सूर्य का विचलन-जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदा और युद्ध के हालात

 

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विगत कुछ वर्षों के अपने शोध में मैंने सूर्य को विचलित होते हुए देखा है |पूरे विश्व का पोषण करने वाला सूर्य भी विचलित हो सकता है ?? लगातार निर्विकार रूप से हर किसी को अपनी रश्मियों के माध्यम से ऊर्जावान बनानेवाला सूर्य भी विचलित हो सकता है ?? कौन है जो ऊर्जा के असीमित भण्डारक को भी विचलित कर देता है ?? ये सवाल तो मेरे मन में आये ही साथ ही साथ यह जिज्ञासा भी हुई की क्या होता है जब सूर्य विचलित होता है ?? पहली जिज्ञासा .. कौन है जो सूर्य को विचलित करता है का जवाब मिला – केतु | अब यहाँ आगे बढ़ने से पहले यह जानने की इच्छा बलवती हो गयी की केतु में ऐसा क्या है जो सूर्य विचलित हो जाता है ?? जरा नजदीक गयी तो पाया की केतु के पास दिल है |अब शरीर में दिल का काम है रक्त के अशुद्धि  को दूर करके उन्हें शुद्ध करना और वापस शरीर में भेजना | दिल यह काम अनवरत करता ही रहता है ,इसके लिए शरीर उससे कोई मांग नहीं करता |दूसरी तरफ सूर्य – धरती का पोषण तो करता है ,लेकिन जबतक धरती अपनी प्यास नहीं जाहिर करती वह मेघों के निर्माण में सहायक नहीं होता है |एक तरफ केतु जिससे शरीर कोई मांग नहीं करता फिर भी रक्त शुद्धि करता रहता है ,दूसरी तरफ सूर्य जो बगैर  धरती के मांग के मेघों के निर्माण में मदद नहीं करता है |सूर्य केतु के परस्पर कोणीय सम्बन्ध और विचलन को हम पृथ्वी वासी तब तक नहीं समझ पते जब तक इससे शनि, मंगल और गुरु का खास कोणीय जुड़ाव नहीं होता है |कहने का तात्पर्य यह की बात जब तक सूर्य और केतु तक सीमित रहती है सब कुछ ठीक रहता है लेकिन जैसे ही इसके साथ ऊपर वर्णित ग्रहों का जुड़ाव होता है -पृथ्वी पर उत्पात मचने लगता है |पांच प्राणो का सीधा सम्बन्ध सूर्य से है और जब सूर्य असंतुलित होता है तो स्वाभाविक है कि इनका भी लय बिगड़ेगा और इनका लय बिगड़ने का अर्थ है व्यक्ति के भीतर अशांति का बढ़ना | एक अशांत व्यक्ति कहाँ से शांत समाज का गठन कर  सकता है | परिणाम सामाजिक अशांति और हिंसक स्थिति |

केतु की बिना मांगे मदद करने की आदत से सूर्य परेशान हो जाता है |

 दूसरी जिज्ञासा की क्या होता है जब सूर्य विचलित होता है ??

वर्ष 1900 को अपना आधार बनाकर मैंने सूर्य और केतु के संबंधों को पढ़ना शुरू किया  |सूर्य ,केतु के साथ एक खास कोणीय सम्बन्ध में तो हर वर्ष आता है लेकिन जब इस समबन्ध से शनि ,मंगल, बृहष्पति भी एक खास प्रकार से जुड़ जाता है ((1903,1911,1915,1921,1927,1929,1932,1947,1954,1961,1965,1971,1981,1985,1991 ,1999, 2001, 2004 , 2011.. और अब 2020  / 2021), तब दो प्रकार की घटनाएं परिलक्षित होती हैं :-

 

1 – विश्व में अशांति की स्थिति ,युद्ध जैसे हालत का निर्माण ,

2 – जलवायु परिवर्तन ,प्राकृतिक आपदा में वृद्धि |

 

जहाँ तक बात युद्ध की है तो 2020  में युद्ध की सम्भावना तो नहीं है लेकिन आपसी मनमुटाव की स्थिति से इंकार नहीं | हॉट स्पॉट रहेंगे -कश्मीर , चीन ,रूस ,अफ़ग़ानिस्तान ,यमन ,इथियोपिया ,,लीबिया , अमेरिका -ईरान -इजराइल और पर्शियन गल्फ ,अमेरिका -उत्तरी कोरिया और यूक्रेन |

भारतवर्ष की बात करें तो मैंने पहले भी लिखा है कि सीमा पर दुश्मनो से निपटने के लिए सरकार के पास पर्याप्त सेना है पर देश के भीतर के अराजक तत्वों से लड़ना सरकार के लिए 2020 में एक अहम् चुनौती होगी|खासकर आगे आने वाले माह अगस्त में जब शुक्र का गोचर मिथुन राशि में  होगा सितम्बर माह में और राहु राशि परिवर्तन करके वृषभ राशि में आ जायेगा |किसी बड़े घटना को अंजाम दिया जा सकता है |

