उन्नत भारत| आत्मनिर्भर भारत|

  

PM Modi lays down 'Aatma Nirbhar Bharat' as India's plan to battle ...

                                                   

भारत एक कृषि प्रधान देश है| यहाँ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है| खेती को लेकर भारतीय परंपरा सबसे उन्नत परंपरा रही है| हमारे पुरखे जिस प्रकार की खेती करते थे वहां वे सिर्फ मानव कल्याण की ही बातें नहीं सोचते थे वरन पशुओं और कीटों का भी ध्यान रखते थे|कीटनाशक भी वैसी बनाते थे जहाँ कीटों का नाश नहीं होता था, सिर्फ फसलों की सुरक्षा हो जाती थी| आज के इस संवाद में हम जानेंगे कि कृषि को उन्नत और बेहतर बनाने में ज्योतिष की क्या भूमिका है| ज्योतिष व्यवहारशास्त्र और लोकशास्त्र है| ग्रहों और नक्षत्रों के संचरण के अनुसार किस प्रकार और कैसी खेती की जाये इसकी विस्तृत चर्चा ज्योतिष के मनीषियों ने की है| आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य के गोचर से दक्षिण पश्चिम मानसून की शुरुआत होती है| इस नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश को बीजारोपण के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है| इस नक्षत्र में बीजारोपण करने से बीज सड़ जाते हैं| मृगशिरा नक्षत्र में बीजारोपण  करना शुभ माना जाता है| इस नक्षत्र में डाले गए बीजों में भरपूर वृद्धि होती है| 

” हथिया में हाथ गोड़, चित्रा में फूल| चढ़े सवाती झप्पा झूल “

हथिया में पौधे अंकुरित होंगे, चित्रा में इसमें खूब फूल आएंगे और स्वाति नक्षत्र में खूब बढ़ेंगे|

बाबूजी हमें हर नक्षत्रों, राशियों और ग्रहों पर आधारित पेड़ों और पौधों का नाम बताते थे| गांव में होने वाले कृषि कार्यों के लिए वो इन सभी बातों का समावेश करते थे|

सत्ताईस( 27) नक्षत्रो के लिए निर्धारित पेड़ पौधे

अश्विनी – कोचिला,भरनी – आंवला, कृतका – गुल्लड़, रोहिणी – जामुन, मृगशिरा – खैरआद्रा – शीशम पुनर्वसु – बांसपुष्य – पीपलअश्लेषा – नागकेसरमघा – बट, पूर्वा फाल्गुन – पलास, उत्तरा फाल्गुन – पाकड़, हस्त – रीठा, चित्रा – बेल, स्वाती- अजरुन, विशाखा – कटैया, अनुराधा – भालसरी, ज्योष्ठा – चीर, मूला – शाल, पूर्वाषाढ़ – अशोक, उत्तराषाढ़ – कटहल, श्रवण – अकौन, धनिष्ठा – शमी,शतभिषा – कदम्ब, पूर्व भाद्र – आम,उत्तरभाद्र – नीम, रेवती – महुआ

बारह(12) राशियों  के लिए निर्धारित पेड़ पौधे

मेष – आंवला, वृष – जामुन, मिथुन – शीशम, कर्क – नागकेश्वर, सिंह – पलास, कन्या – रिट्ठा, तुला – अजरुन, वृश्चिक – भालसरी, धनु – जलवेतस, मकर – अकोन, कुंभ – कदम्ब मीन – नीम

नौं (9) ग्रह के लिए निर्धारित पेड़पौधे

सूर्य – अकवन ( अकौंन), चन्द्रमा – पलास, मंगल – खैर, बुद्ध – चिरचिरी ,गुरु – पीपल, शुक्र – गुलड़,

शनि – शमी,राहु – दुर्वा ,केतु – कुश

मौसम, प्रकृति और मनुष्य के बीच की समझ है ज्योतिष| ग्रह, नक्षत्र, ऋतु, स्थान, काल और वस्तु के अनुसार कृषि कार्य का निर्धारण अगर किया जाये तो किसानों के लिए तो शुभ होगा ही देश के अर्थ के लिए भी बेहतर होगा|  

प्रख्यात ज्योतिर्विद वराहमिहिर ने तो इस पर बहुत काम किया है, घाघ, भड्डरी, बाण आदि का अध्ययन भी कृषि क्षेत्र में ज्योतिष के योगदान को लेकर बहुत ही सराहनीय है|

घाघ और भड्डरी की खेती और वर्षा से सम्बंधित कुछ बातें

आदि बरसे आर्द्रा, हस्त बरसे निदान

कहे घाघ सुनु घाघिनि, भये किसान पिसान|

आर्द्रा नक्षत्र के आरम्भ में और हस्त नक्षत्र के अंत में यदि वर्षा न हुई तो ऐसी दशा में किसान बर्बाद हो जाता है|

आषाढ़ी पुणो दिना, गाज, बीज, बरसंत

नासै लक्षण काल का, आनंद माने संत|

आषाढ़ माह की पूर्णिमा को यदि बादल गरजे और बिजली चमके तो वर्षा अधिक होगी और अकाल समाप्त हो जाएगा|

