कोरोना वायरस – जैविक हथियार ??

WHO says coronavirus is deadlier than seasonal flu, doesn't spread ...

जर्मन विषाणु वैज्ञानिक डॉक्टर क्रिश्चियन ड्रोस्टेन के अनुसार -“यह विषाणु  प्रसारत्व और मारकत्व दोनों अपने साथ लिए हुए है|”

फ्रांस के विषाणु वैज्ञानिक लूक मॉन्टेग्निये के अनुसार -“इसके विषाणु को वहां के प्रयोगशाला में बनाया गया है|”

इस वायरस को लेकर यह बातें होती रही हैं कि यह जैविक हथियार है| तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत इस जैविक युद्ध से हो गयी है|

जैविक युद्ध कि बात जब की जाने लगी तो मेरे मन में एक प्रश्न आया कि क्या यह कोई नयी चीज है या पहले भी इस तरह के हथयारों का उपयोग किया जाता था ??

इसी प्रश्न  को आधार बनाकर जब मैंने शास्त्रों में ढूँढना प्रारम्भ किया तो श्रीमद्भागवत और हरिवंश पुराण में जैविक हथियार ज्वर से युद्ध किये जाने का वर्णन मिला |

श्रीमद्भागवत

विद्राविते भूतगणे ज्वरस्तु त्रिशिरास्त्रिपात |

अभ्यधावत दशार्हं दहनीव दिशो दश

अथ नारायणो देवस्तं दृष्ट्वा व्यसृजजज्वरम |

माहेश्वरो वैष्णवश्च युयुधाते ज्वराबुभौ ||’ 

आगे और भी कई श्लोक हैं|

कथा कुछ यों है कि शोणितपुर के राजा  बाणासुर और भगवान श्री कृष्ण के बीच युद्ध होता है| उस युद्ध में परम शिवभक्त बाणासुर ने शिव से सहायता मांगी, तब उनका छोड़ा हुआ तीन सिर और तीन पैरवाला माहेश्वर ज्वर दसों दिशाओं को जलाता हुआ श्रीकृष्ण की ओर दौड़ा| माहेश्वर ज्वर का ऐसा प्रभाव था कि उसके स्पर्श से संतप्त हुए श्रीकृष्ण के शरीर का आलिंगन करने पर बलराम जी बेहोश हो गए|

 भगवान कृष्ण ने उसे अपनी और आते देखकर उसका मुकाबला करने के लिए अपना ज्वर वैष्णव ज्वर छोड़ा| माहेश्वर ज्वर और वैष्णव ज्वर आपस में लड़ने लगे| अंत में वैष्णव ज्वर के तेज से महेश्वर ज्वर पीड़ित होकर चिल्लाने लगा और अपनी रक्षा हेतु प्रार्थना करने लगा| ज्वर तब देहधारी जीवों को ज्वर से ताप संतप्त होने की बात करता है|

 माहेश्वर ज्वर को अंततः वैष्णव ज्वर ने शांत किया| बाणासुर पराजित हुआ |

इसी तरह हरिवंश पुराण में भी माहेश्वर ज्वर का वर्णन है| ज्वर ने श्रीकृष्ण के कंठ पर प्रहार किया और एक मुक्के से उनकी छाती पर चोट की| फिर श्रीकृष्ण भी उस ज्वर को पीटने लगे|

ज्वरस्त्रीपादस्त्रीशिरः  षड्भुजो नवलोचनः |

निःश्वसन ……

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. सहृष्टरोमा ग्लानाक्षो क्षिप्तचित्त( भग्नचित्त ) इव श्वसन ||”

बलराम जी का शरीर जलने लगा, नेत्र व्याकुल हो गये, नेत्र आदि इन्द्रियां गलने लगी और विक्षिप्त होकर तेज तेज सांस लेने लगे|

वर्तमान कोरोना वायरस और जैविक हथियार के सन्दर्भ में इसे देखे जाने की जरूरत है|

यहाँ कुछ बातों पर ध्यान जाता है, वह है –

1 – यह ज्वर, कंठ और सीने पर प्रहार करता है|

2 – एक दूसरे के स्पर्श से फैलता है ( बलराम जी, श्रीकृष्ण के स्पर्श मात्र से पीड़ित हो जाते हैं )

3 – हर ज्वर बुरा नहीं होता| ‘माहेश्वर ज्वर’ के ताप को ‘वैष्णव ज्वर’ के शीत ने शांत किया| शमन किया|

4 -श्रीकृष्ण के स्पर्श  से बलराम जी बेहोश भी होते हैं और श्रीकृष्ण ही उन्हें ठीक भी करते हैं| क्या यह हमें हर्ड इम्युनिटी की तरफ संकेत तो नहीं कर रहा|

5 – इस युद्ध में प्रयुक्त ज्वर से हमने यह देखा कि हर वायरस नुकसानदेह नहीं होता| वायरस और रेट्रोवायरस को भी सूक्ष्मता में समझने की जरूरत है|

6 –‘वैष्णव ज्वर’ से ‘माहेश्वर ज्वर’ को शांत कर दिये जाने के बाद श्रीकृष्ण ज्वर को पुनः अपने भीतर समेट लेते हैं | एक महत्वपूर्ण बात जो यहाँ समझ में आती है कि औषधियों के प्रयोग से यह संक्रमण जाने वाला नहीं| इसका निदान  स्वयं के भीतर  ही नौजूद है| बहुत ही महत्वपूर्ण संकेत है यह|

इस प्रकार हमने पाया कि हमारे पूर्वजों ने भी जैविक हथियार का इस्तेमाल युद्ध में अपनी जय सुनिश्चित करने हेतु किया है| इसपर अभी और खोज किये जाने की  जरूरत है क्योंकि इस समस्या का समाधान भी हमें यहीं से प्राप्त होगा| ‘माहेश्वर ज्वर’ और ‘वैष्णव ज्वर’ की  संरचना को समझना होगा| दोनों के संरचनात्मक ढांचें के मूलभूत अंतर को समझना होगा| स्पर्श  को समझने हेतु पंचीकृत पंचभूतों में से चार भूतों के आपसी संबंधों की गहनता से जांच करनी होगी|

 शिव और कृष्ण को समझना होगा| तभी जान पाएंगे कि माहेश्वर ज्वर कैसे वैष्णव ज्वर से शांत हो गया |

अपने मूल की तरफ लौटें| शास्त्रों का आश्रय लेकर अपने पूर्वजों से बतियाएँ| उनके अनुभव को अपनी मेधा का सहारा देकर विषाणुओं को समझने का प्रयास करें| इतिहास को जबतक खंगालेंगे नहीं तब तक यह नहीं जान पाएंगे कि यह एक जैविक हथियार है या नहीं है|

मैंने अपने पूर्व के आलेख में महामारी को लेकर कहा है कि सितम्बर माह तक एहतियात बरतने की जरूरत  है| इसके बाद यह नियंत्रित होगा| महामारी तो आज है कल समाप्त हो जायेगा| जरूरत है विषाणु के स्वाभाव को समझकर उसके साथ लयबद्ध होने का क्योंकि विषाणु को नियंत्रित तो कर सकेंगे लेकिन इससे फिलहाल मुक्त नहीं हो सकेंगे| यह इतनी जल्दी जाने के लिए नहीं आया है|

@ B Krishna