कहीं आपकी कुंडली में केमद्रुम योग तो नहीं

चन्द्र ग्रहण पर बन रहा है दुर्लभ ...
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कुंडली में अगर चंद्र केमद्रुम योग में हो तो किस प्रकार कड़े संघर्ष के बाद मनोबांछित फलों की प्राप्ति होती है  और कमजोर दशा मिल गए तो क्या परिणाम देता है और जैसे ही शुभ दशा या मजबूत दशा का समर्थन मिलता है क्या फल मिलता है-इसे ही मैंने एक कहानी के माध्यम से बताने का प्रयास किया है|

क्या होता है केमद्रुम योग ?
जन्मकालीन चन्द्रमा से द्वितीय और बारहवें घर में जब कोई ग्रह नहीं होते हैं तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है|

पुनर्नवा

देवी! ओ देवी! कहाँ खोई हो ? भाभी ने बताया कि तुमने  खाना भी नहीं खाया है|

अजेय की आवाज़ से देवी की तन्द्रा टूटी| ओह ! आप कब आये भैया? बस अभी आया हूँ अजेय ने कहा| चलो खाना खाते हैं| खाना खाते खाते अजेय ने देखा कि देवी अभी भी खोई खोई सी है| क्या हुआ ? कुछ तो कहो? कुछ नहीं भैया कहकर देवी फिर चुप हो गयी| देवी के ब्याह को अभी कुछ ही वर्ष बीते हैं| शादी के कुछ ही समय बाद उसके पति ने एक मल्टीनेशनल कंपनी की अच्छी नौकरी छोड़कर अचानक से घर वापसी का निर्णय लिया| उसने एक बार भी यह विचार नहीं किया कि घर जाकर करेगा क्या ? या यह भी नहीं सोचा कि वह जिसे ब्याह कर लाया है उसके प्रति भी उसकी कोई जिम्मेदारी बनती है|

घर आकर देव तो परिवार में रम गया और देवी चूल्हे चौके में रमा दी गयी| खाना, कपडा, झाड़ू, बर्तन सब कुछ देवी के कन्धों पर| इसी बीच देवी गर्भवती हुई| इस अवस्था में भी कभी किसी ने देवी से यह नहीं पूछा कि तुमने खाना खाया? या थक जाती होगी काम करते करते थोड़ा आराम कर लो| देवी क्या करे? उस समय फ़ोन नहीं था घर में| चिट्ठी लिखनी पड़ती थी| देवी वह भी नहीं कर सकती थी क्योंकि एक बार उसने अपनी पीड़ा को शब्दों का रूप देकर माँ के नाम चिट्ठी लिखी थी पर उसे उसके ससुरालवालों  ने खोल कर पढ़ लिया था और देवी की पिटाई भी हुई और चेताया भी गया कि ख़बरदार जो आगे से ऐसी हरकत की|

नौकरी छोड़कर आने के बाद उसके पति को कोई नौकरी नहीं मिली| छोटे शहरों में यदि नौकरी होती तो लोग महानगरों की ओर क्यों पलायन करते?

धीरे धीरे देवी काफी कमजोर हो गयी|एक दिन तो काम करते करते देवी बेहोश होकर गिर पड़ी| उसके पति को घरवालों के सामने उसका हाल पूछना संस्कृति के विरुद्ध कार्य लगता था| सो वह तो पास भी नहीं आया| किसी तरह धीरे धीरे देवी ने होश संभाला और घर के कामों में लग गयी| घर में उसके पति पर दवाब दिया जाने लगा देवी के गर्भपात का| दलील यह दी जाने लगी कि  कि अभी तो माँ और पिता दोनों की तबीयत ठीक नहीं रहती है| तो ऐसे में इन दोनों की सेवा कौन करेगा, क्योंकि तुम्हारी भाभी की गोद में दो महीने का बच्चा है तो वह कर नहीं सकती| उसके पति ने उसे गर्भपात की बात कही| देवी ने कहा कि वह सब संभाल लेगी| उसने यह निश्चय किया कि चाहे जो हो वह गर्भपात नहीं करवाएगी|

देवी सोचती रहती कि ऐसा कैसे चलेगा|  मन ही मन प्रार्थना करती कि हे ईश्वर! मेरी खातिर नहीं तो कम से कम गर्भ में पल रहे शिशु की तो परवाह कर| कोई रास्ता दिखा| मार्गदर्शन कर|

इसी बीच एक दिन देवी के मायके से उसके पिताजी की तबीयत ख़राब होने की खबर लेकर बड़े भैया आये और ससुरालवालों से विनती की कि इसे कुछ समय के लिए मायके जाने दिया जाये|  देवी को लगा कि भैया के रूप में मानों देवदूत आये हैं| ससुराल से सिर्फ चार दिनों की अनुमति मिली और बड़े भैया को यह कहा गया कि पांचवें दिन आप इसे वापस लेकर आ जाएंगे| देवी अपने मायके आ गयी| मायके आकर पिताजी के पास होकर भी देवी उनके साथ नहीं थी| मनमस्तिष्क में विचारों का झंझावात चल रहा था| चार दिन पश्चात् फिर से उसी संसार में उसकी वापसी होगी| जहाँ उसका कोई नहीं| पति भी नहीं| क्या करे देवी?

उसकी भाभी ने देवी के मन को भांपा| उसने देवी के बालों को सहलाते हुए कहा, बबुनी बताइये कि हम जो समझ रहे हैं क्या वो सही है? खुलकर बताईये और हम पर भरोसा रखिए | देवी को भाभी की हाथों के स्पर्श में अपने प्रति स्नेह की मह्सूसी  हुई और उसने सारी बातें भाभी को बताई|

थोड़ी देर चुप रहने के बाद भाभी ने कहा उठिए बबुनी | आइये मेरे साथ| उसे लेकर भाभी बाहर आई और सभी को एक तरह से अपना फैसला सुनाया कि देवी अब ससुराल नहीं जाएगी|

पिताजी ने कुछ नहीं कहा लेकिन उनकी आँखों के कोर भींग गए| भैया ने आशीर्वाद स्वरुप अपना हाथ देवी के सिर पर रखा|

देवी को मानों यहाँ आशीष और स्नेह का संबल मिल गया| ईश्वर का उसने तहे दिल से शुक्रिया अदा किया| उसने ठान लिया कि वह एक नयी शुरुआत करेगी|

आने के बाद से ही वह मौन और उदास थी अब उसकी उदासी काफूर हो गयी और वह गुनगुना उठी- आज फिर जीने की तमन्ना है…

इस प्रकार हमने देखा कि कैसे केमद्रुम योग के चंद्र के प्रभाव ने मानसिक झंझावात उठाये| इसके साथ कमजोर दशा ने अपना असर दिखाया और कठिन परिस्थितियां उत्त्पन्न हुई| जैसे ही दशाओं में परिवर्तन हुआ और शुभ दशा का समर्थन मिला जिंदगी में उम्मीद की किरण नज़र आने लगी|
यह है जीवन के GPS – ज्योतिष की सार्थकता |

@ B Krishna