सूर्य ग्रहण – विज्ञान, वेद और ज्योतिष की दृष्टि से

सूर्य ग्रहण कैसे होता है । Solar Eclipse in ...

 जैसे जैसे सूर्यग्रहण का समय नजदीक आता जाता है सभी लोग जाने अनजाने भयग्रस्त होने लगते हैं| एक दूसरे से पूछना शुरू कर देते हैं कि कब से कब तक रहेगा यह ग्रहण ?? क्या करें इस अवधि में ?? आदि आदि | आज हम सूर्य ग्रहण को विस्तार से समझेंगे| इसको समझने के लिए हमलोग विज्ञान के साथ साथ वेद, रामचरितमानस, गीता , इतिहास और ज्योतिषशास्त्र के पास चलेंगे और उनसे जानेंगे कि वे क्या कहते हैं सूर्यग्रहण के बारे में|

सूर्यग्रहण पूर्णतः खगोलीय घटना है जो हर वर्ष घटित होता है| पृथ्वी और सूर्य के बीच जब चन्द्रमा आ जाता है और इसकी वजह से पृथ्वी के एक हिस्से पर चन्द्रमा की छाया पड़ती है| इस दौरान ये तीनों एक सीध में आ जाते हैं | पूर्ण सूर्यग्रहण में  सूर्य, चन्द्रमा के पीछे पूरी तरह से छुप जाता है|

इस दिन गर्भवती महिलाओं को विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है| ऐसी सलाह क्यों दी जाती है इसे भी हमलोग जानेंगे|

शुरुआत करते हैं ऋग्वेद से|

1ऋग्वेद में ऋषि अत्रि ने स्वरभानु ( चन्द्रमा ) नामक असुर द्वारा सूर्य को अपनी गिरफ्त में लेने की बात कही है| इसकी वजह से पृथ्वी पर गहन अंधकार छा जाता है| इस अंधकार में और रात्रि के समय व्याप्त होने वाले अंधकार में बहुत अंतर होता है| इस समय के अंधकार की वजह से पशु पक्षी भयभीत होकर अस्वाभाविक व्यवहार करने लगते हैं|

2 -इसके बाद वे कहते हैं किस्वरभानु का सूर्य को अपनी गिरफ्त में लेने की वजह से वायु ने अपनी दिशा बदल ली| वायु के दिशा परिवर्तन की बात करते हैं| गति परिवर्तन की बात नहीं करते हैं|

3 समुद्र जल के pH मान में परिवर्तन होने लगता है| pH मान में परिवर्तन अर्थात जल के अम्लीयता और क्षारीयता में परिवर्तन की बात करते हैं| हज़ारों वर्ष पूर्व जब संसाधन इतने सीमित थे, तब Ph की बात करना, तप ही है| प्रणाम ऐसे ऋषि को और उनके तप को| समुद्र जल में आये इस परिवर्तन की वजह से समुद्र में रहने वाले जीवों और जंतुओं पर इसका प्रभाव पड़ता है|

4 ग्रहों के आपसी तालमेल में गड़बड़ी की वजह से पेड़ पौधों में आनेवाले फूलों और फलों की संरचना पर असर होता है|

रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण में अरण्य कांड में ग्रहण की चर्चा की गयी है |

उसी प्रकार से भगवत गीता में भी एक ही पक्ष में दो ग्रहण और उनके असर की बात कही गई है| राष्ट्र और राजा पर इसके प्रभाव की चर्चा की गयी है|

इतिहास में चलें तो सूर्यग्रहण के साथ साथ ही युद्ध चलता है| तमाम ऐसे बड़े युद्ध मिलते हैं जिनकी शुरुआत ग्रहण के आस पास हुई है| यहाँ इतिहास में वर्णित एक ग्रहण की चर्चा  बनती है| वह ग्रहण है – 5 मई 840 का पूर्ण सूर्य ग्रहण| इस ग्रहण से यूरोप का राजा इतना परेशान हो जाता है कि कुछ ही समय पश्चात् उसकी मृत्यु हो जाती है| उसकी मृत्यु के बाद उसके पुत्र गद्दी के लिए आपस में युद्ध करते हैं जिसकी परिणति वर्ष 843 में होती है|  यूरोप तीन भागों में बंट जाता है जिसे आजकल हम सब फ्रांस, ज़र्मनी और इटली के नाम से जानते हैं|

यह है ग्रहण का राष्ट्राध्यक्ष और राष्ट्र पर प्रभाव| कब निर्मित होंगे ऐसे हालत और कब मिलेगी इससे मुक्ति यह सब सम्बंधित स्थान, समय, पात्र की दशा, योग, आदि बातों पर निर्भर होता है| इसके लिए हमें ज्योतिषशास्त्र की मदद लेनी होती है|

ज्योतिषशास्त्र के तहत मेदिनी ज्योतिष अध्याय में इसकी चर्चा की गयी है| ज्योतिषशास्त्र में इसके मेदिनी पक्ष को देखे जाने की सलाह दी गयी है|

किस भाव में किस राशि में ग्रहण लग रहा है इसको देखने केसाथ साथ राशिधिपति की क्या स्थिति है, नाक्षरधिपति की क्या स्थिति है, यह भी देखना है|

