Depression(अवसाद)-कारण और निदान

Depression - Anxiety, Trauma & PTSD Specialist Therapy

एक हल्की सी लहर ..और सबकुछ समाप्त..

क्यों ? आखिर क्यों ??

क्यों हम पहले तनाव ग्रस्त होते हैं फिर मानसिक अवसाद में जाते हैं और अंततः आत्महत्या को अपना संगी बनाकर चल पड़ते हैं ..

और कोई संगी क्यों नहीं बनता ??

कारण क्या ??

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भौतिक रूप से इतने विकसित होकर भी, क्या वजह है कि हम मानसिक स्वास्थ्य की धरातल पर फिसलते ही जा रहे हैं?? क्या वजह है कि अपराध के आंकड़े और आत्महत्या के आंकड़ों में लगातार वृद्धि हो रही है?? एक राष्ट्र ही नहीं वरन सम्पूर्ण विश्व उन्माद की स्थिति में जा रहा है?? कहाँ चूक रहे हैं हम ?

इसी तरह के तमाम प्रश्नों के जवाब हमें तब तक नहीं मिलेंगे जब तक हम संपूर्णता और समग्रता में चीजों को नहीं देखेंगे….

एक आयामी दृष्टिकोण इसी तरह से आत्महत्या दर आत्महत्या करवाता रहेगा|

देश, काल और पात्र तीनों के बारे में जानना होगा|

 एक व्यक्ति डॉक्टर के पास तभी जाता है या ले जाया जाता है जब उनमें  मनोरोग के लक्षण प्रकट होने लगते हैं| तब उनका उपचार शुरू किया जाता है| लेकिन वास्तव में तब तक यह रुग्णता उसके भीतर अपनी जड़ें जमा चुकी होती हैं| तब इसका उपचार जटिल हो जाता है|

ज्योतिष एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा इस व्याधि को समूल नाश किया जा सकता है| यह एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा समय से पूर्व ही हम अपनी कुंडली के द्वारा अपने जीवन में घटने वाली घटनाओं के बारे में जान पाते हैं| चूँकि हम पहले से इसे जान रहे होते हैं इसलिए इसका उपचार हम तब से प्रारम्भ कर लेते हैं जब इसका बीजारोपण ही हमारे भीतर होता है|

कुंडली देखते हुए मनोरोग को समझने के लिए हमें किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए –

1मन का कारक चन्द्रमा है इसलिए सबसे पहले कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति को देखें| यह अगर शुभ प्रभाव में है तब तो ठीक है लेकिन अगर यह अशुभ प्रभाव में है तो आप मनोरोग के शिकार हो सकते हैं| आपके मन के अनुसार बातें नहीं होंगी तो आप अवसाद में जा सकते हैं|

2बुद्धि का कारक है बुध इसलिए चन्द्रमा के बाद आप अपना ध्यान कुंडली में बुध ग्रह की ओर लेकर जाएँ| यह बड़ा ही नटखट किस्म का ग्रह है| आपकी हल्की सी बेपरवाही इस ग्रह को अपना खेल, खेल लेने में मददगार हो जाता है| चन्द्रमा की तरह ही इसके भी शुभ, अशुभ बल को जानिए| अगर यह अशुभ प्रभाव में होगा तो आपकी बुद्धि भ्रमित होगी और आप सही  समय पर सही निर्णय नहीं ले सकेंगे|

3कुंडली में पंचम भाव( 5th house) और उसके स्वामी की क्या स्थिति है इसको देखिए| अगर यह अशुभ प्रभाव में है तो आप विचारों के जंगल में भटकते रह जायेंगे| वहां से कैसे निकलकर बाहर आना है इसे समझ पाना आपके लिए औरों की तुलना में  थोड़ा मुश्किल हो जायेगा|

4 – इन सभी की स्थिति का आकलन करने के बाद आप यह देखिए कि आपकी कुंडली में तीसरे भाव / भावाधिपति का सम्बन्ध किन भावों के साथ है| अगर छठे भाव के साथ है तो आप मनोरोग के शिकार तो होंगे ही, आत्महत्या का प्रयास भी करेंगे| इसके साथ यदि अष्टम भाव भी जुड़ गया तो यह प्रयास आपके लिए घातक हो सकता है|

अब सवाल यह उठता है कि जितने भी व्यक्ति की कुंडली में ऐसा योग निर्मित होगा क्या वे सभी मनोरोगी होंगे, डिप्रेशन में जायेंगे या आत्महत्या करेंगे ??

