सूर्य उपासना

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सूर्य उपासना

 

सूर्य उपासना का महापर्व है छठ | सवाल है की सूर्य की उपासना क्यों ? आइये जाने सूर्य के लिए उपनिषद क्या कहते हैं –

कठोपनिषद के अनुसार :-

“सूर्यो यथा सर्वलोकस्य चक्षु

र्न  लिप्यते चाक्षुषैर्बाह्यदोषैः |

एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा

न लिप्यते लोकदुःखेन बाह्य ||”

 

एक ही सूर्य सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करता है | उसका प्रकाश प्राणिमात्र की आँखों का सहायक है | उस प्रकाश की सहायता लेकर लोग नाना प्रकार के गुणदोषमय कर्म करते हैं ,परन्तु सूर्य उनके नेत्रों द्वारा किये जाने  वाले नाना प्रकार के बाह्य कर्मरूप दोषों में तनिक भी लिप्त नहीं होता है |सब में  रहते हुए भी पृथक और सर्वथा असंग है |

जीवन को कैसे जिया जाये इसको लेकर बहुत बड़ा सूत्र पकड़ाता है सूर्य |सबके साथ रहके भी असंग रहने की कला जो सीख जाये उसका जीवन तो आनंदमय हो जायेगा |

प्रश्नोपनिषद के अनुसार :-

 

सूर्य और अग्नि जो बाहरी तेज अर्थात उष्णत्व है ,वही उदान वायु का बाह्य स्वरुप है |वह शरीर के बाहरी अंग प्रत्यंगों को ठंढा नहीं होने देता है और शरीर के भीतर की ऊष्मा को भी स्थिर रखता है |सूर्य ही सबका मुख्य प्राण है |यह मुख्य प्राण सूर्य ,से उदय होकर इस शरीर के बाह्य अंग प्रत्यंगों को पुष्ट करता है और नेत्र को देखने की शक्ति प्रदान करता है |

जगत में उष्णता और प्रकाश फैलाना ,सबको जीवन प्रदान करना ऋतुओं का परिवर्तन करना आदि हमारे नाना प्रकार की आवश्यकताओं को पूर्ण करता हुआ सम्पूर्ण सृष्टि का जीवनदाता प्राण ही सूर्य के रूप में उदित होता है |

प्राणियों के शरीर में जो जठराग्नि है जिससे अन्न का पाचन होता है वह सूर्य का ही अंश है |

जिन्दा रहने के लिए ,निरोग रहने के लिए ,देखने के लिए ,सूर्य की उपस्थिति जरूरी है इसका भान करता है यह सूत्र हमें |अपने प्रकाश से हर प्राणी को बगैर भेद भाव के स्फूर्ति देता है सूर्य | कितना बड़ा पाठ पढ़ा जाता है यह सूर्य |

आइये सूर्य उपासना करें | सब मिलकर सूर्य देव का आशीर्वाद ले | जीवन को गति दें |

@ B Krishna Narayan

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