मूलभूत सिद्धांत को नहीं छोड़ना  है |

उदहारण के लिए

21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में लगेगा और 14 दिसंबर को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि में लगेगा| इन दोनो ग्रहण में बुनियादी फर्क क्या है, इसे समझते हैं| जून माह में लगने वाले ग्रहण की राशि और बनने वाले योगों को अगर भारतवर्ष के सन्दर्भ में देखा जाये तो चीन के साथ तनातनी का माहौल बढ़ेगा| चीन ज्यादा उग्रता दिखाएगा- कारण अपनी आंतरिक और आर्थिक अस्थिरता से ध्यान भटकाना है| हालाँकि आतंरिक अस्थिरता और आर्थिक अस्थिरता से भारत भी जूझ रहा है लेकिन यह अपनी तरफ से उग्रता  दिखाने की पहल नहीं करेगा| विवेकपूर्ण समाधान करना चाहेगा| सीमा पर इसकी हलकी सी असुरक्षा इसको बहुत महंगी पड़ सकती है| चीन की गतिविधिओं पर सिर्फ वहींनज़र नहीं रखनी है जहाँ वह सीधा-सीधा लड़ने के मूड में है वरन अन्य जगहों पर भी गिद्ध दृष्टि बनाये रखने की जरूरत है| छुप कर हमला कर सकता है चीन| सीमा पर भी और देश के भीतर भी आंतरिक गड़बड़ी फैलाने के प्रयास को हवा दे सकता है|

दिसंबर माह में होने वाले पूर्ण सूर्यग्रहण के समय बनने वाले योगों के अनुसार मौसम में अप्रत्याशित परिवर्तन, Cyclone, Hurricane, तेज बारिश, Thunderbolt की स्थिति बनेगी| हालाँकि यह ग्रहण भारतवर्ष में नहीं देखा जाएगा लेकिन आठ ग्रहों का इन्द्र और वरुण नाड़ी में स्थित होना यहाँ भी मौसम के उत्पात की स्थिति तो बना ही रहे हैं| भारत के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से के साथ-साथ कश्मीर, हिमाचल और काँगड़ा घाटी इससे अधिक प्रभावित होंगे|

दक्षिण अमेरिका के चिली, अर्जेंटीना और ब्राज़ील पर इनका ज्यादा प्रभाव देखा जायेगा|

अगहन माह में लगनेवाला यह ग्रहण महिलाओं, राजा, राजकुमार, चिकित्सक, व्यापारी, विषैले हथियारों को प्रयोग करनेवाले योद्धाओं के लिए अहितकर होगा| पेड़ पौधों की क्षति होगी| पशुधन का नाश होगा| कुछ जगहों पर तो खूब बारिश होगी लेकिन कुछ जगहों पर सूखे की स्थिति बनेगी जिसकी वजह से भूखमरी और लूटपाट की स्थिति बनेगी| परिणामतः युद्ध की भूमिका बनेगी|

पित्त का प्रकोप बढ़ेगा और आँखों से सम्बंधित बीमारी बढ़ेगी|

 गर्भवती महिलाएं क्या करें

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर में ही रहे जाने की सलाह दी जाती है| उन्हें कहा जाता है की अगर इस दौरान वे घर से बहार निकलेंगी तो उनका बच्चा खंड तालु अर्थात कटी हुई तालु लेकर पैदा होगा| यह एक विचारणीय प्रश्न है कि सूर्य ग्रहण के दौरान जितने भी बच्चे होंगे क्या वे खंड तालु लेकर ही पैदा होंगे? एक नज़र ज्योतिष में वर्णित षोडश संस्कारों पर भी डालते हैं| गर्भवती महिला के तीसरे महीने में पुंसवन संस्कार किया जाता है| गर्भस्थ शिशु के लिए यह माह बहुत सेंसिटिव होता है| इस समय वैदिक मंत्रोच्चार के साथ साथ आहार परिवर्तन और औषधीय प्रयोग द्वारा गर्भस्थ शिशु का लिंग परवर्तित किया जा सकता है| विज्ञान भी इस बात को मानता है कि तीसरे महीने में गर्भस्थ शिशु का लिंग परिवर्तन किया जा सकता है| चूँकि यह महीना इतना सेंसिटिव होता है इसलिए वैसी महिलाएं जिनका तीसरा महीना चल रहा है गर्भ का वे इस दौरान अपने खाने पीने की शुचिता का ध्यान रखें|

वैयक्तिक रूप से क्या करें

व्यक्ति विशेष तो ग्रहण से राहु केतु का स्मरण करने लगते हैं और इन्हें  सर्प सदृश मानकर उन्हें अपने भीतर खतरे की घंटी बजती सुनाई देने लगती है| सामने सर्प की प्रतीति जानकर बस बचो ! बचो ! भागो ! कोई उपाय करो कि सर्पदंश से बचा जा सके|

आप ग्रहण से नहीं बल्कि सांप सी अपनी विचारों की वजह से बीमार हो जाते हैं या मृत्युपाश में चले जाते हैं|

 यह एक खगोलीय घटना है जो हर वर्ष कम से  कम चार बार और अधिक से अधिक सात बार  घटती ही हैं | इस वर्ष छह ग्रहण लगेंगे| 2011 में भी छह ग्रहण लगे थे |2013, 2018, 2019 में पांच ग्रहण लगा था| 1935 और 1982 में 7 ग्रहण लगा था| हर ग्रहण अपने साथ पंद्रह दिन आगे-पीछे दूसरे ग्रहण कोलेकर आता ही है तो एक बात बताइये कि कितनी बार मरेंगे आप ??

ग्रहण और व्यापार को समझिये| स्वयं जानने का प्रयास कीजिये| तथ्य परक शोध कीजिये और खोज कीजिये|

दान दीजिये|

सूर्य उपासना कीजिये|

आदित्य ह्रदय स्त्रोत्र का पाठ कीजिये , और

भगवतगीता के इस श्लोक का पाठ कीजिये

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्व प्रवर्तते

इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः ||”

स्वस्थ रहिये ! खुश रहिये !! आनंदित रहिये !!!

@ B Krishna