बताएँगे|

ओके बाबा |

लेकिन बाबा, कभी कभी मां को आप कहते हैं कि आज तिथि खत्म हो गया, उ क्या है?

तिथि खत्म हो गया, ऐसा हम कब बोले?

मामा आप ही बताईये बाबा को, नंदी ने अपनी मामा की तरफ देखते हुए कहा|

हाँ ठीके त कहइय नंदी, तिथि क्षय के बात कह रहल है|

अच्छा त ऐसे कहो न| तिथि खत्म बोलने से कैसे समझ आएगा| अब जानो कि तिथि क्षय क्या होता है|

तिथि क्षय

यदि कोई तिथि सूर्योदय के बाद आरंभ हो और अगले सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाती है तो उस तिथि का क्षय हो जाता है। और नंदी की भाषा में कहें तो तिथि खत्म हो जाता है, वशिष्ठ बाबू ने हंसते हुए कहा|

अब एक बात और भी जानो| तिथि बढ़ भी जाता है, जिसको तिथि वृद्धि कहते हैं|

तिथि वृद्धि

कोई भी तिथि जब सूर्योदय से पूर्व आरंभ हो जाती है और अगले सूर्योदय के बाद तक रहती है तो उस तिथि की वृद्धि हो जाती है|

तिथियों का निर्धारण सूर्य और चन्द्रमा की परस्पर गतियों के आधार पर होता है। सूर्य, चन्द्रमा का अन्तर जब शून्य से अधिक बढ़ने लगता है और 12° होता है तो एक तिथि का निर्माण हो जाता है|  

अमावस्या

जब सूर्य और चन्द्रमा एक स्थान (एक ही अंश) पर होते हैं तब अमावस्या तिथि होती है। इस काल में  सूर्य और चंद्रमा का अंतर शून्य होता है।

पूर्णिमा-

इसी प्रकार जब सूर्य और चंद्र का परस्पर सम्बन्ध 180° का होता है, तो पूर्णिमा होता है|

नंदी ने बाबा को बीच में ही रोकते हुए कहा, माने हमको बारह का पहाड़ा अगर ठीक से याद है त हम तिथि को बढ़िया से समझ कर बता सकते हैं?

हाँ बेटा, ये तो तुमने बड़ी समझदारी की बात कही| तुम्हारे दिमाग का बत्ती खूब तेजी से जलने लगा है|

हाँ बाबा हमको समझ में आने लगा थोड़ा थोड़ा|

बारह का बारह, बारह दूना चौबीस, बारह तिया छत्तीस.. बारह नवां अठोत्तर से..   नंदी दोहराते हुए खुश होकर गाने लगी|

अब तो सबको हम तिथि बताएँगे| है न बाबा?

हाँ रे, अब तुम्ही सबको बताना .. वशिष्ठ बाबू ने नंदी के सर पर लाड से हाथ रखते हुए कहा|