मन्त्र विद्या और मन्त्र रूप औषध

MI DESPERTAR DE CONCIENCIA - CONEXIÓN UNIVERSAL

मन्त्र अमोघ हैं|यदि यह विफल हुआ तो सृष्टि का सूक्ष्म संतुलन ही बिगड़ जायेगा| ऋषि इसे भली भांति जानते थे | वे मन्त्र द्रष्टा होते थे | मन्त्रों की रचना का अपना एक अनुशासन होता था |कौन सा अक्षर किसके पहले आएगा इसमें व्याकरण का पूरा ख्याल रखा जाता था | अनुपूर्वी कहते हैं इसे | इन मन्त्रों के जप का भी अपना नियम और विधान है |मन्त्र ध्रुव हैं | इसको धारण करने का एक नियम होता है |क्या है वह नियम हम उसको जानें नहीं तो कहीं ऐसा न हो जाये कि हम अनजाने में ही नियमों को नष्ट करने लगें और अभीष्ट  साधन न हो सके |

आज हम जानेंगे की मन्त्रों के बारे में शास्त्र क्या कहते हैं ?? क्या हैं यह मंत्र विद्या और मन्त्र रूप औषध ??

 मंत्र विद्या :-

अग्निदेव कहते हैं – वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाली मन्त्र विद्या का वर्णन करता हूँ |ध्यान देकर उनका श्रवण कीजिये |

1 – बीस से अधिक अक्षरों वाले मन्त्र  मालामन्त्र, दस से अधिक अक्षरों वाले मन्त्र बीजमंत्र कहे गए हैं |

2 –  ‘मालामन्त्र’ वृद्धावस्था में सिद्धिदायक होते हैं, ‘बीजमंत्र’ यौवनावस्था में सिद्धिप्रद हैं | पांच अक्षर से अधिक तथा दस अक्षर तक के मन्त्र बाल्यावस्था में सिद्धि प्रदान करते हैं |अन्य मंत्र अर्थात एक से लेकर पांच अक्षर तक के मन्त्र सर्वदा और सबके लिए सिद्धिदायक होते हैं |

3 – मन्त्रों की तीन जातियां होती हैं – स्त्री, पुरुष और नपुंसक |जिन मन्त्रों के अंत में ‘स्वाहा’ पद का प्रयोग हो, वे स्त्री जातीय हैं |जिनके अंत में ‘ नमः’ पद जुड़ा हो, वे मन्त्र नपुंसक हैं |शेष सभी मन्त्र पुरुषजातीय हैं |

4 – रोग के निवारण, शांतिकर्म में स्त्री जातीय मन्त्र उत्तम माने जाते हैं | वशीकरण और उच्चाटन कर्म में पुरुष मन्त्र उत्तम माने गए हैं और अभिचार अदि कर्म में नपुंसक मन्त्र उपयोगी बताये गए हैं |

5 – मन्त्रों के दो भेद होते हैं – ‘आग्नेय’ और ‘सौम्य’ | जिनके आदि में ‘प्रणव’ का योग हैं वे ‘आग्नेय’ हैं और जिनके अंत में ‘प्रणव’ का योग हैं वे   सौम्य कहे गए हैं |जिस मन्त्र में तार ( ॐ ), अन्त्य ( क्ष ), अग्नि ( र ), वियत ( ह )- इनका बाहुल्य हो, वह आग्नेय माना गया है | शेष मन्त्र ‘सौम्य’ कहे गए है |

6 – जब सूर्य नाड़ी चल रहा हो तो ‘आग्नेय’ मन्त्र का जप करें और जब चंद्र नाड़ी चलती हो तो ‘सौम्य’ मन्त्रों का जप करें |जब वाम नाड़ी चलती हो तो वह ‘आग्नेय’ मन्त्र के सोने का समय हैं |ऐसे में इस मन्त्र का जप सिद्धिदायक नहीं होता है | इसलिए जब दाहिनी नाड़ी चल रही हो तभी ‘आग्नेय’ मन्त्रों का जप करना और इसके विपरीत में ‘सौम्य’ मन्त्रों का जप किया जाना चाहिए |