जब बरखा चित्रा में होये, सगरी खेती जावै खोय |

चित्रा नक्षत्र में यदि वर्षा होती है तो सम्पूर्ण खेती नष्ट हो जाती है|

रोहिणी बरसे मृग तपे, कुछ दिन आर्द्रा जाये |

कहे घाघ सुनु घाघिनि, स्वान भट नहीं खाय |

यदि रोहिणी नक्षत्र में बारिश हो, मृगशिरा तपे और आर्द्रा के भी कुछ दिन बीत जाने पर बारिश हो तो पैदावार इतनी अच्छी होगी कि कुत्ते भी भट खाते खाते थक जायेंगे|

अखै तीज रोहिणी होइ, पौष अमावस मूल जोई

राखी श्रवणों हीं विचारों, कातिक पुणो कृतिका टारो|

वैशाख अक्षय तृतीया को यदि रोहिणी नक्षत्र न पड़े, पौष की अमावस्या को यदि मूल नक्षत्र न पड़े, सावन की पूर्णिमा को यदि श्रवण नक्षत्र न पड़े और कार्तिक की पूर्णिमा को कृतिका नक्षत्र न पड़े तो धान की  फसल नष्ट होती है|

सूर्य का वृश्चिक राशि और वृषभ राशि में प्रवेश से यह जाना जाता है कि ग्रीष्म ऋतु की फसल और शरद ऋतु की फसल कैसी होगी|

वर्ष 2020 में सूर्य के इन राशियों में प्रवेश और फसल को देखें तो दोनों फसलों को लेकर यह संकेत मिलता है कि शुरुआती अच्छी बढ़ोतरी के बाद भी फसल के नुकसान होने की सम्भावना ज्यादा है| देश के कुछ प्रांतों में बम्पर पैदावार होगी परन्तु अधिकांश भागों में स्थिति असंतोषजनक ही रहने का संकेत है| परिणाम खाद्यान्न की कमी होगी अर्थात महंगाई बढ़ेगी|

1 – कृषि हेतु भूमि की खरीद

सोमवार,बुधवार और शनिवार बढ़िया दिन माने जाते हैं|

शुक्लपक्ष हो और मंगल कुंडली के चतुर्थ भाव में हो|

रिक्ता तिथि न हो|

विष्टि करण न हो|

अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, श्रवण, शतभिषा, और उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, कृषि हेतु भूमि की खरीद के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं|

अगर किसी कारणवश शुभ समय में जमीन का अधिकार लेने हेतु उपस्थित न हो पाएं तो फिर जब कर्क लग्न का उदय हो रहा हो और चन्द्रमा भरणी या आर्द्र में हो तब जाकर उस जमीन के एक मुट्ठी मिट्टी लेकर आ जाएं|

2 – जमीन की जोताई

खेत में जोताई का काम शुरू करने के लिए सोमवार, सिंह लग्न या वैसी राशि के लग्न के उदय हो जिसमे सूर्य स्थित हो या सूर्य जिस नक्षत्र में स्थित हो, सर्वोत्तम होता है|

नक्षत्रों में रोहिणी, पुनर्वसु, पुष्य, तीनों उत्तरा नक्षत्र, हस्त, अनुराधा, मूल , जोताई कार्य के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं|

चतुर्थी, षष्ठी,अष्टमी, नवमी, द्वादशी और अमावस्या को छोड़कर बाकी दिन शुभ होते हैं|

सिंह राशि के अलावा वृषभ, मिथुन, कर्क, मकर और मीन लग्न के उदय में भी जोताई कार्य को शुरू करना श्रेयस्कर होता है|

वृश्चिक और मीन लग्न को इस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है|

अगर मेष लग्न का उदय हो रहा है तो यह पशु धन के लिए मारक होता  है|

इस कार्य के लिए भी शुक्लपक्ष को बेहतर माना गया है|

खेत की जोताई जिस दिन से शुरू की जाए उस दिन सबसे पहले पूरब से उत्तर की तरफ जोताई शुरू करें|

3 – बीजारोपण और पौधों को लगाना

शुक्लपक्ष हो, चंद्र किसी भी अशुभ प्रभाव से मुक्त हो और हस्त, चित्रा, स्वाति, मघा, पुष्य, अभिजीत, अनुराधा और मूल नक्षत्र हो|

गाजर, मूली, चुकंदर तब लगाए जाएँ जब चंद्र धनु राशि में हो|

जमीन के भीतर उगने वाले कंद और सब्जियां तब लगाई जाएं जब कर्क, वृश्चिक और मकर लग्न उदय हो रहा हो|

गुरुवार हो और धनु या मीन लग्न उदित हो रहा हो तब फूल वाले पौधों को लगाना चाहिए|

वैसी अनाज जो काले रंग के होते हैं, उन्हें मकर और कुंम्भ लग्न के उदित होने समय लगाना चाहिए|

