शनि की साढ़े साती, ढैय्या और पंचम शनि

Shani Vakri Grahas May 11 Capricorn Aquarius Sagittarius Gemini ...

                           

बहुत सारे व्यक्ति यह सोच कर भयाक्रांत होते हैं कि शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या या पंचम शनि शुरू होने वाली है| वे परेशान होकर, इसके अनिष्टकारी  प्रभाव से कैसे बचा जाये, यह जानना चाहते हैं| आइए यहाँ ज्योतिष के नजरिये से यह देखने की कोशिश करें कि शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या और पंचम शनि कितना घातक है या कितना सुखप्रद है|

क्या है शनि की साढ़ेसाती ?

 सामान्यतया ऐसा बता दिया जाता है कि जन्मकालीन चन्द्रमा से एक राशि पहले जब शनि का संचरण शुरू होता है तो साढ़े साती की शुरुआत होती है| जन्मकालीन चन्द्रमा से एक राशि आगे तक शनि के संचरण तक शनि की साढ़े साती मानी जाती है| लेकिन इसमें थोड़ा सुधार किये जाने की आवश्यकता है|और वह यह कि जन्म कालीन चन्द्रमा से 45 डिग्री आगे या पीछे जब गोचरीय शनि का संचार होता है तब  व्यक्ति की साढ़े साती चल रही होती है|

साढ़े साती, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, साढ़े सात वर्षों की होती है|

क्या है शनि की ढैय्या?

जन्मकालीन चंद्र से चतुर्थ या अष्टम भाव में गोचरीय शनि का संचरण होता है तो व्यक्ति की शनि की ढैय्या चल रही है ऐसा कहा जाता है|

ढैय्या, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, ढाई वर्षों की होती है|

क्या है पंचम शनि?

देश के कुछ प्रांतों में जन्म कुंडली के पंचम भाव में शनि के गोचर को अशुभ फल देने वाला माना जाता है|

इन सभी को एक उदहारण के द्वारा विस्तार से समझें

शनि का संचार अभी मकर राशि से हो रहा है|

इस संचार की वजह से धनु, मकर और कुम्भ राशि वाले व्यक्तियों की साढ़े साती चल रही है|

मिथुन और तुला राशि वालों की ढैय्या चल रही है|

कन्या राशि वालों की पंचम शनि चल रही है|

इसका सामान्य सा अर्थ यह हुआ कि सम्पूर्ण विश्व में धनु, मकर, कुम्भ, मिथुन, तुला और कन्या राशि के व्यक्ति अभी शनि के प्रभाव में हैं|

साढ़े साती का प्रभाव : शुभ या अशुभ 

इसके प्रभाव की शुभता या अशुभता को जानने के लिए कुंडली को सम्पूर्णता और समग्रता में विश्लेषित किया जाना चाहिए| जैसा कि मैंने पहले भी कई बार कहा है कि ज्योतिष कभी भी किसी वास्तु को एकांगी होकर देखे जाने की सलाह नहीं देता| हमारी  जिंदगी एक बिंदु पर टिकी हुई नहीं होती है| कई वस्तुएँ मिलकर इसका समायोजन करती हैं| इसलिए हर एक पक्ष को देखे जाने की जरूरत है|

मकर राशि में शनि के गोचर के समय, शनि तीन नक्षत्रों से होकर गुजरेगा; उत्तर आषाढ़, श्रवण और धनिष्ठा|

उत्तर आषाढ़ सूर्य का नक्षत्र है| श्रवण चंद्र का नक्षत्र है और धनिष्ठा मंगल का नक्षत्र है|

मकर राशि में उत्तर आषाढ़ नक्षत्र के तीन चरण, श्रवण नक्षत्र के चार चरण और धनिष्ठा नक्षत्र के दो चरण से शनि का संचार होगा|

उत्तर आषाढ़ नक्षत्र से शनि का जब संचरण होगा तो यह सूर्य के नक्षत्र से गुजरेगा| तो हमें जन्म कुंडली में सूर्य और शनि के आपसी संबंधों की जांच करनी चाहिए कि ये दोनों एक दूसरे से किस भाव में अवस्थित हैं|

अगर इनकी स्थिति आपस में एक दूसरे से शुभ भावों में  है और शुभ ग्रहों का प्रभाव भी है तो इनका व्यक्ति के जीवन में शुभ प्रभाव होगा| इसके विपरीत होने से प्रतिकूल प्रभाव होगा|