7 – ‘आग्नेय’ मन्त्र प्रायः अंत में नमः पद से युक्त होनेपर ‘सौम्य’ माना जाता है और ‘सौम्य’ मन्त्र भी अंत में फट लगा देने पर ‘सौम्य’ हो जाता है |

8 –जब दोनों नाड़ियां एक साथ चल रही हो तो उस समय दोनों मन्त्र जगे रहते है अतः उस समय दोनों मन्त्रों का जप किया जा सकता हैं |

9 – दुष्ट नक्षत्र, दुष्ट राशि तथा शत्रुरूप अदि अक्षर वाले मन्त्रों का त्याग करना चाहिए |

मंत्ररूप औषध :-

धन्वंतरि जी कहते है -सुश्रुत ! ओंकारमन्त्र आयु देनेवाले तथा सब रोगों से छुटकारा देने वाले है |इतना ही नहीं, देह छूटने के पश्चात् वे स्वर्ग की भी प्राप्ति करने वाले हैं |’ओंकार’ सबसे उत्कृष्ट मन्त्र है |उसका जप करके मनुष्य भोग और मोक्ष का भागी होता है |

सभी मनोरथ को पूर्ण करनेवाला अष्टाक्षर मन्त्र है – ‘ ॐ नमो नारायणाय’

सब कुछ देने वाला द्वादश अक्षरीय मन्त्र है – ‘ॐ नमो भगवते बसुदेवाय’

निरोग और श्री संपन्न होने का मन्त्र है – ‘ॐ हूं विष्णवे नमः

निर्मल और शुद्ध होने का मन्त्र है – ‘धर्मः सद्धर्मकृत, धर्मी’

लक्ष्मी को पा लेने का मंत्र है – श्रीदः, श्रीशः; श्रीनिवासः, श्रीधरः, श्रीनिकेतनः, श्रियपतिः, तथा श्रीपरमः

समस्त कामनाओं की पूर्ति हेतु मन्त्र है – ‘कामी, कामप्रदः, कामः, कामपालः, हरिः, आनन्दः, माधवः

युद्ध में विजय की इच्छा रखनेवाले योद्धाओं के लिए मन्त्र है – ‘रामः’, परशुरामः’, नृसिंह’, ‘विष्णुः’. ‘त्रिविक्रमः’

विद्याभ्यास करनेवाले छात्रों के लिए मन्त्र है – ‘श्री पुरुषोत्तम’ तथा  ‘हयग्रीव ‘

बंधन से मुक्त करने वाला मन्त्र है – ‘दामोदरः’

नेत्र रोगों के निवारण हेतु मन्त्र है – ‘पुष्कराक्ष’

भय से मुक्ति के लिए मन्त्र हैं – ;हृषीकेशः’

संग्राम मेंअपराजिततथा जल से पार होते समय ‘श्रीनृसिंह’ का स्मरण करें |

‘नारायण’ का स्मरण हर समय करना चाहिए |

विष हरण के लिए ‘गरुडध्वजः’ का जप करना चाहिए |

पुत्र की प्राप्ति के लिए ‘ जगतसुति( जगत-स्रष्टा ) का जप करें

शौर्य की कामना हो तो ‘श्रीबलभद्र’ का स्मरण करें |

इनमे से प्रत्येक नाम अभीष्ट मनोरथ को सिद्ध करने वाला है |

आइये सब मिलकर निज निज अभीष्ट साधन हेतु मन्त्रों का नियमित जप करें | मन्त्रवत हो जाएं |

राम कहते है लक्ष्मण से -लक्ष्मण ! प्रभावशक्ति और उत्साह शक्ति से मन्त्र शक्ति श्रेष्ठ बताई गयी है | प्रभाव और उत्साह से संपन्न शुक्राचार्य को देव पुरोहित बृहस्पति ने मन्त्र -बल से जीत लिया |

देवपुरोहित,देवगुरु बृहस्पति का मकर राशि में संचरण सभी के लिए शुभ हो ! शुभ हो !! शुभ हो !!!

@B Krishna

9910400118

You Tube chaneel – lightonastrology

http://www.lightonastrology.com