2021 -एशिया में सबसे तेज उभरती हुई अर्थशक्ति भारत

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फोटो: साभार- google

आज हमलोग जाते हुए वर्ष 2020 के अलोक में आते हुए वर्ष 2021 को भी देखेंगे और यह  जानेंगे कि इस आते हुए वर्ष में ग्रहों के क्या संकेत हैं|

2020 में ग्रहों ने जो योग बनाये वह विश्व में अप्रत्याशित मोड़ लेकर आनेवाला रहा| आर्थिक मंदी, कोरोना विषाणु का संक्रमण, कामगारों के लिए काम की समस्या, विद्यार्थियों के लिए क्या होगा भविष्य, यह परेशानी, भारत और चीन के बीच आपसी तनातनी, इसी तरह के अन्य कई समस्याओं को लेकर आने वाला वर्ष रहा 2020 |

देश की दशा और ग्रहों के संचरण के अनुसार आने वाला 2021 कैसा रहेगा, आइए इसे देखें-

किसान आंदोलन – ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि सरकार द्वारा किसानो को आज़ादी देने की बात की जा रही है लेकिन किसान कह रहे हैं कि नहीं हमें नहीं चाहिए| कितने आश्चर्य की बात है ये कि हम आज़ाद होना नहीं चाहते| खुले विकल्पों को स्वीकारना नहीं चाहते|

30  तारीख से शुरू होने वाले पक्ष में ग्रहों के संचरण के अनुसार सरकार और किसान, दोनों पक्षों के बीच की बातचीत में MSP पर हो सकता है किसानों के कुछ धड़े सरकार से अपनी सहमति जताये| एक अप्रत्याशित और निर्णायक मोड़ लेकर आने वाला पक्ष होगा यह पक्ष|

भारत चीन विवाद – भारत के युद्धनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किये जायेंगे| किसी बड़े युद्ध की संभावना नहीं है लेकिन हमें सतर्क और सचेत रहने की जरूरत है| चीन हमें देश की सीमा पर तो उलझा कर रखेगा ही साथ ही साथ यह देश के भीतर भी अपना उपद्रवी प्रयास बढ़ाएगा| धर्म और जातीयता के नाम पर असंतोष बढ़ाकर आंतरिक रूप से देश को अस्थिर करने के प्रयासों में तेजी लाएगा| चीन अपनी छल नीति का प्रयोग करके हमें उकसाने का कार्य करेगा, भिन्न भिन्न षड्यंत्रों के माध्यम से हमें घेरने का प्रयास करेगा लेकिन भारत उसके बिछाये जाल में नहीं फंसेगा| भारत अभी मजबूत स्थिति में है| परन्तु हाँ सीमा सम्बन्धी नीतियों में हमारी छोटी सी भी चूक आत्मघाती हो सकती  है| जलीय मार्ग,समुद्री मार्ग पर हमें गिद्ध दृष्टि रखनी होगी| चीन के साथ साथ पाकिस्तान पर भी नज़र रखे जाने की जरूरत है| एक बड़े जलीय दुर्घटना का संकेत ग्रहों द्वारा दिया जा रहा है|

कोरोना से मुक्ति– शुरुआती  कुछ महीनों में तो इससे मुक्ति मिलती नहीं दिखाई देती है ( इसकी चर्चा मैंने पहले भी की है), लेकिन धीरे धीरे मार्च के बाद से इसके प्रकोप में थोड़ी कमी आनी शुरू होगी जो कि जून से और भी ज्यादा सुधार की राह पर जायेगा|

एक महत्वपूर्ण किन्तु चिंताजनक संकेत पानी से होने वाले रोगों में वृद्धि का मिल रहा है|

आर्थिक मंदी – 2021 में सँभलने के अवसर आएंगे, फरवरी के बाद से कुछ सुधारवादी प्रयास किये जायेंगे, कुछ नीतियां  अपनाई जाएँगी और उसका सुखद परिणाम भी हमें दिखाई देगा| लेकिन कुल मिलकर अगर ग्रहों के संकेतों को देखा जाये तो थोड़े बहुत उतर चढ़ाव के बीच यह मंदी जारी रहेगी|

गुरु का कुम्भ राशि में प्रवेश के समय शुक्र का उच्च का होकर सूर्य और बुध के साथ होना, वैसे समय में जब भारत की दशा तुला की चल रही हो, यह संकेत दे रहे हैं –

1-इस वर्ष आर्थिक उन्नति तो सामान्य होगी लेकिन यहाँ  से यह आर्थिक क्षेत्र में  एशिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले देश के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा|

2  – बैंकिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किये जायेंगे|

3 – अप्रैल से अगस्त के बीच में भारत ही नहीं वरन विश्व में राजनैतिक और सैन्य गतिविधियां बढ़ेंगी जिसकी वजह से विश्व के कई देशों के साथ भारत के पहले से चले आ रहे व्यापार सम्बन्ध बाधित होंगे और नए संबंधों की नींव डालेगी|

career को लेकर वैसे छात्र या व्यक्ति, जो  जो निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं कि क्या निर्णय करें, देश से बाहर जाकर नौकरी करना चाह रहे हैं  तो उनके लिए ग्रहों का यह संकेत है कि एक बार अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करें| यूरोपीय देशों में, अमेरिका में रोजगार के अवसर कम होंगे| अपने देश में आर्थिक मंदी के बावजूद रोजगार के नए क्षेत्र का निर्माण होगा| अपने देश में भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी|

यह जो समय है इसमें यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत मिल रहा है कि इस समय भारत इस प्रकार की रणनीति पर काम करेगा जो कि आने वाले समय में इसे विश्व का सिरमौर बना सके|विश्व इतिहास  में एक नया अध्याय लिखे जाने की शुरुआत होगी, जिसमें आने वाले दस वर्षों में भारत के विश्व गुरु बनने की गाथा होगी|

जनवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर फ़रवरी के तीसरे सप्ताह के बीच मौसम में अप्रत्याशित बदलाव और प्रकृति के असंतुलन का संकेत है|

अप्रैल से जुलाई के बीच  पाकिस्तान के साथ ऑपरेशन POK की शुरुआत हो सकती है|

कुल मिलाकर यदि जाते हुए वर्ष के अलोक में आने वाले वर्ष को देखा जाये तो यही कहा जायेगा कि आने वाला वर्ष 2020 के बनिस्पत बेहतर तो होगा लेकिन खूब आशाओं और उम्मीदों का संचार नहीं करेगा| रामचरितमानस में तुलसीदास ने कहा है -” भावी मेट सके त्रिपुरारी” – शिव में प्रारब्ध को मिटाने की शक्ति है| तो आइये हमलोग शिव की शरण में चलें और आने वाले वर्ष की हर अशुभता को शुभता में बदल देने हेतु तप करें|

@बी कृष्णा