मानसून’2020

India's monsoon rain below average for fifth straight week ...

इस बार सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में  प्रवेश कुछ अलग है| अलग इसलिए कि इस दिन सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करने के कुछ ही घंटे पूर्व ग्रहण में रहेंगे| 21 जून को मृगशिरा नक्षत्र में सूर्य ग्रहण होगा| तत्पश्चात भारतीय समयानुसार, रात्रि के ग्यारह बज के सत्ताईस मिनट और चौवन सेकंड पर आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे|

सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश से मानसून की शुरुआत होती है जो कि सूर्य के स्वाति नक्षत्र में गोचर तक जारी रहता है| दक्षिण-पश्चिम मानसून कैसा होगा इस साल भारतवर्ष के लिए इसके बारे में मैंने अपने पूर्व के आलेखों और वीडियो में कुछ बातें कही हैं| आर्द्रा से स्वाति नक्षत्र तक सूर्य की यात्रा में अन्य ग्रहों,वायु, वारों और तिथियों  द्वारा बनने वाले योग यह निर्धारित करते हैं कि कृषि हेतु भरपूर जल की प्राप्ति होगी, कम बारिश होगी या सूखा होगा| नारद पुराण,रामचरितमानस और प्रख्यात विद्वान आचार्य वराह मिहिर ने इन योगों के आधार पर बारिश फल कथन की विस्तृत चर्चा की है|

देश, काल और पात्र के हिसाब से समयानुसार इन योगों को देखा जाना चाहिए|

वैसे तो सिर्फ आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश के आधार पर मानसून के बारे में कुछ भी कहना अधूरी जानकारी देने जैसा होगा क्योंकि कब होगी बारिश और कितनी होगी बारिश यह पूर्णतया निर्भर करता है मेघों  के गर्भ धारण पर और जिसकी शुरुआत होती है सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से| साढ़े छः महीने पहले|

मानसून को जानने से पहले एक नजर कुछ अन्य बातों पर ( इसलिए आवश्यक क्योंकि 21 तारीख को सूर्य ग्रहण भी है|)| अप्रैल और मई के महीने को लेकर एक वर्ष पूर्व ही ग्रहों द्वारा प्राकृतिक उत्पात का जो संकेत दिया गया था वह अभी तक शत प्रतिशत सही निकला है| अब आगे पुनः देश के दक्षिण / पश्चिम भाग के साथ साथ पाकिस्तान, जापान, ज़र्मनी, अमेरिका और मलाया, ऑस्ट्रेलिया में प्रकृति की अस्थिरता का संकेत है अर्थात cyclone और भूमिकम्प की स्थिति है| तेज आंधी, तूफान और बारिश की स्थिति है|

13 जून से 2 जुलाई तक प्राकृतिक उत्पातों के लिए अनुकूल माहौल रहेगा|( यहाँ पर मौसम वैज्ञानिक और ज्योतिष अगर एक साथ एक मंच पर आकर काम करें तो सही स्थान का पता लगा सकेंगे और समय रहते आपसी सहयोग से बचावकारी कदम उठाए जा सकेंगे|)

इसके आगे सितंबर और अक्टूबर माह भी प्राकृतिक उत्पातों के लिए अनुकूल माह होगा|

(इसकी चर्चा पिछले वर्ष जून में ही की जा चुकी है |)

अब बात सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश की:-

क्रम से नकारात्मक और सकारात्मक बिंदुओं को जानेंगे,

सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय

1 – वार – रविवार – सामान्य से कम बारिश

2 – योग – वृद्धि – सामान्य से कम बारिश

3 – करण – किष्तुङ्गा – सामान्य से कम बारिश

4 -रात में आर्द्रा प्रवेश – सामान्य से कम बारिश

5 – चन्द्रमा आर्द्रा में – सामान्य से कम बारिश

6 -चन्द्रमा का वायु तत्व राशि में राहु के साथ होकर मंगल से दृष्ट होना – मेघ बनेंगे पर तेज हवाओं द्वारा उड़ा दिए जायेंगे|

7 – शुक्र और बुध का एक दूसरे से अगस्त के दूसरे सप्ताह तक दूरी बनाये रखना, बारिश को बाधित करने का योग है|

8 – सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय कुम्भ लग्न का उदय होना- सामान्य से कम बारिश 

9 – शुक्र का स्वराशि होकर केंद्र में होना अच्छी बारिश का योग है लेकिन पवन नाड़ी में इसकी स्थिति पुनः बारिश को बाधित करने वाले हैं|

10 – शुक्र, चन्द्रमा और शनि, इन तीनों की कोणीय स्थिति भी सामान्य से कम बारिश की स्थिति बना रहे हैं|

11 -सम्पूर्ण मानसून काल में बृहष्पति की  उपस्थिति, 26 जुलाई को बृहष्पति का पूर्वआषाढ़ नक्षत्र में प्रवेश और मानसून पर्यन्त इसका इसी नक्षत्र में रहना, मेघों के बरसने में सहायक होगा|

12 -बुध का पुनर्वसु नक्षत्र में होना, मेघों के जल बरसाने में सहायक होगा|

कुल मिलाकर देखें तो सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश का जो समय है वह अच्छे मानसून का संकेत नहीं दे रहा है| मानसून के देर से आने और सामान्य से कम बारिश की स्थिति बना रहा है| सूखा प्रभावित क्षेत्र में वृद्धि होगी| कुछ स्थानों में भू जल स्तर में गिरावट जारी रहेगा| कुछ क्षेत्र में अपेक्षा से अधिक बारिश होगी अर्थात बारिश का स्वाभाव सम नहीं रहेगा|

सम्पूर्ण मानसून काल में 17 जुलाई से 15 अगस्त का समय बारिश को लेकर सबसे अनुकूल समय होगा|दूसरा अनुकूल समय 11 से 15 सितंबर होगा|

इस बार ग्रहों के योग के आधार पर उत्तरी पूर्वी मानसून का पिछले वर्ष के अनुपात में बेहतर रहने का योग है|

अंत में एक बार फिर से ये कहना चाहूंगी कि यह सिर्फ एक रुझान है| इसका सम्पपूर्णता और समग्रता में आकलन तभी संभव हो सकेगा जब हम मेघों के गर्भाधान के साथ साथ वायु का भी सम्यक अध्ययन करेंगे|

@B Krishna