नकारात्मकता से बाहर आना चाहते हैं तो इसे जानिये

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तेज रफ़्तार जिंदगी , फटाफट सब कुछ पा लेने की चाहत ने आज सभी को अपने चपेट में ले रखा है |नतीजा असंतुलन | मानसिक असंतुलन , व्यावसायिक असंतुलन , सामाजिक असंतुलन ,भावनात्मक असंतुलन आदि आदि |इन सब की वजह से धीरे धीरे नकारात्मकता अपना पांव पसारने लगता है और व्यक्ति कब उसकी चपेट में चला जाता है वह स्वयं भी नहीं समझ  पाता और जब समझ में आता है तब तक बड़ी देर हो चुकी होती है | नकारात्मकता के चक्रव्यूह में उलझा व्यक्ति फिर तनाव  ग्रस्त होने लगता है और अवसाद में चला जाता है | आज हम इसी नकारात्मकता के बारे में जानेंगे ज्योतिष से की क्या कहता है ज्योतिष इसके बारे में और इससे बाहर आने का उपाय क्या है ?

ज्योतिष से :-

सम्बंधित ग्रह

वैसे तो कोई भी ग्रह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं होता है | ग्रहों का सकारात्मक या नकारात्मक होना निर्भर करता है कुंडली के अन्य ग्रहों के साथ और अन्य राशियों और भाव के साथ उसके सम्बन्ध पर |लेकिन ज्योतिष के अनुसार कुछ ग्रहों कि कुंडली में बिगड़ी हुई स्थिति नकारात्मकता को ट्रिगर करने वाले होते हैं | ये ग्रह हैं चंद्र , बुध ,राहु ,केतु | इसके अलावा शनि राहु का साथ और गुरु शुक्र का साथ कुंडली में अगर अशुभ प्रभाव में है तो इस तरह के विचारों  को बढ़ाने वाला होता है | राहु और केतु धुआं और भ्रम पैदा करने वाले कहे जाते हैं | धुआं आपको किसी भी चीज को स्पष्टता में नहीं देखने देता है |पर हर सिक्के के दो पहलू होते हैं | उसी तरह यहाँ भी इसका दूसरा पहलू यह है कि जहाँ धुआं है वही आग भी मिलेगा |तो ऊर्जा का भंडार कहाँ है इसका मार्गदर्शन हमें इन दोनों ग्रहों से मिलेगा |

उसी प्रकार गुरु और शुक्र का साथ यदि अशुभ प्रभाव में हैं तो अहंकार कि वजह से चीजों कि स्पष्टता नहीं हो पाती है | गुरु – देवगुरु, देव पुरोहित और शुक्र असुरों के गुरु हैं | शुक्र से बड़ा राजनीति का जानकार कोई नहीं तो गुरु न्यायविद और डिप्लोमैट है |इन दोनों कि स्थिति अगर बिगड़ी हुई है तो अहं कि तुष्टि नहीं होना वजह बन जाता है निराशा का |

सम्बंधित राशि :-

ग्रहों के साथ साथ ज्योतिष कुछ राशिओं कि चर्चा भी करता है जो कि नकारात्मक विचारों को ट्रिगर करने वाले होते हैं | ऐसा नहीं कि इन राशि के प्रभाव वाले व्यक्ति नकारात्मक ही होंगे | इसका अर्थ यह है कि अन्य राशिओं के अलावा इन राशियों के व्यक्ति जल्दी नकारात्मक विचारों के संवाहक बन जाते हैं |ये रशियन हैं – कर्क ,वृश्चिक , मीन ,मकर और कुम्भ | तीनो जलीय राशि है यहाँ कर्क ,वृश्चिक और मीन | भावनात्मक कमजोरी वजह बन जाती है नकारात्मकता का |

इन सबके अलावा कुंडली में बनने वाले योग और दशा को जब तक नहीं मिलकर देखेँगे तबतक स्थिति का सही विश्लेषण नहीं कर पाएंगे | उदहारण के लिए मेष लग्न कि कुंडली में अष्टम भाव में वृश्चिक राशि में अगर मंगल बैठा हो बुध के साथ तो सामान्यतः यह कहा जाएगा कि स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा खासकर जब इस भाव से सम्बंधित दशा भी चल रही हो |आत्महत्या कि प्रवृति को बढ़ावा देने वाला हो सकता है | लेकिन यहाँ यही मंगल बुध के साथ मिलकर जो योग बना रहा है वह है कि ऐसा व्यक्ति गणित में बेहद रूचि रखने वाला होगा | तो समय रहते अगर अपने बच्चे कि कुंडली में आपने यह योग पहचान लिया और सम्बंधित दशा को भी जान लिया तो विषय के चयन में आप बच्चें का सही मार्गदर्शन कर सकते हैं |ऐसा व्यक्ति बात को तब तक नहीं स्वीकार करता जब तक कि बात के तह तक नहीं पहुँच जाए |

अष्टम में मंगल वाला व्यक्ति मजबूत इच्छाशक्ति वाला होता है |

कॉर्पोरेट जगत में नौकरी करता है खासकर वैसी नौकरी जहाँ पैसे को लेन देन को देखना शामिल हो |

इस प्रकार से जब हम चीजों को देखना सीख जाएंगे तो हम यह समझ पाएंगे कि नकारात्मकता कि वजह क्या है |और जैसे ही यह समझ में आ जायेगा नकारात्मकता से हमारा पीछा छूटना शुरू हो जायेगा |

सही समय पर इच्छा पूरी नहीं होती तो आप निराशा से भरने लगते हैं |नकारात्मक विचार हावी होने लगता है | नकारात्मकता को समाप्त करना है ऐसा प्रयास न करें बल्कि इसे संतुलित करने को प्रयास करें | जैसे पंचभूतों से मिलकर हम बने हैं वैसे ही सकारात्मकता और नारात्मकता के सम्यक संतुलन से हम निर्मित हुए हैं |

इसे संतुलित करने हेतु करें यह उपाय :-

 

 1 – ॐ को जाप करें

2 – शिव आराधना करें

3 – ध्यान करें

4 – नियमित व्यायाम करें

5 – मुस्कुराहट को अपना संगी बनाएं

6 – साँझा करना सीखें

7 –खुद को मजबूत बनाएं

 

इसके नियमित अभ्यास से ख़ुशी को साथ पाएं ,नकारात्मकता को दूर भगाएं |

 

@ B Krishna Narayan

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