पूर्ण सूर्यग्रहण

Total solar eclipse 2020 to darken the sun Monday: How to watch from  anywhere - CNET
फोटो, साभार: google

14 दिसंबर 2020,अमावस्या (सोमवती अमावस्या) को इस वर्ष का अंतिम ग्रहण लगने वाला है| यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा|

पूर्ण सूर्य ग्रहण क्या है ?

सूर्यग्रहण पूर्णतः खगोलीय घटना है जो हर वर्ष घटित होता है|

पृथ्वी और सूर्य के बीच जब चन्द्रमा आ जाता है(तीनों एक सीध में आ जाते हैं) और इसकी वजह से पृथ्वी के एक हिस्से पर चन्द्रमा की छाया पड़ती है| पूर्ण सूर्यग्रहण में  सूर्य,चन्द्रमा के पीछे पूरी तरह से छुप जाता है|

ऋग्वेद के अनुसार :-

1- ऋग्वेद में ऋषि अत्रि ने स्वरभानु ( चन्द्रमा ) नामक असुर द्वारा सूर्य को अपनी गिरफ्त में लेने की बात कही है| इसकी वजह से पृथ्वी पर गहन अंधकार छा जाता है| इस अंधकार में और रात्रि के समय व्याप्त होने वाले अंधकार में बहुत अंतर होता है| इस समय के अंधकार की वजह से पशु पक्षी भयभीत होकर अस्वाभाविक व्यवहार करने लगते हैं|

2 – इसके बाद वे कहते हैं कि स्वरभानु का सूर्य को अपनी गिरफ्त में लेने की वजह से वायु ने अपनी दिशा बदल ली| वायु के दिशा परिवर्तन की बात करते हैं| गति परिवर्तन की बात नहीं करते हैं|

3- समुद्र जल के pH मान में परिवर्तन होने लगता है| pH मान में परिवर्तन अर्थात जल के अम्लीयता और क्षारीयता में परिवर्तन की बात करते हैं| समुद्र जल में आये इस परिवर्तन की वजह से समुद्र में रहने वाले जीवों और जंतुओं पर इसका प्रभाव पड़ता है|

4 – ग्रहों के आपसी तालमेल में गड़बड़ी की वजह से पेड़ पौधों में आनेवाले फूलों और फलों की संरचना पर असर होता है|

 रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण में अरण्य कांड में ग्रहण की चर्चा की गयी है |

भगवतगीता में भी एक ही पक्ष में दो ग्रहण और उनके असर की बात कही गई है| राष्ट्र और राजा पर इसके प्रभाव की चर्चा की गयी है|

राष्ट्र और राजा पर प्रभाव

इतिहास में चलें तो सूर्यग्रहण के साथ साथ ही युद्ध चलता है| तमाम ऐसे बड़े युद्ध मिलते हैं जिनकी शुरुआत ग्रहण के आस पास हुई है| यहाँ इतिहास में वर्णित एक ग्रहण की चर्चा  बनती है| 5 मई 840 का पूर्ण सूर्य ग्रहण| इस ग्रहण से यूरोप का राजा इतना परेशान हो जाता है कि कुछ ही समय पश्चात् उसकी मृत्यु हो जाती है| उसकी मृत्यु के बाद उसके पुत्र गद्दी के लिए आपस में युद्ध करते हैं जिसकी परिणति वर्ष 843 में होती है|  यूरोप तीन भागों में बंट जाता है जिसे आजकल हम सब फ्रांस, ज़र्मनी और इटली के नाम से जानते हैं|

ज्योतिषशास्त्र के तहत मेदिनी ज्योतिष अध्याय में इसकी चर्चा की गयी है|

किस भाव में किस राशि में ग्रहण लग रहा है इसको देखने के साथ साथ राश्याधिपति की क्या स्थिति है, नक्षत्राधिपति  की क्या स्थिति है, यह भी देखना है| 14 दिसंबर को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि में लगेगा|

दिसंबर माह/ वृश्चिक राशि में होने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण के समय बनने वाले योगों के अनुसार मौसम में अप्रत्याशित परिवर्तन की स्थिति बनेगी|

