ग्रहों की बदलती चाल और भारतवर्ष

  ut jammu      

आज समाचारपत्र के एक खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा | वह समाचार है श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए राजपक्षे का निर्वाचित घोषित होना |विगत दिनों भी एक खबर ने मेरा ध्यान अपनी पर खींचा था और वह खबर है , भारत सरकार द्वारा नया आधिकारिक मानचित्र जारी किये जाने की खबर | इस मानचित्र में मुज़फ़्फ़राबाद को जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शामिल दिखाया गया है | क्या मायने है इन ख़बरों के ?? बात पहली खबर श्रीलंका के राष्ट्रपति की | नव निर्वाचित राष्ट्रपति का चीन के प्रति झुकाव ,भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है | भारत को पाकिस्तान ,चीन के साथ साथ श्रीलंका की गतिविधियों पर भी गिद्ध दृष्टि रखनी होगी | दूसरी खबर भारत के नए आधिकारिक मानचित्र की है | इसके माध्यम से बहुत बड़ा संकेत सरकार ने दिया  है |मुज़फ़्फ़राबाद को भारत के नक़्शे में दिखाकर  सरकार ने आक्रामक उद्घोषणा की है |

इन दो खबरों को ध्यान में रखते हुए आइये देखें भारत के लिए ज्योतिषीय संकेत क्या हैं ??

भारत वर्ष की दशा अभी चंद्र / गुरु / राहु की है जो कि आनेवाले पांच दिसम्बर से बदलकर चंद्र /शनि /शनि की हो जाएगी |

भारत कि कुंडली में इन ग्रहों कि जो स्थिति है ,साथ ही साथ गोचरीय ग्रहों कि जो स्थिति है उसके अनुसार ,इक्कीस नवंबर को मंगल के स्वाति नक्षत्र में प्रवेश के बाद भारत के लिए सीमा पर ही नहीं बल्कि देश के भीतर भी आक्रमण की स्थिति तैयार होनी शुरू हो जाएगी | इक्कीस नवंबर से दो दिसम्बर के बीच इसकी भूमिका तैयार होगी | सरभतोभद्र(sarbhatobhadra chakra ) चक्र से इस समय मकर राशि और वृषभ राशि दोनों का वेध मंगल से होगा और जन्म तिथि बृहस्पति का वेध शनि और केतु से होगा |

स्थिति में आक्रामकता आनी शुरू होगी मार्च 2020  से जब मंगल ,गुरु ,केतु और शनि के द्वारा वृषभ और मकर राशि का वेध होगा और राहु के द्वारा जन्म दिन का वेध होगा | देश के भीतर संरचनात्मक ढांचों पर प्रहार की प्रक्रिया शुरू होगी | देश के बुनियादी ढांचा ( infrastructure ) को कमजोर करने की साजिश तेज होती हुई |यह वह समय होगा जब देश को सिर्फ सीमा पर ही नहीं वरन देश के भीतर भी युद्ध लड़ना होगा |देश की सीमा पर तो भारत की सेना पूर्ण सशक्तता के साथ लड़ लेगी |लेकिन देश के भीतर इससे निपटना सरकार के लिए चुनौती  भरा होगा |एक ही साथ सीमा पर और अंदर की स्थिति से बचाकर सबको सुरक्षित निकल कर ले आना , सरकार के लिए कोई आसान काम नहीं होगा |

इसे और हवा तब मिलेगी जब भारत  की दशा मई 2020 से बदलकर चंद्र / शनि /केतु की हो जायेगी |

जन्म कुंडली में केतु का सप्तम भाव में होना , नवांश कुंडली एवं दशमांश कुंडली में छठे भाव में होना ( गौरतलब बात यह की दशमांश कुंडली में छठे भाव में मंगल के साथ होना ,सरकार की तरफ से आक्रामक रूख अपनाये जाने का संकेत मिलता है ) |चतुर्थांश  कुंडली में केतु का चतुर्थ भाव में होकर वैसे अष्टमेश से दृष्ट होना जो की षष्ठेश और सप्तमेश से दृष्ट हो , पूरी कहानी को बयां कर देते हैं |जब ऐसी दशा चल रही हो तब  जून में और इक्कीस जून से बदलने वाले पक्ष की कुंडली और जून में ही गुरु ,शनि ,राहु ,केतु के द्वारा मकर राशि और वृषभ राशि का वेध और मंगल द्वारा जन्म दिन का वेध  धार्मिक उन्माद का संकेत तो देते ही हैं, साथ ही साथ इन ग्रहों के माध्यम से यह संकेत देते हैं की भारतवर्ष के लिए आनेवाला वर्ष रक्तिम होने वाला है |भारत द्वारा अपने छीने गए भू भाग को वापस लेने की प्रक्रिया शांति पूर्ण तो नहीं होगी यह सब जानते हैं पर देश के भीतर और बाहर जिस भयावहता का संकेत ग्रह दे रहे हैं वैसे में ईश्वर से यही प्रार्थना की अपना आशीर्वाद बनाये रखें |

@ B Krishna Narayan

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