ठीक इसी प्रकार से चंद्र के नक्षत्र और मंगल के नक्षत्रों से गोचर के समय इन दोनों ग्रहों की शनि के साथ का सम्बन्ध जन्मकालीन कुंडली में देखा जाना चाहिए और तत्पश्चात शुभ, अशुभ फलादेश करनी चाहिए|

चंद्र के साथ शनि के संबंधों का आकलन सूक्ष्मता से किया जाना चाहिए| नवग्रहों में चंद्र सबसे तेज गति  चलने वाला ग्रह है और शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है| इसकी वजह से थोड़ी कशमकश की स्थिति व्याप्त हो जाने की संभावना रहती है| अवसाद की मनःस्थिति हो सकती है| रामचरितमानस में मंथरा और कैकेयी के माध्यम  से साढ़े साती को बहुत ही अच्छे से समझाया गया है|

ढैय्या का प्रभाव : शुभ या अशुभ

साढ़ेसाती के प्रभाव का आकलन जिस प्रकार हमने किया ठीक उसी प्रकार से यहाँ भी आकलन करेंगे| साथ ही साथ मिथुन राशि वाले व्यक्तियों की ढैया के प्रभाव को सम्पूर्णता में आकलन करने हेतु मिथुन राशि के स्वामी बुध का शनि के साथ जन्म कालीन कुंडली में कैसा सम्बन्ध है इसे भी देखेंगे और तुला राशि के लिए शुक्र और शनि के आपसी संबंधों को जन्म कुंडली में देखेंगे|

इसी प्रकार पंचम शनि का भी विश्लेषण करेंगे|

इस प्रकार से हर एक व्यक्ति जो शनि की साढ़े साती, शनि की ढैय्या और पंचम शनि के प्रभाव में हैं अपनी अपनी कुंडली और गोचरीय शनि के आकलन से अनुकूल प्रभाव या प्रतिकूल प्रभाव को जान सकते हैं| इसी प्रकार से हर एक का  सूक्ष्मता से विश्लेषण कर के हम यह जान सकते हैं कि जिसको हम अनिष्ट लेकर आने वाला मान रहे हैं, मुसीबत को लेकर आने वाला मान रहे हैं, वास्तव में तो यह तरक्की, सुख, ख़ुशी को लेकर आने वाला है| इस प्रकार से आकलन करके प्रत्येक व्यक्ति यह जान सकते हैं शनि की साढ़े साती, शनि की ढैय्या या पंचम शनि उनके लिए कितना घातक होगा या कितना सुखद होगा|

अंत में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि हर समय बारह राशियों में से छः राशि साढ़े साती, ढैय्या या पंचम शनि के प्रभाव में रहेगी ही रहेगी| तो इसका अर्थ यह हुआ कि विश्व की आधी आबादी इस प्रभाव में हर वक़्त रहेगी| और जिस प्रकार से कुछ तथाकथित ज्योतिषी इनको लेकर लोगों को डराते हैं तो विश्व की आधी आबादी तो तबाह हो जाएगी| कोरोना संक्रमण के इस समय में जहाँ सम्पूर्ण विश्व एक उम्मीद की किरण का बाट जोह रहा है वहां इस तरह के विचार परोसकर भ्रम और भय की स्थिति बनाना कहाँ तक उचित है? इसीलिए हम सब ज्योतिष को स्वयं जानें|

एक छोटी सी सफर पर हमलोग निकलते हैं तो अपनी अपनी गाड़ी में GPS का इस्तेमाल करते हैं| GPS का इस्तेमाल इसीलिए करते हैं न कि मार्ग सुगम हो जाए| तो फिर जीवन की यात्रा में मार्ग की सुगमता के लिए हम GPS का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? ज्योतिष का इस्तेमाल क्यों नहीं करते?

हम सब ज्योतिष { जीवन का GPS}  को अपनाएं और ग्रहों के अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव की स्वयं विवेचना करें| इतना अमोल जीवन ईश्वर ने हमें प्रदान किया है इसको चलाने का जिम्मा हम भ्रम और भटकावकारी तत्वों के हाथ में क्यों दें?

इसीलिए जीवन के GPS को धारण करें, परिवर्तित हों, रूपांतरित हों, आनंदित हों|

@ बी. कृष्णा