बात जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदा की :-

जलवायु परिवर्तन पर आगे बढ़ने से पहले हम यह जानें की इस वर्ष मानसून कैसा रहेगा | सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र से स्वाति  नक्षत्र तक के गोचर का जो समय होता है वह समय मानसून का कहलाता है | दक्षिण पश्चिम मानसून |इसकी चर्चा इसलिए भी की भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ के कृषक , कृषि के लिए मुख्यतः मानसून की बारिश पर ही निर्भर होते हैं |21 जून 2020 को सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में गोचर होगा |इस समय योग,लगन ,ग्रहों की स्थिति ,वार और तिथि ,सभी मिलकर मानसून के सामान्य से कुछ कम रहने का संकेत दे रहे हैं |पूरे मानसून के दौरान शुक्र और बुध की दूरी चिंताजनक है |इनकी दूरी अर्थात सूखा ग्रस्त क्षेत्र में बढ़ोतरी होना |कई जगहों पर पानी की कमी के कारण लोग बाग एक बार फिर घर छोड़ने को विवश हो जायेंगे |भू जल स्तर में इस साल भी गिरावट का जारी रहना चिंतनीय है |

पूरे मानसून में बारिश का जिम्मा इसबार गुरु के जिम्मे है | गुरु व्यापक होता है इसलिए गुरु से प्रार्थना की सर्वत्र यथोचित मात्रा में मेघों को बरसने का आदेश दें  |

मौसम की अठखेली जो अभी जारी है यह जारी रहेगी |

भारत के साथ साथ विश्व की भी बात करें तो अप्रैल माह में जब सूर्य का गोचर मेष राशि में होगा ,प्राकृतिक आपदा के लिए अनुकूल माहौल तैयार होने लगेगा |मई का महीना और सितम्बर का महीना तूफ़ान,बारिश,भूकंप की स्थिति को बल प्रदान करने वाले हैं |

30 मार्च को बृहष्पति का प्रवेश होगा मकर राशि में |

शास्त्र के अनुसार :-

चैत्र के महीने में गुरु का राशि परिवर्तन जापान,जर्मनी, अमेरिका, मलाया के लिए अच्छा नहीं बताया गया है |

चैत्र माह में गुरु का गोचर मकर राशि में होना वर्षा का अभाव और दुर्भिक्ष का द्योतक है |

उत्तर और पश्चिम में खंड वृष्टि और दक्षिण में दुर्भिक्ष की स्थिति होगी |

जगह कहाँ ?? जरूरत है मौसम वैज्ञानिकों को ज्योतिष के साथ मिलकर काम करने का |

सबकी निगाह इस वर्ष भी हथिया के बारिश पर रहेगी | सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश के समय चंद्र का अमृत नाड़ी में होना , जलीय राशि मकर में होना और शुक्र का जलीय राशि कर्क में होना और गुरु का पूर्व आषाढ़ नक्षत्र में होना अच्छी बारिश की स्थिति तैयार कर रहे हैं |

इस वर्ष अक्टूबर माह में जाकर शुक्र का गोचर ,बारिश को लेकर समर्थन में आएगा |

आगे कब विचलन होगा ??

 आने वाले वर्षों में 2029 एक ऐसा वर्ष होगा जब विश्व युद्ध के कगार पर होगा | यहाँ से जो विभीषिका शुरू होगी वह 2031 और 2044 में अपने चरम पर होगा |

आगे आने वाले वर्षों में 2023 ,2026 ,2031 और 2044 ऐसे वर्ष होंगे जब जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फ से ढंके रहने वाला आर्कटिक सागर में बर्फ की कमी होगी | प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि की वजह से तबाही बढ़ेगी |

ग्रहों के इस स्थिति को देश और दशा का समर्थन जहाँ जहाँ मिलता जायेगा ,सूर्य का विचलन परेशान करता जायेगा |

ज्योतिष कभी भी एकांगी होकर  विश्लेषण नहीं करता | देश ,काल, पात्र सभी को जोड़कर ही कुछ कहता है | जरूरत है समय रहते ज्योतिष और अन्य सम्बंधित विभागों को एक साथ एक मंच पर आकर काम करने का और देश ही नहीं वरन विश्व को भी युद्ध और प्राकृतिक आपदा की विभीषिका से बचाने का |

आइये एक साथ काम करके सूर्य के विचलन का समझें |इसके साथ वर्णित ग्रहों के सम्बन्ध का जाने | सूर्य के विचलन को समझने कि दिशा में एक साँझा प्रयास शुरू करें |

साथ ही साथ सूर्य देव से यह भी प्रार्थना करें कि कलयुग में एक बार फिर सबकी रक्षा हेतु विचलन रूपी विष को कंठ में धारण करें |

विश्व को अभयत्व प्रदान करें ..

@B Krishna Narayan

ASTRO TALK

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