बचिए राशि फल कथन से

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ज्योतिष शब्द को सुनते ही ,सामान्यतया जो विचार इसको लेकर आम जनों के मन में आता है वह है – भविष्य कथन , राशि फल , ग्रह शांति और उपाय |

तो क्या यही है ज्योतिष  ??

आइये क्रम से इस चर्चा को आगे बढ़ाएं |

भविष्य कथन :-

सबसे पहले बात भविष्य कथन की करते हैं | इसे आप एक उदहारण से समझिये :- जब आप बीमार होते हैं और आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर आपको यह नहीं बता पाता है कि  आप कब बीमार हुए थे या आगे कब बीमार होंगे ? इस ” कब” का जवाब देता है आपको ज्योतिष और यह जवाब देना भविष्य कथन नहीं कहा जायेगा बल्कि समय रहते प्रतिकूल परिस्थिति से निबटने हेतु तैयारी की शुरुआत करना कहा जायेगा | आपके जीवन में घटने वाली हर घटना कब घटित होगी इसका जवाब देता है ज्योतिष | जैसे कि कब होगी आपकी शादी , कब होगी संतान ,कब मिलेगी नौकरी आदि आदि | इसके साथ साथ अर्थात ” कब ” के साथ साथ ” कैसी ” और “कैसे ” इसका भी जवाब देता है ज्योतिष |

राशि फल :-

अब बात राशि फल की करते हैं | रोज दिन भिन्न भिन्न समाचारपत्रों में और दूरदर्शन द्वारा दिखाए जा रहे भिन्न भिन्न चैनलों के माध्यम से हम पढ़ते और देखते हैं  कि ” मेष राशि वालों के लिए आज का दिन सफलता को लेकर आने वाला होगा ‘ या मीन राशि वाले आज संभल कर रहे दुर्घटना हो सकती है ‘ या ‘ मिथुन राशि वालों के लिए यात्रा का उत्तम योग है ‘ आदि आदि | अब यह तो  आप सभी जानते हैं कि बारह राशियाँ हैं तो क्या संसार के सभी लोग बारह ही प्रकार के होंगे ? राशियों के आधार पर उन्हें बारह भागों में बाँटना कहाँ तक उचित है ??  समय रहते इस ठगी को पहचानिये | कुछ समय पहले देश के एक नामी पत्रकार ,जिन्हे कई पुरस्कारों से भी पुरस्कृत किया गया है, से मैंने यह चर्चा की और कहा कि क्यों करते हैं भिन्न भिन्न चैनल भ्रमात्मक प्रचार ?? उनका बड़ा ही ईमानदार जवाब आया कि ‘इससे उनकी भारी कमाई होती है’| मैं अवाक् हो गयी |

 इससे पहले  कि सबकुछ अंघेरे के हवाले हो जाये ,चेतिये | कार्ल पॉपर ने कहा है ”  knowledge at once is not by repeating known things but by refuting false dogmas “.

व्यवसायीकरण :-

ज्योतिष के व्यवसायीकरण किये जाने से कुछ ज्योतिष समूहों के द्वारा भी इस विधा को मज़ाक बना कर रख दिया गया है और उनके इस प्रयास को भिन्न भिन्न समाचारपत्रों ,न्यूज़ चैनलों द्वारा राशिफल के रूप में घर घर पहुँचाया जा रहा है | संसार के व्यक्तियों को बारह ही भाग में कैसे बाँट सकते हैं ?? चाहे प्रिंट मीडिया हो या न्यूज़ मीडिया या अन्य कोई भी सोशल मीडिया ये एक सशक्त माध्यम है संवाद का | इसके माध्यम से पैसों की खातिर फालतू बातों को ज्योतिष के नाम पर परोसा जाना बंद होना चाहिए | ऐसा लगता है की एक सुनियोजित चौतरफा साज़िश के तहत धीरे धीरे इस विधा को मारने कि प्रयास की जा रही है | ज्योतिष के सही स्वरुप को पहले खुद समझें और फिर लोगों से इसका परिचय करवाएं |ज्योतिष को लेकर यह जो अवधारणा है वह बदलनी ही चाहिए|

परिवर्तन से रूपांतरण

टॉलेमी ने द्वितीय शताब्दी  में कहा की ‘ सूर्य घूमता है पृथ्वी के चारो तरफ ‘ | सातवीं शताब्दी में कॉपरनिकस ने कहा की ‘ पृथ्वी ,सूर्य के चारो तरफ चक्कर लगाती है ‘ और यहाँ से सभी चीजें परिवर्तित होने लगी |

इसी तरह से ज्योतिष के बारे में जो गलत प्रचार किया जा रहा है राशि फल के माध्यम से, उसे सही रूप में लोगों के बीच लेकर जाने की जरूरत है |

राशि फल अगर बताना ही है तो सम्पूर्णता में बताएं | ज्योतिष कभी भी एकांगी दृष्टिकोण नहीं देता है | यह सम्पूर्णता और समग्रता में बात करता है | योग में बात करता है | यह निर्मित भी तो दो शब्दों के योग से ही हुआ है – ‘ज्योति’ और ‘ईश ‘ से मिलकर | ज्योति अर्थात अग्नि ,ऊर्जा ,ईश मतलब ‘पौरुष ‘, पुरुषार्थ | ऋग्वेद ‘अग्नि ‘,ऊर्जा ‘ की चर्चा विस्तार  से करता है |ऋग्वेद मूल रूप से अग्नि की व्याख्या करता ग्रन्थ है वहां ज्योतिष शब्द की चर्चा बरबस ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित करता है .ऋग्वेद ,ज्योतिष शब्द के माध्यम से ऊर्जा के सिद्धांत को समझाता है .. ” ऊर्जा का न तो सृजन होता है न विनाश बल्कि ऊर्जा का रूपांतरण होता है . परिवर्तन से रूपांतरण .