शुक्लपक्ष हो और कर्क,वृश्चिक और मीन राशि उदित हो रहा हो तब टमाटर के पौधे लगाने चाहियें|

मेष लग्नोदय में लहसुन की रोपाई करनी चाहिए|

वृषभ लग्नोदय में आलू, मूली, गाजर, बेर, प्याज आदि लगाना लाभकारी होता है|

मिथुन लाग्निदाय में किसी प्रकार की बोआई नहीं करनी चाहिए|

कर्क लग्नोदय में गोभी, बीन्स, तरबूज, खरबूज और दालों की फसल की बोआई लाभकारी होता है|

सिंह लग्नोदय किसी भी बोआई के लिए शुभ नहीं माना गया है| खेत के जोताई के लिए तो इसे श्रेयस्कर माना गया है परन्तु बोआई के लिए हितकर नहीं माना गया है|

वैसे वृक्ष जिनसे हमें फलों की प्राप्ति होती है उन्हें कन्या लग्नोदय में लगाना श्रेयस्कर होता है|

तुला लग्नोदय में गेहूं, रागी, जौ, राइ,धान आदि फसलों की बोआई हितकर होती है|

वृश्चिक लग्नोदय  में प्याज़ और लहसुन की बोआई करनी चाहिए|

धनु लग्नोदय में काली मिर्च और लहसुन की बोआई की जनि चाहिए|

मकर लग्नोदय में आलू, गाजर और मूली|

कुम्भ लग्नोदय में सभी प्रकार के काले अनाज की बोआई की जनि चाहिए|

मीन लग्नोदय में खीरा, कद्दू, मूली, गाजर, तरबूज और खरबूज|

नवमी तिथि को छोड़कर सभी तिथि बेहतर हैं और द्वितीय और चतुर्थी तिथि को छोड़कर सभी सैम तिथियां बेहतर हैं|

गन्ने की अच्छी फसल के लिए पुनर्वसु नक्षत्र बेहतर है|

शीशम के लिए अनुराधा नक्षत्र बेहतर है|

धान की अच्छी फसल के लिए रविवार का दिन हितकर होता है|

4 – पेड़ों की कटाई एवं  छटाई

कुंडली में शनि की स्थिति छठे, आठवें भाव में हो, लग्न में शुभ ग्रह हो, और लग्नेश बलि हो तब पर्दों की कटाई और छटाई शुरू करनी चाहिए| मंगलवार को इस कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए और रिक्ता तिथि के समय भी इस कार्य की शुरुआत नहीं की जानी चाहिए|

चंद्र की स्थिति मजबूत होनी चाहिए| चंद्र को राहु केतु के साथ से मुक्त होना चाहिए|

पेड़ों की कटाई तब शुरू करनी चाहिए जब अग्नितत्व राशि लग्न में हो|और लग्न में शनि, मंगल की उपस्थिति  हो|

5 – अनाज इकठ्ठा करना

इसकी शुरुआत भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्र, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, तीनों उत्तरा, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल और रेवती नक्षत्रों में करनी चाहिए|

चतुर्थ भाव में शनि हो| चतुर्थी, अष्टमी, षष्ठी, नवमी, द्वादशी और चतुर्दशी तिथि को इसकी शुरुआत नहीं करनी चाहिए|

चंद्र, गुरु, शनि शुभ नवांश में हों|

सोमवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार शुभ दिन हैं|

कुछ पश्चिमी विद्वानों ने भी ज्योतिष की महत्ता बताई है कृषि के लिए|

आइये उन्हें देखें कि उन्होंने क्या कहा है-

CATO – इनके अनुसार, अंजीर,जैतून,मटर, लताएं जब कृष्णपक्ष और दोपहर में जब दक्षिण कि तरफ से हवा न चल रही हो ,लगाएं जाते हैं तब इनकी अच्छी पैदावार होती है|

इमारती लकड़ी वाले पेड़ को तब काटा जाना चाहिए जब चंद्र और सूर्य एक साथ हों, तब उस पेड़ से मजबूत  लकड़ी की प्राप्ति होती है|

PLUTARCH -शुक्ल पक्ष में प्याज के पौधों में अच्छी वृद्धि होती है और कृष्ण पक्ष में ये सूखने लगते हैं|

CAMILLE FLAMARION – खीरा,मूली,गाजर, लिली, केसर आदि में  पूर्णिमा के दिन अच्छी बढ़ोतरी देखी जाती है| शुक्लपक्ष के दौरान इकट्ठे  किये गए जड़ी बूटियों से तैयार की गयी औषधियां ज्यादा लाभकारी होती हैं|

इस प्रकार हमने देखा कि ज्योतिष कैसे लोकशास्त्र और व्यवहारशास्त्र भी है| इसका आश्रय लेकर हम कृषि के क्षेत्र में भी प्रगतिशील और उन्नत होकर उभरेंगे इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है|

इस प्रकार से जब हर एक बिंदु का समायोजन किया जायेगा तब भारत होगा आत्मनिर्भर भारत|

 @B. Krishna