शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसे बढ़ाएँ

What is herd immunity and how can it affect Coronavirus spread ...

                            

जब बात कोविड-19 की हो और इससे जुड़कर भारी भरकम शब्द , एसिम्पटोमेटिक, प्रीसिम्पटोमेटिक, सोशल डिस्टेंसिंग, आइसोलेशन, आदि हम तक पहुँचते हैं तो ऐसे में हमें याद आयी भगवान धन्वंतरि की | भगवान धन्वन्तरि आयुर्वेद जगत के प्रणेता तथा वैद्यक शास्त्र के देवता माने जाते हैं। वे महान चिकित्सक थे जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं।

इनको पढ़ते हुए आप यह सोच रहे होंगे की ज्योतिष और औषधिओं का क्या सम्बन्ध है| आप सभी का सोचना वाजिब है क्योंकि आप में से ज्यादातर लोग, ज्योतिष से तात्पर्य सिर्फ राशि फल कथन, ग्रह शांति और उपाय से लेते हैं| जबकि वास्तव में ज्योतिष व्यापक विस्तार वाली विधा है| ज्योतिषशास्त्र में चिकित्सकीय ज्योतिष ( मेडिकल एस्ट्रोलॉजी) के अंतर्गत  इन सभी बातों की  विस्तृत चर्चा की जाती है | व्याधि, रोग, कारण और निदान इनकी ज्योतिषीय चर्चा की जाती है|

आज हम सब जानेंगे कि धन्वंतरि ने कौन कौन सी ऐसी औषधियां बतलाई हैं जो कि सभी रोगों का नाश कर आयु बढ़ानेवाली है |धन्वंतरि ने इन्हे मृत्युंजय योग कहा है | योग सिर्फ ग्रहों और नक्षत्रों का ही नहीं होता वरन अन्य पदार्थों का भी होता है |

यहाँ जिन पदार्थों का जिक्र किया गया है वे सभी पदार्थ कमोवेश प्रायः प्रत्येक घरों में उपलब्ध होते हैं|

इनके लिए ज्यादा पैसे खर्चने की भी आवश्यकता नहीं है| गाय का दूध, शहद, गिलोय, त्रिफला, आंवला, शतावर,तिल ,बेल आदि पदार्थ सहजता से शहर तो शहर, गांव घर में भी उपलब्ध हैं|

 इस समय इस तरह की जानकारी लोगों तक पहुंचाए जाने की आवश्यकता है |

अपने अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएँ, यह जानने की जरूरत है क्योंकि तभी हम रोगों को जड़ से समाप्त कर  सकते  हैं और दीर्घायु हो सकते हैं|

तो आइए जानें  :-

1 – शहद, घी और त्रिफला को अपने आहार का हिस्सा बनाएं|

2 – 10 ग्राम  की मात्रा में त्रिफला का सेवन भी रोगों को नष्ट कर आयु प्रदान करनेवाला होता है |

3 – इस माह में बेल सहज ही उपलब्ध होता है| इसका एक माह तक लगातार सेवन से आयु की वृद्धि होती है और शक्ति उपलब्ध होती है |

4 – तिल का सेवन रोग और अस्वाभाविक मृत्यु, अप्राकृतिक मृत्यु  को दूर करता है |

5 – खांडयुक्त दूध पीने से सौ वर्ष की आयु प्राप्त होती है |

6 – प्रतिदिन प्रातःकाल मधु, घी और सोंठ का 40 ग्राम  की मात्रा में सेवन करनेवाला मनुष्य मृत्यु विजयी होता है |

7 – शहद के साथ भूमि आंवला (इसे भुंई आंवला भी कहते हैं, अनेक प्रकार की व्याधिओं को दूर करने वाला होता है| शरीर में खून की कमी को दूर करता है और रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है|) को 10 ग्राम  की मात्रा में खाकर दूध पीने वाला मनुष्य मृत्यु पर विजय प्राप्त करता है |

8 – छह मास तक प्रतिदिन 10 ग्राम  पलाश के तेल का शहद के साथ सेवन  करके दूध पी लेने से लम्बी आयु की प्राप्ति होती है |

9 – शहद के साथ घी और 40 ग्राम भर शतावरी चूर्ण का सेवन करने से आयु में वृद्धि होती है |

10  – लौह भस्म तथा शतावरी को भृंगराज के रस में मिलाकर मधु एवं घी के साथ लेने से रोग का नाश होता है और आयु में वृद्धि होती है |

11 – ताम्र भस्म, गिलोय, शुद्ध गंधक, सामान भाग में घीकुँवार( यह एलोवेरा और ग्वारपाठे के नाम से भी जाना जाता है|) के रस में घोटकर ½ ग्राम  की गोली बनाएं |इसका घी के साथ सेवन करने से मनुष्यों में रोग का नाश होता है और आयु वृद्धि होती है |

12 – गदहपूर्णा का चूर्ण 48 ग्राम शहद, घी और दूध के साथ खाने वाला व्यक्ति भी रोग मुक्त होकर सौ वर्षों तक जीवित रहता है |

13 – अशोक की छाल का चूर्ण, शहद और घी के साथ खाकर दूध पीने से रोगनाश होता है |

14 – नीम के तेल का मधु सहित नस्य लेने से मनुष्य रोगमुक्त होकर सौ वर्षों तक जीता है |

15 – बहेड़े के चूर्ण को 10 ग्राम   मात्रा में शहद शहद, घी और दूध से पीनेवाला रोगमुक्त होकर शतायु होता है |

16 – एक मास तक सफेद पेठे के 48 ग्राम को मधु, घी के साथ सेवन करते हुए दूध पी लेने वाला, निरोग रहकर एक सहस्त्र वर्ष की आयु का उपयोग करता है |

17 – त्रिफला, पीपल और सोंठ -इनका प्रयोग तीन सौ वर्षों की आयु प्रदान करता है |

@ बी कृष्णा

9910400118