इसका जवाब है कि हमें इनके साथ दशा को देखना होगा| इन योगों के निर्मित होने के बावजूद दशा अगर सम्बंधित भावों की नहीं आएगी तो इसका असर नहीं होगा|

अपनी अपनी कुंडली को जानिए| इसको जब आप जान लेंगे तो जीवन के किस भाग में जाकर इस प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं यह आप भली भांति जान पाएंगे और समय रहते स्वयं में छोटे छोटे परिवर्तनों के द्वारा इस रोग पर विजय प्राप्त करके ऊर्जा से भरपूर नए जीवन की शुरुआत करेंगे| इन सभी के द्वारा आप अपने लक्ष्य तक पहुँचाने वाली मार्ग के बारे में जान सकेंगे|

एक बात याद रखिए कि ईश्वर ने आपके जैसा सिर्फ आपको ही बनाया है| कोई दूसरी प्रति नहीं बनाई है| आप अद्वितीय और अप्रतिम हैं| यह मत सोचिये कि आपके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है| अर्जुन जैसा वीर, लक्ष्य भेदन में माहिर धनुर्धर भी जब एक परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति में जाते हैं तो घोर अवसाद से ग्रसित होते हैं | तब भगवान कृष्ण उनका उपचार करते हैं बगैर किसी दवाई के| इसको आप सब भी जानते  हैं| अर्जुन अवसाद से बाहर आते हैं| पुनः नव ऊर्जा का संचार होता है | युद्ध करते हैं और  युद्ध में विजय प्राप्त करते हैं|

यह लड़ाई आपकी खुद की है| आपको स्वयं ही लड़ना है| हर मोर्चे पर आपको खुद ही डट कर मुकाबला करना है|

इसलिए निराश मत होइए|

आप ये करें  –

  • ईश्वर में श्रद्धा रखिए|
  • निर्भीक होइए|
  • संबंधों पर भरोसा कीजिए|
  • आभासी दुनिया से बाहर आइए|
  • वास्तविकता का सामना कीजिए|
  • रिश्तों को इंद्रधनुषी बनाइए|
  • मुस्कुराइए|
  • नियमित योग और ध्यान कीजिए|
  • आहार और विचार में परिवर्तन लाइए|
  • जीवन शैली बदलिए|
  • भगवन्नाम का सहारा लीजिए|
  • ‘मृत्योर्मुक्षीयमामृतात’ इसका हर वक़्त ध्यान कीजिए|
  • उठिए और हर प्रतिकूल परिस्थितियों को अपने पुरुषार्थ द्वारा अनुकूल बनाइए|
  • विजयी होइए| |

अंत में एक बात याद रखिए-

” नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने |

विक्रमार्जितसत्वस्य स्वयमेव मृगेन्द्रता ||

शेर को किसी संस्कार के द्वारा जंगल का राजा नियुक्त नहीं किया जाता बल्कि वह अपने बल पर राजपद हासिल करता है|

चलते चलते, समाज के लोगों से भी एक प्रार्थना कि  हम अपने आसपास मानसिक तनाव से गुजर रहे लोगों को पहचानें और उनके साथ संवेदनशीलता दिखाएं|

आत्महत्या को वे अपना संगी बनाकर चल दें, इससे पहले हम उनके संगी बनें|  ईर्ष्या और द्वेषमुक्त होकर, हम  उनके साथ चलें| कोई अनर्थ हो जाये इससे पहले ही उन्हें रोक लें|

@ बी. कृष्णा