Mental Depression + Astrology

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मानसिक अवसाद :- कारण और निदान ( ज्योतिष से )

मानसिक अवसाद ,यह एक विश्वव्यापी रोग बन गया है .क्या ही बच्चे ,युवा,बूढ़े ,पुरुष और क्या ही हर तबके की स्त्रियाँ ,सभी इससे ग्रस्त हैं .व्यक्ति की जीवन शैली ऐसी हो चुकी है की उसमे हल्का सा व्यवधान उन्हें परेशान कर देता है .उनके आराम में हलकी सी खलल उनके व्यवहार में असामान्य सा परिवर्तन ला देता है .आश्चर्य हुआ हमें जब कल अपने ही पड़ोस के एक सात साल के बच्चे ने कहा की पढाई को लेकर वह डिप्रेस्ड है .मैंने पूछा की आपको पता है डिप्रेशन क्या होता है ? उसने कहा की हाँ सब पता है .मैंने नेट से खोज कर सब पता कर लिया है .मैंने कहा कि अच्छा ! क्या पता किया है ?तब उसने कहा कि जब पढाई में मन न लगे और सब कुछ छोड़ के भाग जाने का मन करे तब इसका मतलब कि आप डिप्रेशन में हैं .इतने छोटे बच्चे का अवसाद ग्रस्त होना ,समाज किस ओर जा रहा है ,इसको भली भांति समझाता है .योग ,मैडिटेशन को एक तरफ जीवन का हिस्सा बनाया जा रहा है वहीँ दूसरी तरफ मानसिक अवसाद से पीड़ित लोगों कि तादाद में बढ़ोतरी स्थिति पर पुनर्विचार करने कि सलाह देती है कि क्यों योग और मैडिटेशन के बावजूद लोग अवसाद से ग्रसित होते जा रहे हैं .

अवसाद कि परिभाषा है :-
” अवसाद एक ऐसी मानसिक स्थिति या स्थायी मानसिक विकार है जिसमे व्यक्ति को उदासी ,अकेलापन ,निराशा ,और आत्म प्रतारणा महसूस होती है .”

इसके लक्षण :-
समाज से कटना,
नींद का या तो बिलकुल नहीं आना या खूब आना ,
स्वाभाव में परिवर्तन
भूख या तो न लग्न या बहुत अधिक लगना
गुस्से कि मनःस्थिति
इतना ज्यादा निराशा का हावी हो जाना कि आत्महत्या तक करने कि अच्छा होने लगे .
ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो.

आइये जाने इसका ज्योतिषीय कारण और निदान :-

सर्वाधिक महत्वपूर्ण है लग्न,लग्नेश ,चन्द्रमा और बुध ,पंचम भाव और पंचमेश तथा बृहस्पति .

व्यक्ति कि कुंडली में :-

सबसे पहले लग्न और लग्नेश कि स्थिति को देखें .

इसके बाद मन के कारक चन्द्रमा कि स्थिति को देखें .

बुद्धि के कारक बुध कि स्थिति को देखें

मानसिक स्थिति को समझने के लिए पंचम भाव और पंचमेश को देखें .

पंचम भाव के कiरक बृहस्पति कि स्थिति को देखें .

इन सब कि स्थिति का आकलन भिन्न भिन्न ग्रहो के साथ इनकी युति और दृष्टि को लेकर किया जाता है .शुभ ग्रह के साथ है और शुभ ग्रहों से दृष्ट है तो स्थिति अच्छी है लेकिन अगर अशुभ ग्रहों के साथ है और अशुभ ग्रहों से दृष्ट है तो अवसाद ग्रसित होने कि सम्भावना बढ़ जाती है.
चन्द्रमा और बुध कुंडली के छठे ,आठवें या बारहवे भाव में यदि अशुभ ग्रहों जैसे शनि और मंगल के साथ हैं तो अवसाद कि स्थिति को ट्रिगर करने वाले हो जाते हैं .

