भारत के भाल पर फिर से मुकुट की तरह स्थापित हो ज्योतिष

कुछ समय पहले से मैं भिन्न भिन्न आयामों पर लिखती चली आ रही हूँ | आज कुछ अन्य आयामों की चर्चा ज्योतिष को लेकर की जाने वाली साजिश और काल चक्र दशा के माध्यम से इस आलेख में होगी |

2 फरबरी 1835 को लार्ड मकौले ने, ब्रिटिश पार्लियामेंट में ,भारत के बारे में कहा ” we would ever conquer this country ,unless we break the very backbone of this nation ,which is her spiritual and cultural heritage and therefore ,I propose that we replace her old and ancient education system ..”
वर्तमान समय में भी तो यही किया जा रहा है | अपने ही देश में अंग्रेज नहीं बल्कि अपने ही लोगों द्वारा भारत की गौरवशाली संस्कृति को, ज्योतिषशास्त्र को , सुनियोजित तरीके से , चौतरफा साजिश करके मृत करने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है |
एक तरफ जहाँ अमेरिका ,जर्मनी जैसे विकसित देश अपने विश्वविद्यालयों में ज्योतिषशास्त्र की विधिवत पढाई करा रहे हैं वही अपने देश में इसे भविष्य कथन का माध्यम बना कर रख दिया गया है | रामचरितमानस , महाभारत , पुराण , सब के सब ज्योतिषशास्त्र की प्रयोगशाला हैं | वराहमिहिर ने जिन बातों की चर्चा की है ,उन्ही बातों की चर्चा cecils book of medicine , में की गयी है .जरूरत है इन्हे वहां से निकाल कर जन जन के बीच लाने का .ज्योतिषशास्त्र , भविष्यकथन नहीं ,बल्कि व्यक्ति के आध्यात्मिक पुनरूत्थान की बिधा है |
आज ज्योतिषशास्त्र केवल भविष्य कथन का शास्त्र बनकर रह गया है | आने वाले समय में विश्व जब हमसे इस गरिमामयी शास्त्र के बारे में जानना चाहेगा तब हमारे पास क्या होगा उन्हें देने के लिए ? यह एक बरी बिडंबना होगी .अतः ज्ञान का भंडार जो भरा परा है शास्त्रों में , ग्रंथों में , उपनिषदों में , जरूरत है उन्हें जन जन तक पहुंचाने की इस विद्या को बाजार से निकाल कर ,व्यापार से अलग कर के , आध्यात्मिक पुनरुथ्थान की विधा बनाये |पुस्तकों में छिपे हुए इस ज्ञान को, जो की मृतप्राय हो चुकी है ,उसे फिर से भारत के भाल पर मुकुट की तरह स्थापित कर सके |

नए साल की शुरुआत हो गयी है | | इस समय भारतवर्ष की काल चक्र दशा चल रही है तुला में तुला ( इस दशा की शुरुआत हुई है 6 मई 2019 से |तुला का दूसरा cycle शुरू हुआ है | इससे पहले तुला में तुला के दशा की शुरुआत हुई थी मई 1947 में |देश की आजादी के समय मिलने वाली दशा की पुनरावृत्ति पुनः हो रही है तो एक खास चर्चा करना बनता है |
यह खास चर्चा ऐसे खास समय में जब राहु का गोचर भारतवर्ष की कुंडली के द्वितीय भाव में जन्मकालीन मंगल के ऊपर से हो रहा हो और काल,संयम के प्रतीक शनि और देवगुरु बृहस्पति अस्त हों |जन्मकुंडली में मिथुन राशि के मंगल के ऊपर छाया ग्रह राहु का गोचर यह संकेत दे रहे हैं की वित्तीय क्षेत्र में उम्मीद से परे बदलाव होगा | कुछ बदलाव की प्रक्रिया लागू तो कर दी जायेगी लेकिन उनके क्रियान्वयन में बाधा उत्त्पन्न होगी और हो सकता है की आगे चलकर या तो उन्हें बंद कर दिया जाए या फिर थोड़े बहुत फेर बदल कर के उन्हें नए रूप में पुनः लाया जाये |

कर्ज नीति में बदलाव की जाएगी जो अभी तो अच्छा प्रतीत होगा लेकिन दूरगामी आत्मघाती परिणाम को लेकर आने वाला होगा |

एक नए संविधान की रुपरेखा तैयार करने की भूमिका तैयार होगी |संविधान के कई अनुच्छेदों को पुनर्परिभाषित किया जायेगा |

यह साल वैसे कलाकारों के उभर कर आने का साल है जिनके लिए कला आत्मतुष्टि देने वाला है |

हनी ट्रैप कि वजह से बड़ा स्कैंडल सामने आएगा |

सरकार द्वारा दूरसंचार के क्षेत्र में जल्दबाज़ी में कोई निर्णय न लिया जाये | जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला देश की

सुरक्षा पर सवाल खड़े कर सकता है |

इंटरनेट की दुनिया में बहुत बारे बदलाव का साल रहेगा यह |

कुछ समय पहले मैंने जब बृहस्पति ,शनि और केतु की चर्चा में यह लिखा था कि हम सब एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं |देश ही नहीं बल्कि विश्व का इतिहास निर्णायक अध्याय को जोड़ने कि तैयारी में है |और इस मोड़ को पार करके आगे जाने का रास्ता हिंसा से भरा होगा |

@B Krishna Narayan
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