सृष्टि को प्रलय से बचाना है तो करें मन्त्र जाप

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25 जनवरी 2020- माघ शुक्ल प्रतिपदा – गुप्त नवरात्र के  शुरुआत का समय |यह एक महज संयोग ही है की ठीक इसी समय समय का प्रतीक शनि तीस साल बाद अपनी राशि मकर राशि में आये हैं | मैंने पहले भी लिखा है कि मकर राशि में शनि का प्रवेश केंद्रीय सत्ता के लिए मुश्किल को साथ लेकर आने वाला  वाला समय  है |

माघ शुक्ल प्रतिपदा की कुंडली को भारत के सन्दर्भ में जब देखें तो पूरी कुंडली की ऊर्जा का केंद्र तृतीय भाव है एवं लग्न भाव है  |  तृतीय भाव का मुख्य भाव बनना और गुरु, शुक्र का अतिचारी होना ,बुध का अस्त होकर मंगल के साथ गुप्त सम्बन्ध बनाना,अराजक और असंतोष की स्थिति का मार्ग प्रशस्त तो कर ही रहे हैं ,साथ ही साथ , हमें दस्तावेज से छेडछाड़,मूल दस्तावेज को लेकर स्कैंडल की तरफ भी  संकेत कर  रहे हैं| सही परिणाम के लिए अलग अलग हथकंडे अपनाये जायेंगे | |यह भी संकेत दे रहे हैं की आने वाले समय में सरकार से ज्यादा मीडिया की इस समय की भूमिका पर सवाल किये जायेंगे |तृतीय भाव का शक्ति का केंद्र बन जाना और शुक्र का अतिचारी होकर मंगल से इतना सामीप्य बनाना दुर्घटना का संकेत है |सजग और सहज होने का समय है | सही आसन को जानने का समय है |

भारत और विश्व के मौसम की अगर बात करें तो बारिश और तेज  हवाओं का योग निर्मित हो रहा है | तेज बर्फ़बारी की स्थिति है | ठण्ड से फिलहाल राहत नहीं |इस  समय जो योग निर्मित हो रहा वह एक अच्छा संकेत दे रहा है प्रकृति को लेकर | अभी तक हम बात करते हैं ग्लोबल वार्मिंग की पर यह समय ग्लोबल कूलिंग का है |

एक तरफ ग्लोबल कूलिंग – शुभ संकेत है तो दूसरी तरफ अराजक और असंतोष -अशुभ संकेत है |जब ग्रह लगातार अस्थिर गतिविधयों का संकेत दे रहे हों तब हमें क्या करना चाहिए | क्या शांति से विधना के लिखे को स्वीकार कर लेना चाहिए या कोई उपाय है इससे बाहर आने का ? क्या इस अशुभता से निजात पाने का कोई तरीका है ??

शास्त्र के अनुसार मंत्र है इससे निजात पाने का अचूक अस्त्र |

शास्त्र के अनुसार:-

” मन्त्र महामणि विषय व्याल के | मेटत कठिन कुअंक भाल के ”

वेद के रचयिता ऋषि मन्त्र द्रष्टा थे |अर्थात अपने ध्यान से वे उन मन्त्रों को देख पाते थे और अपनी इन्द्रियों पर काबू पाने कि वजह से उन्हें धारण कर पाते थे और अपनी साधना से वे इन मन्त्रों को अपने शिष्यों तक पहुंचा पाते थे | इन मन्त्रों कि रचना में शब्दों का पूरा अनुशासन होता है  |किस शब्द के पहले कौन शब्द -इनकी अपनी एक व्यवस्था है |इसे अनुपूर्वी कहते हैं |मन्त्र जब सिद्ध हो जाता है तब असीमित ऊर्जा का भंडार हो जाता है |उदाहरण के लिए पहले के ज़माने में जब तीर छोड़े जाते थे तो होते तो वे सामान्य तीर ही थे लेकिन जब उन्हें मन्त्रों द्वारा सिद्ध कर दिया जाता था तो उस मंत्रीय शक्ति के कारण वे अमोघ बन जाते थे |

मन्त्र क्या हैं ?कब करें मंत्र जाप ? कौन से मन्त्र को जपें ? किस दिन किस मन्त्र को जपें ? क्या इनके जाप का कोई नकारात्मक प्रभाव भी होता है ? ऐसे कई प्रश्न हैं जिनका जवाब हम क्रमवार तरीके से जानेंगे |आज हम विकास कि प्रक्रिया को एक मन्त्र के माध्यम से जानेंगे |

आइये आज एक औपनिषदीय मन्त्र के द्वारा सृष्टि के आरम्भ और आगे के रहस्य को समझें :-

“यथोर्णनाभिः सृजते ग्रहवते च

यथा पृथिव्यामोषधयः सम्भवन्ति

यथा सतः पुरुषातकेशलोमामि

तथाक्षरःसम्भवतिह विश्वम |”

इस मन्त्र में तीन दृष्टांत द्वारता यह बात समझाई गयी है कि जिस प्रकार मकड़ी अपने पेट में स्थित जाले को बहार निकालकर फैलाती है और फिर उसे निगल जाती है उसी प्रकार परब्रह्म परमेश्वर अपने अंदर सूक्ष्म रूप से लीन हुए जड़ चेतन रूप जगत को सृष्टि के आरम्भ में नाना प्रकार से उत्पन्न करके फैलते हैं और प्रलयकाल में पुनः उसे अपने में लीन कर लेते हैं | इस दृष्टांत द्वारा सृजन का नाभि के साथ गहरा सम्बन्ध हमें स्पष्ट रूप से गर्भनाल कि तरफ इंगित करता है |माता के गर्भ में गर्भ नाल गर्भस्थ शिशु से जुड़ा होता है |गर्भस्थ शिशु जबतक गर्भ में पूर्ण विकसित नहीं होता है तब तक गर्भनाल से जुड़ा होता है |नौ महीने के बाद जन्म के पश्चात् गर्भनाल से उसका सम्बन्ध विच्छेद होता है |इसका मतलब गर्भनाल हमें, शिशु के विकास कि प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई यह बतलाता है |

सकारात्मक  विकास हो इसके लिए जरूरी है जीवन में प्रेम का होना | किस मन्त्र का जाप हमें प्रेम के अनेक रूपों में लेकर जाने वाला होगा यह जानना बहुत जरूरी है | प्रेम में बहकर सबके पास पहुंचा जा सकता है ,प्रेम में जमकर खुद में खुद में  सिमटना हो सकता है ,दूसरों को चोट पहुँचाना ध्येय हो सकता है , प्रेम में तपकर भी सबके पास पहुंचा जा सकता है और प्रेम में जलकर न तो खुद के न किसी और का हुआ जा सकता है | यह हमें तय करना है कि हमें प्रेम कि कौन सी अवस्था चाहिए | उसी के अनुसार मन्त्रों का निर्धारण होगा |

देवी के इस गुप्त आराधना के समय आइये हम सब उनके मन्त्र रूप की  आराधना करें और देवी से मन्त्र रचयिता नहीं मन्त्र द्रष्टा होने का आशीष मांगें |हम भी बने मन्त्र द्रष्टा | हम भी देश और दुनिया को अराजक और असंतोष की स्थिति से बाहर निकालकर लाने में अपनी सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करें |

@B Krishna Narayan

ASTRO TALK

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