ग्रहों के दोस्त और दुश्मन

दुल्हिन कहाँ हैं आप ? और आज घर में इतना शांति काहे है? नंदी और नंदू  भी कहीं दिखाई नहीं दे रहे और न ही बच्चों की मामा दिख रही है| कहाँ हैं सब के सब? वशिष्ठ बाबू ने दलान पर से आवाज लगाई|

आई बाबूजी ! माँ तो पड़ोस में गयी हैं नंदी के साथ और नंदू अपने दोस्तों के साथ सिनेमा देखने गया है|

इस लड़के को कुछ ज्यादा ही चस्का लग गया है सिनेमा देखने का और दोस्तों के साथ मटर गस्ती करने का| आज इससे भी बात करनी होगी|

क्या हुआ बाबूजी, कोई दिक्कत वाली बात है क्या?

हाँ दुल्हिन, नंदू की कुंडली से, तीसरे भाव की दशा शुरू हुई है| हालाँकि इसका सम्बन्ध बुध से बना हुआ है लेकिन पंचम भाव और भावेश के साथ संबंधों में कमी आयी है|

क्या मतलब हुआ इसका बाबूजी?

इसका मतलब ये हुआ कि अब इसके पढाई को लेकर जरा संभलने की जरूरत है| कुम्हार जिस प्रकार घड़े को गढ़ता है , उसी प्रकार इसको भी बड़े प्यार से सहारा देकर गढ़ना होगा| नहीं तो दोस्तों के चक्कर में इसका पढाई गड़बड़ा जायेगा|

हम करेंगे आज बात उससे| अभी तो ये बताइये  कि नंदी को लेकर पड़ोस में क्यों गयी है उसकी मामा ?

क्या फिर किसी से नंदी झगड़ ली है?

हाँ आपको त हमहि झगड़ालू दिखाई देते हैं, नंदी ने अंदर आते हुए कहा| हम नहीं झगड़े थे| उ जो कंचन नहीं है, वही कैलाश बाबा की पोती| मेरा किताब ले गयी थी मांग कर और फाड़, फूड़ के लौटाई है| त बताईये इ कोनो अच्छा बात हुआ क्या? हम मामा को साथ लेकर उसको बोलने गए थे कि नया किताब खरीद कर दो हमको| बस एतने बोले हैं हम, भरोसा नहीं है त पूछ लीजिये मामा से|

अरे हमको पूरा भरोसा है अपनी नंदी पोती पर| अच्छा चलो हाथ मुँह धोकर आ जाओ| आज हम तुमको ग्रहों के दोस्त और दुश्मन के बारे में बताएँगे, वशिष्ठ बाबू ने दुलार से नंदी को कहा|

ग्रहों के भी दोस्त और दुश्मन होते हैं बाबा? ठीक वैसे ही जैसे माला, चंदा हमारी दोस्त है और हेमा हमको नहीं भाती है?

इसको जानना त बड़ा मजेदार होगा बाबा| हम जल्दी से हाथ मुँह धोकर और कॉपी, कलम लेकर आते हैं|

आ गए बाबा, अब बताईये|

अच्छा, अब देखो  ग्रहों के दोस्त, दुश्मन और वैसे जो न दोस्त है न दुश्मन|

न दोस्त न दुश्मन ये कैसे होगा बाबा? कुछ त होगा|

अरे नहीं, अब बताओ, ये जो स्मिता है, रामनारायण बाबा की पोती उससे न तुम्हारी दोस्ती है, न दुश्मनी| है की नहीं? कभी कभी उससे मिलना होता है| होता है न? न मिलने की ख़ुशी न बिछड़ने का गम, कोई असर नहीं|

हाँ बाबा, नंदी ने सर हिलाते हुए कहा|

तो अब देखो –

1 – सूर्य का :-

दोस्त है- मंगल, चंद्र और गुरु|

दुश्मन है- शुक्र और शनि|

न दोस्त न दुश्मन है- बुध|

2 – चंद्र का :-

दोस्त है- बुध और सूर्य|

इसका कोई दुश्मन नहीं है|

न दोस्त न दुश्मन है- मंगल, गुरु, शुक्र और शनि|

3 – मंगल का :-

दोस्त है- सूर्य, चंद्र, गुरु|

दुश्मन है- बुध|

न दोस्त न दुश्मन है- शुक्र और शनि|

4 – बुध का :-

दोस्त है – सूर्य और शुक्र|

दुश्मन है- चंद्र|

न दोस्त न दुश्मन है- मंगल, गुरु और शनि|

5 – गुरु का :-

दोस्त है – मंगल, सूर्य और चंद्र|

दुश्मन है – शुक्र और बुध|

न दोस्त न दुश्मन है- शनि|

6 – शुक्र का :-

दोस्त है – बुध और शनि|

दुश्मन है – सूर्य और चंद्र|

न दोस्त न दुश्मन है – मंगल और गुरु|

7 – शनि का :-

दोस्त है- शुक्र और बुध|

दुश्मन है – मंगल, सूर्य और चंद्र|

न दोस्त और न दुश्मन है- गुरु|

चलो अब इ सबको याद करो और अभ्यास करो|

अरे बाबा आप त साते ग्रह के दोस्त दुश्मन के बारे में बताये |  राहु, केतु के दोस्त और दुश्मन के बारे में त बतइबे  नहीं किये| उसको भी त बताईये|

वे दोनों छाया ग्रह हैं|

अब ये छाया ग्रह क्या है ? मेरा त दिमागे घुमा दिए आप| मेरे दिमाग के बत्ती का फिउजे उड़ा दिए बाबा|

अच्छा अच्छा! अभी इसका अभ्यास करो| इसके अभ्यास से तुम्हारे दिमाग का बत्ती फिर से भुक्क से जल जायेगा|

ओके बाबा ! नंदी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा|