बाधित हो सकती है राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया ??

श्री  राम के गृह निर्माण के शुरू होने के समय को लेकर बहुत सी बातें हुईं| भूमि पूजन के मुहूर्त को लेकर भी बातें हुई  कि यह मुहूर्त अशुभ है।

बहुत से लोगों ने तो यह भी कहा  कि गुरु वशिष्ठ द्वारा श्री राम राज्याभिषेक का मुहूर्त निकालने के बाद भी क्या हुआ ??

1 – गुरु वशिष्ठ ने पहली बार जब श्री राम राज्याभिषेक की बात की, तब कहा –

वेगि बिलंबु करिअ नृप साजिअ सबुई समाजु।

सुदिन सुमंगल तबहिं जब राम होहिं जुबराजु ।।

                                        -(अयोध्याकाण्ड)

मुहूर्त नहीं बताया गुरु वशिष्ठ ने।

2 – गुरु वशिष्ठ ने दूसरी बार जब श्री राम राज्याभिषेक की बात की, तब कहा –

आज सुदिन सुभ घरी समुदाई

सब द्विज देहु हरषि अनुसासन

रामचंद्र बैठहिं सिंहासन

                                                             -( उत्तरकाण्ड )

यहाँ ‘घरी’ कहा गुरू ने। घटी को लोक भाषा में घरी कहा तुलसीदास जी ने। यहाँ मुहूर्त की चर्चा की

अब उनके गृह निर्माण से जुड़ी बातें और ग्रहों के संकेत|

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा “राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है, जबकि भगवान राम न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं। ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दी जाए।“

कलयुग में श्री राम को अपने गृह निर्माण के लिए भी लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी| अब जब उनके गृह निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो ऐसे में उनके सेवकों का यह कर्त्तव्य और दायित्व दोनों बनता है यह देखने का कि निर्माण प्रक्रिया में पुनः कोई विघ्न नहीं आये| सारे कार्य निर्विघ्न संपन्न हो जाएं| आज देश का प्रत्येक व्यक्ति इस कार्य के अबाध संचालन हेतु अपने-अपने तरीके से एक ‘गिलहरी प्रयास’ कर रहा है, मैंने भी वही एक छोटा सा प्रयास किया है|आने वाले समय में ग्रहों के संचरण और देश की दशा के अनुसार मैंने इसे देखने का प्रयास किया है| मंदिर निर्माण और पूजा स्थल के लिए शास्त्रीय ज्योतिषीय योग के अनुसार, नवम भाव, चतुर्थ भाव और द्वादश भाव को आधार बनाकर मैंने विश्लेषण किया है|

रामचरितमानस में कहा गया है कि हम जब भी कोई महत्वपूर्ण कार्य करने निकलते  हैं तो मार्ग में विघ्न और बाधाएं आती हैं|

 तो क्या इस महत्वपूर्ण कार्य के क्रियान्वयण में कोई विघ्न, बाधा आएंगी या यह कार्य निर्विघ्न संपन्न होगा|

1 – भूमिपूजन, 5 अगस्त 2020 के अनुसार  –

तुला लग्न और वृष नवांश की कुंडली है|

नवांश में चतुर्थेश का अष्टम भाव में होना और चतुर्थ भाव पर शनि और मंगल दोनों का प्रभाव होना, निर्माण कार्य में विघ्न उपस्थित होने का संकेत दे रहे हैं|

 2 – भारत की कुंडली, वर्तमान में ग्रहों की स्थिति के अनुसार-

लग्न भाव और सप्तम भाव (वृषभ और वृश्चिक राशि), राहु और केतु के प्रभाव में हैं|

नवम भाव गुरु और शनि दोनों के प्रभाव में है|

3 – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के समय ग्रहों द्वारा दिए जाने वाले संकेत के अनुसार-

वृष लग्न और कुम्भ नवांश की कुंडली है|

चतुर्थेश का एकादश भाव में, जलतत्व राशि मीन में चंद्र के साथ होकर शनि से दृष्ट होना, चतुर्थ भाव पर मंगल और अष्टमेश की दृष्टि होना, मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया में विघ्न उत्त्पन्न होने का संकेत है| नवांश में चतुर्थेश और नवमेश दोनों के ऊपर वैसे मंगल की दृष्टि अष्टम भाव से होना जो चंद्र से दृष्ट है, जन्म कुंडली में बनाये जाने वाली योगों की पुष्टि करता है|

हालाँकि नवम भाव से गुरु की दृष्टि इन विघ्नों से मुक्ति हेतु सुरक्षा कवच भी प्रदान कर रहे हैं, परन्तु गुरु का तुला राशि में होना इस कवच की मजबूती पर प्रश्नचिह्न भी खड़े कर रहा है|

4 – 26 मई 2021 को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत की कुंडली में वृष और वृश्चिक अक्ष में लगने वाले चंद्र ग्रहण में नवम भाव मंगल के प्रभाव में जा रहा है| इस ग्रहण के तीन दिन पहले शनि वक्री हो रहा है|

5 – 10 जून 2021 को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत की कुंडली में पुनः वृष और वृश्चिक अक्ष में लगने वाले सूर्य ग्रहण में, नवम भाव फिर से मंगल के प्रभाव में जा रहा है|

6 – देश की विंशोत्तरी दशा चंद्र में शनि की चल रही है| शनि नवमेश है |

इस प्रकार से हमने भूमि पूजन के समय की कुंडली, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की कुंडली, देश की दशा और आने वाले समय में लगने वाले चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण इन सबके आधार पर यह देखा कि चतुर्थ भाव, चतुर्थेश की पीड़ा और नवम भाव, नवमेश की पीड़ा, ऊपर वर्णित घटनाओं के समय बनी हुई है|

भूमि पूजन के समय द्वादश भाव पर मंगल का प्रभाव:

 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की कुंडली में चतुर्थ भाव पर मंगल का प्रभाव और नवांश  में चतुर्थेश और नवमेश दोनों पर मंगल का अष्टम से प्रभाव, कार्य में विघ्न को दर्शाते हैं| नवांश में द्वादश भाव में बुध का अष्टमेश होकर मकर राशि में बैठना, मंदिर निर्माण के शिल्प और वास्तु से सम्बंधित बातों पर आगे बढ़ने से पहले, पुनरावलोकन किये जाने और गहन शोध किये जाने का संकेत दे रहे हैं|

ग्रहों से यह विनती:

जब श्री राम का जन्म हुआ था तो जिस प्रकार सभी अनुकूल हो गए थे वैसे ही वे सभी अनुकूल हो जाएं और गृह निर्माण के मार्ग में आने वाली हर बाधाओं को दूर करें|