Kaal Sarpa Dosh

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काल सर्प दोष को लेकर सोच बदलें

राहु और केतु से मिलकर बना काल सर्प | अगर किसी ने आपको बता दिया की आपकी कुंडली में काल सर्प दोष है तब आपको तो ये जिंदगी बोझिल लगने लगती है | आपको बताया जाता है की आपने किसी जन्म में साँपों को मारा है जिसकी वजह से आपकी कुंडली में काल सर्प दोष है |इसका निवारण शीघ्र अतिशीघ्र करवा लें अन्यथा बहुत बड़ी परेशानी में फंसेंगे आप |हर वक़्त ये बात परेशान करती है की कैसे कटेगी अब ये जिंदगी | सब कुछ तबाह होने वाला है |हर वक़्त नकारात्मक सोच की वजह से आपका स्वभाव इतना परिवर्तित होने लगता है की आपके आस पास के लोग भी इससे प्रभावित होने लगते हैं . आइये आज विस्तार से जाने की क्या है काल सर्प दोष ?? काल सर्प दोष है या काल सर्प योग है ?

सातों ग्रह सूर्य ,चंद्र ,मंगल ,बुध ,गुरु ,शुक्र और शनि जब राहु केतु अक्ष में आ जाते हैं तो काल सर्पयोग ,काल सर्पदोष बनता है .ज्योतिष को सिर्फ भविष्य कथन का माध्यम बनाने वाले उपायाचार्यों के बीच अभी भी काल सर्प योग की शुरुआत राहु से करनी है या केतु से इसमें मतैक्यता नहीं है |

दो शब्दों से मिलकर बना है काल सर्प |काल और सर्प |अब यहाँ काल का अर्थ क्या है पहले तो ये जाने क्योकि काल शब्द सुनते ही आपको यह लगने लगता है की अब तो मृत्यु समीप है | तो सबसे पहले इस धारणा को बदलिए |काल का सीधा सीधा अर्थ है समय | अब चलिए देखा जाये दूसरे शब्द ‘ सर्प’ को |

सर्प ,सांप :-
सांप (ब्रह्मा विष्णु और शिव के माध्यम से सांप को समझें | सांप भी काल का ही प्रतीक है जो ब्रह्मा जी द्वारा रचा जाता है .विष्णु भगवान जिसकी शय्या बनाते हैं और शिव इसे अपने गले में आभूषण की तरह सजाते हैं . )
यही सांप हमें सिर्फ विष वमन करना और डसना नही सिखाता हैबल्कि ,हमें जीवन जीने की कला भी सिखाता है|अब तक जिया गया जीवन जब भार लगने लगता है तब यह उन सारे भार को सिरे से उतार फेंकता है केंचुल के रूप में और भारमुक्त होकर आगे की यात्रा करता है हालांकि यह प्रक्रिया इतना आसान नहीं होता कष्टप्रद होता है लेकिन फिर भी आगे की यात्रा कष्टमुक्त होकर जारी रखने के लिए यह सहता है उस कष्ट को | कालक्रम में सीखना है सांप से कष्टमुक्त होने की प्रक्रिया |कालमुक्त कैसे हुआ जाए यह सीखना है सांप से |

तो कहिये अब बदलने लगी आपकी सोच काल सर्प को लेकर |

दो शब्दों से मिलकर बना है इसलिए योग है .

बात जहाँ तक दोष की है तो आगे बढ़ने से पहले एक बात बताइये पूरे विश्व में ऐसे बहुत से जगह हैं जहाँ आप स्नैक्स मंगाते हैं और स्नेक्स ( सांप ) परोसा जाता है तो वहां के लोगों की तो पीढ़ी दर पीढ़ी इस दोष से पीड़ित होए चाहिए ? ये लोग तो हर रोज भोजन के लिए सांप को मारते हैं |
ये तो जब ज्योतिष का व्यवसायीकरण किया जा रहा था तब लोगों को कैसे मनोवैज्ञानिक रूप से लपेटे में लेकर खुद की दूकानदारी चलायी जाए ,इसके ऊपर सारा ध्यान दिया |तब इनलोगों ने एक दो नहीं बल्कि पूरे बारह प्रकार के काल सर्प दोष बनाये और जिस भाव से यह जुड़ा उस भाव के कारकत्वों की हानि बता दी | ये तो गनीमत है की कुंडली में बारह ही भाव होते हैं इसलिए ये बारह प्रकार पर रूक गए वर्ना तो पता नहीं और भी क्या क्या प्रकार बनाते |कोई आश्चर्य की बात नहीं की आने वाले समय में इसमें इनलोगों द्वारा सूर्य और चन्द्रमा से बनने वाले काल सर्प दोष को जोड़ कर इसे सबसे भयंकर कष्ट देने वाला बता दिया जाये |

हाँ वैसे कुंडली में बाकी ग्रहों की तरह राहु और केतु कुंडली में कहाँ बैठे हैं ,किसके साथ बैठे हैं ,किसकी प्रभाव में हैं के अलावा जो ध्यान देने वाली बात जो है वह ये की ये दोनों जिसकी राशि में बैठे हैं वह कहाँ बैठा है ,किसके साथ बैठा है और कैसे प्रभाव में है .शुभ भाव में शुभ ग्रहों का सम्बन्ध तो शुभ फल | और अशुभ भाव में अशुभ ग्रहों का साथ तो अशुभ फल देने वाला होता है |बिलकुल वैसे ही जैसे की अन्य ग्रह देते हैं |
तो देखा आपने अन्य ग्रहों की तरह ही ये भी हैं |काल सर्प ,समय की गति को बताने वाले हैं न की मृत्यु का सामीप्य देने वाले |डरने वाली कोई बात नहीं है |

भगवान विष्णु जब इसका बिछावन ही बना लेते हैं और शांत भाव से इसपर लेटे रहते हैं तो फिर हमें क्या डर ? अगर फिर भी भय लगे तो विष्णुसहस्रनाम का नियमित पाठ कीजिये |

भगवान शिव इसे गले में आभूषण की तरह दर्जन करते हैं तो फिर क्या डर | शिव आराधना कीजिये |

सोच बदलिए |सम्पूर्णता और समग्रता में देखना शुरू कीजिये | गूढ़ अर्थों को समझिए | विष्णु और शिव को भजिये और भय मुक्त हो जाईए | ये जीवन अनमोल है ,इसे ऐसे ही व्यर्थ की बातों में न गवाईऐ |आनंद में रहिए |
@B Krishna Narayan
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