छठ + ज्योतिष

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                                                           छठ + ज्योतिष

श्रद्धा और आस्था का महापर्व छठ | कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होकर शुक्ल सप्तमी तक चार दिनों तक चलने वाला महापर्व है यह | ज्योतिष के अनुसार  सूर्य जब अपनी नीच राशि ,तुला राशि में गोचर कर रहा होता है तब यह पर्व मनाया जाता है |सूर्य के नीच राशि में गोचर के समय इस महापर्व का मनाना ,बहुत बड़ा संकेत है यहाँ | तुला अर्थात तराजू – संतुलन का प्रतीक है तराजू | घर -परिवार में ,समाज में कैसे संतुलन बना रहे यह सीख देता है छठ पूजा |समाज को एक सूत्र में बांधने का सूत्र पकड़ाता है यह पर्व | इस समय के सूर्य में ताप काम होता है | कहने का तात्पर्य यह की जब ताप कम हो ,गर्मी कम हो ,उष्णता कम हो तभी हम दूसरों के साथ ताल मेल बैठा सकते हैं | मिल जुल सकते हैं | संस्कृति और संस्कारों का संरक्षण करके जीवन को गति प्रदान करनेवाला व्रत है यह |

 

पहला अर्घ्य ,साँझ का अर्घ्य डूबते सूरज को देकर कुल के बुजुर्गों के प्रति अपना समर्पण भाव प्रकट किया जाता है | दूसरा अर्घ्य उगते सूरज को देकर वंश  वृद्धि की प्रार्थना की जाती है सूर्यदेव का आशीर्वाद लिया जाता है | श्रद्धा ,समर्पण ,दृढ संकल्प का पर्व है यह | तप है यह |चार दिनों का तप ,नियम और संयम है यह | नियम और संयम की धारणा है छठ | धारण करने के लिए अभ्यास की जरूरत होती है और यह अभ्यास हमसे करवाता है छठ || बुजुर्गों और बच्चों के बीच का संतुलन सिखाता है यह पर्व |

 

इस पूजा में सूर्य की महत्ता है | आरोग्य देने वाले हैं सूर्य |इस समय के सूर्य को हम निहार भी सकते हैं |इससे जुड़ सकते हैं |इस समय इनसे हम निरोगी काया करने की विनती करते हैं |

जहाँ एक तरफ हम सूर्यदेव से निरोगी काया की विनती करते हैं वहीँ दूसरी तरफ हम स्वस्थ संतान देने की भी प्रार्थना करते हैं |

सूर्य देव से हम विनती करते हैं , उनसे मांगते हैं ,उन्हें अपने घर बुलाते हैं और सूर्यदेव तथास्तु कह के हमें कृतार्थ करते हैं | यह तभी संभव है जब सूर्य का ताप कम हो ,क्योंकि ताप वाला सूर्य तो हमें जलाता है |अहंकार का प्रतीक है ऐसा सूर्य |इसके विपरीत इस समय का सूर्य का हमें सामीप्य मिलता है |हम सूर्य को निहारते हैं ,उससे बाते करते हैं |

ज्योतिष की शुरुआत ही होती है ‘ज्योति’ से | ‘ज्योति’ मतलब प्रकाश ,अग्नि | तो इस प्रकार यह सीधा सीधा सम्बन्ध बनता है सूर्य से | भीतर के ताप का बाह्य ताप से जुड़ाव का समय है यह |शरीर के भीतर सूर्य का प्रकृति के सूर्य से जुड़ाव कैसे हो इसको बतलाता है यह पर्व | प्रकृति से हैं हम  ,प्रकृति के हैं हम यह बतलाता है यह पर्व |

ज्योति का एक अर्थ चक्षु भी | वहीँ सूर्य नेत्र का द्योतक है | हम द्रष्टा कैसे बने इसका पूरा विधान बतलाने वाला पर्व है छठ |

आईये हम सब  सूर्य देव का आशीर्वाद लें और प्रकृति के हो जाएँ |

@B Krishna Narayan

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