मार्गशीर्ष माह(अगहन माह) में लगनेवाला यह ग्रहण महिलाओं, राजा, राजकुमार, चिकित्सक, व्यापारी, विषैले हथियारों को प्रयोग करनेवाले योद्धाओं के लिए अहितकर होगा| पेड़ पौधों की क्षति होगी| पशुधन का नाश होगा| पित्त का प्रकोप बढ़ेगा और आँखों से सम्बंधित बीमारी बढ़ेगी|

हालाँकि यह ग्रहण भारतवर्ष में नहीं देखा जाएगा लेकिन आठ ग्रहों का इन्द्र और वरुण नाड़ी में स्थित होना यहाँ भी मौसम के उत्पात की स्थिति तो बना ही रहे हैं| भारत के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से के साथ-साथ कश्मीर, हिमाचल और काँगड़ा घाटी इससे अधिक प्रभावित होंगे|

दक्षिण अमेरिका के चिली, अर्जेंटीना और ब्राज़ील पर इनका ज्यादा प्रभाव देखा जायेगा|

14 दिसंबर को ग्रहण के साथ साथ अन्य ग्रह भी कुछ इस प्रकार से गति  कर रहे हैं कि इस दिन से शुरू होने वाला पक्ष प्राकृतिक असंतुलन को दर्शा रहे हैं| पर्वतारोहियों को यह सलाह कि पर्वतीय तूफान आने की स्थिति तैयार हो रही है तो पर्वतारोहण करने से पहले यथा निर्देशित अध्ययन कर लें|

तूफान, चक्रवातीय तूफान, वज्राघात, तेज बारिश, हिमस्खलन और भूस्खलन की स्थिति बन सकती है|

गर्भवती महिलाएं क्या करें –

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर में ही रहे जाने की सलाह दी जाती है| उन्हें कहा जाता है कि अगर इस दौरान वे घर से बाहर निकलेंगी तो उनका बच्चा खंड तालु अर्थात कटी हुई तालु लेकर पैदा होगा| यह एक विचारणीय प्रश्न है कि सूर्य ग्रहण के दौरान जितने भी बच्चे होंगे क्या वे खंड तालु लेकर ही पैदा होंगे?

एक नज़र ज्योतिष में वर्णित षोडश संस्कारों पर भी डालते हैं|

 गर्भवती महिला के तीसरे महीने में पुंसवन संस्कार किया जाता है| गर्भस्थ शिशु के लिए यह माह बहुत संवेदनशील होता है| इस समय वैदिक मंत्रोच्चार के साथ साथ आहार परिवर्तन और औषधीय प्रयोग द्वारा गर्भस्थ शिशु का लिंग परवर्तित किया जा सकता है| विज्ञान भी इस बात को मानता है कि तीसरे महीने में गर्भस्थ शिशु का लिंग परिवर्तन किया जा सकता है| चूँकि यह महीना इतना संवेदनशील होता है इसलिए वैसी महिलाएं जिनका तीसरा महीना चल रहा है गर्भ का, वे इस दौरान अपने खाने पीने की शुचिता का ध्यान रखें|

वैयक्तिक रूप से क्या करें –

ग्रहण की बात होते ही राहु केतु का स्मरण होने लगता है, और इन्हें सर्प सदृश मानकर अपने भीतर खतरे की घंटी बजती सुनाई देने लगती है| सामने सर्प की प्रतीति जानकर बस बचो ! भागो ! कोई उपाय करो कि सर्पदंश से बचा जा सके|

ग्रहण से नहीं बल्कि सांप सी विचारों की वजह से बीमार हो जाते हैं या मृत्युपाश में चले जाते हैं|

ग्रहण खगोलीय घटना है

 हर वर्ष कम से  कम चार बार और अधिक से अधिक सात बार  घटती ही हैं | इस वर्ष छह ग्रहण लगेंगे| 2011 में भी छह ग्रहण लगे थे |2013, 2018, 2019 में पांच ग्रहण लगा था| 1935 और 1982 में 7 ग्रहण लगा था| हर ग्रहण अपने साथ पंद्रह दिन आगे-पीछे दूसरे ग्रहण को लेकर आता ही है तो एक बात बताइये कि कितनी बार मरेंगे आप ??

ग्रहण और व्यापार को समझिये|

दान दीजिये|सूर्य उपासना कीजिये|

आदित्य ह्रदय स्त्रोत्र का पाठ कीजिये|

यह एक खगोलीय घटना है, आनंद लीजिये|

@ बी कृष्णा