आज पूरा विज्ञान जगत ऊर्जा के इस सिद्धांत को मानता है | क्वांटम फिजिक्स तो डिम डिम घोष करते हुए कहता है की ‘ there is no matter . there is only energy . we are part of universal energy ‘.क्वांटम फिजिक्स जिस बात को आज कह रहा है ,ज्योतिष यही तो कह चुका है हज़ारों वर्ष पूर्व |

ज्योतिष जागरूकता अभियान

2 फरबरी 1835 को लार्ड मकौले ने, ब्रिटिश पार्लियामेंट में ,भारत के बारे में कहा ” we would   ever     conquer this country ,unless we break the very backbone of this nation ,which is her spiritual and cultural heritage and therefore ,I propose that we replace her old and ancient education system ..”

वर्तमान समय में भी तो यही किया जा रहा है . अपने ही देश में अंग्रेज नहीं बल्कि अपने ही लोगों द्वारा भारत की गौरवशाली संस्कृति को, ज्योतिषशास्त्र को , सुनियोजित तरीके से , चौतरफा साजिश करके मृत करने का पुरजोर प्रयास किया जा रहा है |

एक तरफ जहाँ अमेरिका ,जर्मनी जैसे विकसित देश अपने विश्वविद्यालयों में ज्योतिषशास्त्र की विधिवत पढाई करा रहे हैं वही अपने देश में इसे भविष्य कथन का माध्यम बना कर रख दिया गया है . रामचरितमानस , महाभारत , पुराण , सब के सब ज्योतिषशास्त्र की प्रयोगशाला हैं . वराहमिहिर ने जिन बातों की चर्चा की है ,उन्ही बातों की चर्चा cecils book of medicine , में की गयी है .जरूरत है  इन्हे वहां से निकाल कर जन जन के बीच लाने का .ज्योतिषशास्त्र , भविष्यकथन नहीं ,बल्कि व्यक्ति के आध्यात्मिक पुनरूत्थान की बिधा है .

आज ज्योतिषशास्त्र  केवल  भविष्य कथन का शास्त्र बनकर रह गया है . आने वाले समय में विश्व जब हमसे इस गरिमामयी शास्त्र के बारे में जानना चाहेगा तब हमारे पास क्या होगा उन्हें देने के लिए ? यह एक बरी बिडंबना होगी .अतः ज्ञान का भंडार जो भरा पड़ा है शास्त्रों में , ग्रंथों में , उपनिषदों में , जरूरत  है उन्हें जन जन तक पहुंचाने की |सब मिलकर आपस में सहयोग करें | चंद पैसों की खातिर अपनी आत्मा को न बेचें | खुद भी बचें और समाज को भी बचाएँ | पहले खुद परिवर्तित हों फिर समाज को परिवर्तित करें | तभी होगा परिवर्तन से रूपांतरण | आइये ज्योतिष जागरूकता अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज करायें और  इस शास्त्र को पुनर्जीवित करने हेतु कृतसंकल्प हो . इस विद्या को बाजार से निकाल कर ,व्यापार  से अलग कर के , आध्यात्मिक पुनरुथ्थान की विधा बनाये . पुस्तकों  में छिपे हुए इस ज्ञान को, जो की मृतप्राय हो चुकी है ,उसे फिर से भारत के भाल पर मुकुट की तरह स्थापित कर सके |

 

भारतीय दर्शन और नोबेल पुरस्कार :-

साल 1906 में जब j j thompson ने कहा की “electrons are particles ” , तब उन्हें इस शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला | तीस साल बाद उनके ही बेटे ने शोध किया और कहा की ” electrons are waves ” , उन्हें भी नोबेल पुरस्कार मिला |उसके बाद एक वैज्ञानिक एर्विन ने कहा ” electrons are wavicles “, अर्थात wave भी और  particle भी , उन्हें भी नोबेल पुरस्कार मिला |आगे चलकर हैइज़ेनबर्ग ने कहा ” no body can know what exactly an electron is . Everything is uncertain in this world ” इसे uncertainty principle के रूप में जाना गया और इन्हे भी नोबेल पुरस्कार मिला .इन्होने एक बात स्वीकारी की अपने इस शोध को करने की प्रेरणे मुझे indian philosophy के अद्वैत सिद्धांत से मिला |

ज्योतिषीय शोध (एस्ट्रोलॉजिकल रिसर्च) :-

मेरा आपको ये सब लिखने का मकसद सिर्फ इतना है कि मैं भी एक शोधार्थी हूँ और एस्ट्रोलॉजिकल रिसर्च द्वारा प्रकृति के रहस्यों को समझने का एक प्रयास कर रही हूँ |शोध के जरिये प्रकृति के रूप को नहीं बल्कि स्वरुप को समझने का प्रयास कर रही हूँ |हमारे समाज से लुप्त होती जा रही इस विधा को फिर से प्रकट करने में आपके सहयोग की जरूरत है |

सहयोग सिर्फ इतना कि तथ्य को स्वीकारिये और भ्रम को सिरे से नकारिये|

चंद पैसों की खातिर अपनी आत्मा को मत बेचिए|

एक स्वस्थ समाज का निर्माण कीजिये |

@ B Krishna Narayan

YouTube Channel :- ASTRO TALK

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