इन दोनों कि स्थिति कर्क राशि में 10* से 30* के बीच , वृश्चिक राशि में ०* से 20* के बीच ,मीन राशि में 20* से 3०* के बीच ,वृषभ ,सिंह ,कुम्भ राशि में ०* से 1०* के बीच ,तुला राशि में 1०* से 20* के बीच और मकर राशि में ०* से 10* तथा 2०* से 3०* के बीच नहीं होनी चाहिए
.
ये दोनों ग्रह यदि मीन राशि में हैं और 26*4०’ से 3०*:००’ के बीच में हैं तो यह स्थिति सबसे भयंकर है . भावनात्मक रूप से कमजोर बनाती हैं ये.

चन्द्रमा केमद्रुम योग में न हो और न ही राहु केतु अक्ष में हो.

मानसिक रूप से व्यक्ति कि मजबूती या कमजोरी का आकलन पंचम और पंचमेश से किया जाता है . ये दोनों अगर अशुभ ग्रहों के साथ हैं जा दृष्ट हैं , पाप कर्तरी में हैं या राहु ,केतु अक्ष में हैं तो अवसाद कि स्थिति बनाते हैं .इनके साथ अगर करक बृहस्पति भी कमजोर है तो स्थिति को और भयावह कर देते हैं .

इसके बाद व्यक्ति के जीवन में चलने वाली दशाओं को देखें .अगर दशाओं का सम्बन्ध योगों के साथ हो जाए मतलब कि 6/8/12 भाव कि दशा ,चंद्र /बुध कि दशा या इनसे सम्बन्ध बनाने वाले ग्रहों कि दशा तो व्यक्ति को सचेत हो जाना चाहिए .परेशानी और अवसाद कि स्थिति को पहले से जान लेंगे तो समय रहते बचावकारी उपाय किये जा सकते हैं और बहुत बड़ी समस्या से निजात पा सकते हैं .जीवन को खुशमय बना सकते हैं .

कभी कभी हम देखते हैं कि बिना किसी कारण के हम दो तीन दिनों के लिए बहुत ज्यादा अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं .फिर से तीन दिनों बाद एकदम से सामान्य हो जाते हैं मानो कुछ हुआ ही न हो .ऐसे समय में आप अपनी कुंडली को देखिये .आपके जन्मकालीन शनि के ऊपर से चन्द्रमा का गोचर हो रहा होगा . चन्द्रमा जैसे ही शनि से आगे कि राशि में जायेगा स्थिति एकदम सामान्य हो जाएगी .

लेकिन कभी कभी यह स्थिति लम्बी चलती है .ऐसा होता है उस समय चलने वाली दशा कि वजह से .

ऊपर वर्णित योग और दशा के साथ यदि द्वितीय और द्वितीयेश शामिल हो जाए मतलब पारिवारिक कलह ,खुद कि वाणी और अर्थ के कारण अवसाद कि स्थिति बनेगी .

इसके साथ यदि दशम /दशमेश शामिल हो जाए मतलब व्यवसाय कि वजह से मानसिक अवसाद होगा .

छठे बह्व का सम्बन्ध हो जाए तो रोग और शत्रु कि वजह से मानसिक अवसाद होगा .

सातवां भाव और भावेश शामिल हो जाएँ तो शादी वजह बनेगी अवसाद की.

इस प्रकार से हम हर भाव /भावेश का सूक्ष्म अवलोकन कर के मानसिक अवसाद के कारण को भलीभांति जान सकते हैं और समय रहते सुरक्षा कवच तैयार करके इससे अपना बचाव कर सकते हैं .

उपाय :-
ॐ का जाप करें
गायत्री मंत्र का पाठ करें
और सबसे जरुरी – बंद कमरे से बाहर निकले .आभासी दुनिया से बाहर आएं .प्रकृति से जुड़ें .

जिस दिन हम आप सब इतना करने लगेंगे कि अपनी कुंडली को देखें ,योग और दशा को देखें और उसके अनुसार पाठ शुरू कर लें ,प्रकृति से जुड़ जाएँ तो समूल समाप्त हो जायेगी यह मानसिक अवसाद की वैश्विक समस्या .आनंद की स्थिति व्याप्त हो जाएगी .

@ B Krishna Narayan
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