स्वतंत्र भारत की कहानी- ग्रहों की जुबानी

Independence or mere 'Transfer of Power'?
(फोटो : साभार – Google)

15 अगस्त को भारत के स्वतंत्र होने के पीछे एक बहुत ही रोचक कहानी है| इस कहानी को जानने से पहले चलते हैं इतिहास के गलियारे में और संक्षेप में जानते हैं कुछ और भी ऐसे तथ्य जो आगे चलकर भारत की आज़ादी में सहायक हुए|

  शनि और गुरु के साथ जब भी सूर्य ने एक खास संवाद कायम किया इस तरह की घटनाएं घटीं|

1757 में सतनामियों और सन्यासियों के विद्रोह से इसकी आधारशीला रखी गयी| हालाँकि तब इस विद्रोह में भारत की आज़ादी के लिए विद्रोह करना है ऐसी बात नहीं थी लेकिन इसने विद्रोह के रूप में अपनी बात मनवाने का एक अलग मार्ग दिखाया, जिसपर अंतिम चोट पड़ी 1857 में| इस वर्ष विदेशी शासन के खिलाफ आज़ादी का पहला युद्ध लड़ा गया जो देश के कुछ हिस्सों तक ही सीमित था| इस ग़दर को उस समय के बुद्धिजीवियों का समर्थन नहीं मिला था|

 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन के बाद से लोकतान्त्रिक तरीकों के माध्यम से संगठित लड़ाई लड़ी जाने की शुरुआत हुई|

1905 में बंगाल के विभाजन के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने खुलकर आवाज़ उठानी शुरू कर दी| बंगाल विभाजन के बाद पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना जगी|सितम्बर माह में मंगल, गुरु, शनि के साथ राहु और सूर्य  शामिल हुआ  बंगाल से निकलकर स्वदेशी आंदोलन पंजाब, महाराष्ट्र और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचा| यहाँ से क्षेत्रवाद का फैलाव हुआ और एक क्षेत्र से निकलकर कई क्षेत्रों में इसका फैलाव हुआ| 

1906 में मुस्लिम लीग की स्थापना से कम्युनल कार्ड खेलने की शुरुआत हुई|

1915 में हिन्दू महासभा की स्थापना हुई|

1917 में चम्पारण से गांधी जी ने एक और आंदोलन की शुरुआत की|

1919 में जलियांवाला कांड के बाद असहयोग आंदोलन की शुरुआत  हुई जिसके अगुआ बने गाँधी जी| पहली  बार देश भर में विदेशी शासन के खिलाफ सुनियोजित आंदोलन की शुरुआत हुई| 1922 में चौरी चौरा हिंसा को देखते हुए गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया| क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह आदि ने आज़ादी की लड़ाई की आग को तेज किये रखा| 1929, 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई|

1942 में सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिन्द फ़ौज का गठन किया| इस वर्ष के आते आते आज़ादी के दीवाने अपने अपने तरीके से आज़ादी के लिए व्यूह रचना करने लगे| ब्रितानिआ हुकूमत के खिलाफ अपने गुस्से का इज़हार करने लगे|मेष राशि में कृतिका नक्षत्र में मंगल और शनि के आते ही  भारतीय जनमानस का विरोध तूल पकड़ने लगा| इसी समय देश की आज़ादी के साथ साथ ही देश के बंटवारे का मसला भी चलना प्रारम्भ हो गया|  अलग अलग धरे बनने लगे और हर धरे की अलग अलग सोच और कार्यशैली रही| परन्तु कुछ बातों में सबकी एकमतता रही कि सबके राष्ट्रवाद के सपने  में अंत्योदय का सपना रहा| राष्ट्र के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने की सोच रही|

स्वतंत्र भारत

1947 की शुरुआत हुई और  शनि, गुरु और मंगल ने भी अपनी चाल बदली|राहु वृषभ राशि में था जब ब्रिटिश हुकूमत ने भारत को आज़ाद करने का निर्णय लिया|

अब सवाल यह कि जब पाकिस्तान ने 14 अगस्त 1947 को आज़ाद होना स्वीकार कर लिया तो भारत ने क्यों 15 अगस्त के आधी रात का समय  चुना| इसका जवाब है उस समय के दो प्रख्यात ज्योतिषविद श्री सूर्यनारायण व्यास जी और पंडित हरदेव शर्मा जी के पास| सर Woodrow Wyat ने अपने आलेख में इसकी चर्चा करते हुए लिखा है कि जब इन दोनों को, भारत वर्ष को ब्रिटिश हुकूमत से आज़ादी दिए जाने की खबर मिली तो इन लोगों ने कहा कि यह दिन ज्योतिष के हिसाब से सही नहीं है| जब इन्हें बताया गया कि ब्रिटिश हुकूमत 15 तारीख से आगे दिन को नहीं बढ़ा सकती है तब उन्होंने आधी रात का मुहूर्त निकला| इस समय मुहूर्त निकले जाने के पीछे निम्नांकित कारण रहे:

1 इस समय तक चन्द्रमा का प्रवेश मुहूर्त के लिए अत्युत्तम माने जानेवाला पुष्य नक्षत्र में हो जायेगा| इसे देव नक्षत्र भी कहा जाता है|

2 अभिजीत मुहूर्त रहेगा|

3 स्थिर राशि, वृषभ राशि जिसे रामचरितमानस में धर्म राशि कहा गया है, लग्न में उदित हो रहा होगा|

इन तीन बातों के अलावा इस समय बननेवाली कुंडली में दशम भाव पर गुरु का प्रभाव और दशमेश का प्रवज्या योग में तृतीय भाव में शामिल होना यह निर्धारित कर रहे होंगे कि भारत अपने ज्ञान के माध्यम से विश्व को जोड़ने वाला बनेगा |

देश के स्वतंत्र होने में ज्योतिषीय मुहूर्त की अहम् भूमिका रही| इतने वर्षों से शनि, गुरु, मंगल और सूर्य जिस क्षण की तैयारी में लगे थे उसकी पूर्णता हुई अभिजीत मुहूर्त में|

आने वाला अठारह माह

 राहु का संचार सितंबर माह में पुनः वृषभ राशि से होगा और मंगल, गुरु , शनि का संवाद सूर्य के साथ एक बार फिर से देश के आतंरिक अस्थिरता का संकेत दे रहे हैं| हिंसक घटनाओं में तेजी होगी| धर्म और संप्रदाय के नाम पर हिंसा आगामी अठारह महीनों में चिंता का विषय है|

@बी कृष्णा