सूर्य परिवेश

       सूर्य परिवेश

मेरे पास ये तस्वीरें आयीं | सूर्य के चारो तरफ गोलाकार आकृति है | पूछा गया है कि क्या ज्योतिष इसके बारे में भी कुछ कहता है ??

बहुत ही अच्छा लगा कि इस तस्वीर  को मेरे साथ साँझा किया | प्रकृति से हम सब जुड़ें | सूरज,चाँद, वायु से बतियाएं | एक दूसरे की साथ इसे साझा करें | इसके लिए हमें न तो किसी बड़े प्रयोगशाला की जरूरत है और न ही अर्थ की जरूरत है | हम सब बंद कमरों से बाहर निकलें | AC को बंद करें |

जिस क्षण हम यह करना शुरू कर देंगे, ज्योतिष को समझना  प्रारम्भ कर देंगे | समझते समझते जानने लगेंगे और धीरे धीरे जैसे जैसे पहचान बढ़ती जाएगी तब हम यह जान जायेंगे की ज्योतिष व्यवहारशास्त्र है | परिवर्तन से रूपांतरण की विधा है यह |

भद्रबाहु संहिता के परिवेश अध्याय में सूर्य और चंद्र दोनों के चारो तरफ बनने वाले परिवेश की वृहद् चर्चा की गयी है | इसी तरह वृहत संहिता में भी इसकी चर्चा विस्तार से की गयी है |

दोनों सूर्य परिवेश को लेकर जो  कहते हैं उनमे से कुछ की चर्चा यहाँ करते हैं :-

1 – पांच भूतों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – की अपेक्षा से पांच प्रकार के परिवेश होते हैं |

2 – कुछ प्रकार के परिवेश शुभ होते हैं और कुछ प्रकार के परिवेश अशुभ होते हैं |

3 – खंडित, रुक्ष, चिता की अग्नि के सामान रंग वाले, टेढ़े मेढ़े, अस्त्रों की भांति जो परिवेश होते हैं वे अशुभ होते हैं और इसके विपरीत परिवेश शुभ होते हैं |

4 – सूर्य का परिवेश यदि सारे दिन बना रहे तो भुखमरी, महामारी, युद्ध का प्रकोप होता है | इस प्रकार के परिवेश से सभी प्रकार के धान्यों का नाश, चोरी में वृद्धि तथा पथिकों को हानि पहुँचती है |

5 – सूर्य का परिवेश जिस तरफ का भाग  खंडित दिखाई दे उस दिशा से परचक्र का प्रवेश होता है |अतः नगर और देश की रक्षा के लिए उस दिशा में प्रबंध करना चाहिए |

6 –   कृष्णवर्ण का परिवेश यदि सूर्य को आच्छादित करे तो समाज में कष्ट का सूचक है |

7 – यदि हरे या नीले रंग का परिवेश सूर्य को ढँक ले तो उस प्रदेश के प्रशासक वर्ग को कष्ट होता है |

8 – सूर्य का परिवेश यदि सूर्य के चारो तरफ हो तो नगर, राष्ट्र और देश के लोग महामारी से पीड़ित होते हैं |

9 -सूर्य  परिवेश का आकर यदि तिकोनाकार होता है तो उस प्रदेश की तीन भाग सेना युद्ध में मरी जाती है |

10 – सूर्य के चारो तरफ यह परिवेश यदि बार बार बने और बिखर जाए तो वहां पर कलह और संग्राम होता है |

11 – सूर्य के चारो तरफ बन रहे परिवेश में अगर कई रंग दिखाई पड़े तो उस प्रदेश के राजा की  मृत्यु होती है |

12 – सूर्य की चारो तरफ बनने वाले परिवेश में यदि दो छल्ले हों तो उस प्रदेश की सेना प्रमुख को खतरा होता है |

सूर्य परिवेश के साथ कुछ और बातों की यहाँ चर्चा करते हैं | बृहत् संहिता में ग्रहों के बीच युद्ध की भी बृहद चर्चा है | वहाँ नवग्रहों को तीन समूहों  में बांटा गया है | अकरंद, पौरा और यायी | एक  समूह के बीच युद्ध या एक समूह का दूसरे समूह के साथ  ग्रह युद्ध जब हो तब उसका क्या असर होता है और कहाँ कहाँ होता है इसका विस्तार से वर्णन किया गया है |

आने वाले 31 मार्च – 22:10 बजे से 1 अप्रैल 00 :10 बजे के बीच |

अकरंद और यायी के बीच

और

 पौरा और यायी के बीच ग्रह युद्ध की स्थिति तैयार हो रही है |

हालाँकि 20 मार्च को भी पौरा और यायी के बीच ग्रह युद्ध हुआ था लेकिन अब पौरा  और यायी के साथ साथ अकरंद और यायी भी जुड़ रहे हैं |

परिणाम :-

1 – टकराव और अराजकता की स्थिति | जातीयता को लेकर अराजक और हिंसक स्थिति | एक प्रदेश के राजा का अपने जैसे समान राजा के हित साधन में दूसरे वर्ग के लोगों को क्षति पहुँचाना |

2 – दो प्रदेश के राजा अपने अपने हित साधने हेतु जब संधि करेंगे तब अपने प्रदेश के लोगों की उपेक्षा करेंगे | अपना हित ही सर्वोपरि होगा | अर्थात आने वाले समय में विस्थापन  की समस्या बढ़ सकती है |

3 – एक संप्रदाय का अपने ही संप्रदाय के लोगों को फायदा पहुँचाया जायेगा | दो राष्ट्र जो समान हित साधन में लगे हैं वे एक ग्रूप बनाकर आपस में ही सारी संसाधनों का बटवारा कर लेंगे | कह सकते हैं कि विश्व में नए ध्रुवीकरण के सूत्रपात का समय भी है यह | व्यापर और रोजगार को लेकर कुछ राष्ट्र पहले से चले आ रहे संगठन से  बाहर निकल कर  नया संगठन बनाएंगे |

एक और महत्वपूर्ण बात वह यह कि उपरोक्त वर्णित समय में हम सभी को कोरोना वायरस के प्रकोप को अगले चरण में प्रवेश से रोकने हेतु युद्ध स्तरीय प्रयास करने होंगे।यह सप्ताह धैर्य की परीक्षा का है । फैसला हमें करना है कि विख्यात और प्रतापी राजा प्रतापभानु की तरह कालकेतू के फैलाए जाल में फंसना है या मुक्त होना है ।

@ B Krishna

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