Rainfall and Astrology

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बारिश ,ज्योतिष की नजर से…

(26 मई और 4 जून को लिखा आज एक बार फिर विस्तार से आप सभी के साथ साँझा कर रही हूँ )

पानी की बढ़ती जा रही समस्या .. कारण क्या ??

इस बार मानसून के देर से आने का कारण क्या ??

जरूरत है हर एक को खुद से यह सवाल पूछने का..

एक तरफ जंगलों का सफाया, तालाबों और पोखरों को खत्म करना ,धरती में रासायनिक जहर मिलाना..इन सभी पर अगर अभी विचार नही किया तो एक ऐसे कैंसर ग्रस्त समाज का निर्माण होगा जिसके लिए हम अपने आप को कभी माफ नही कर पाएंगे।

भारत में बारिश में होने वाले बारिश की कुल 70% बारिश जून से सितम्बर के महीने मानसून सीजन में होती है . इसे साउथ वेस्ट मानसून के नाम से जाना जाता है .

मौसम और मनुष्य के बीच की समझ है ज्योतिष . ग्रह ,नक्षत्र ,तिथि के अनुसार बनने वाले योग जिसमे जन जन का कल्याण हो ऐसे नियमो का विधान है ज्योतिष .

आर्द्रा नक्षत्र से स्वाति नक्षत्र तक सूर्य का गोचर मानसून का समय कहा जाता है . भारत एक कृषि प्रधान देश है .किसान पुरे साल मानसून का इंतज़ार करते हैं और अच्छे बारिश की उम्मीद में रहते हैं .कैसा होगा 2019 का मानसून ?

आइये किसानो के बीच चलें और मानसून / बारिश की चर्चा करें ज्योतिष शास्त्र के अनुसार

” आगे मंगल पीछे भान , वर्षा होये ओस समान ”

अर्थात जिस मानसून में मंगल आगे और सूर्य पीछे रहे तो कम बारिश की स्थिति बनती है .

2019 में सितम्बर के पहले सप्ताह तक सूर्य मंगल के पीछे है .

पूर्व असाढ़ नक्षत्र में अशुभ ग्रहों की युती काम बारिश या न के बराबर बारिश की स्थिति बनता है .

मानसून के समय शनि और केतु का पूर्व असाढ़ नक्षत्र में होना बारिश को लेकर अच्छी स्थिति नहीं बना रहे हैं .

ज्येष्ठ महीना ,आषाढ़ ,सावन और भादो का महीना , इस महीने में सूर्य के साथ साथ शुक्र , बुध ,चंद्र और मंगल के गोचर की स्थिति का अध्ययन करके बारिश कब ..इसके बारे में हम सटीक आकलन कर सकते हैं

असाढो पुणो दिना गाज बीज बसंत

नासै लक्षण काल का आनंद माने संत

अर्थात आषाढ़ मास की पूर्णिमा को यदि आकाश में बदल गरजे और बिजली चमके तो वर्षा अधिक होगी और अकाल समाप्त हो जाएगा .

“रोहिणी बरसे मृग तापे कुछ दिन आद्रा जाए

कहे घाघ सुनु घाघिनि स्वान भट नहीं खाये ”

ग्रहों और नक्षत्रों के योग से अच्छी बारिश और अच्छे पैदावार का संकेत

इसी तरह यदि सावन के महीने में पुरवा हवा बहे और भादो के महीने में पछुआ हवा तो भीषण अकाल की स्थिति बनेगी .

मई ,जून आते ही मौसम वैज्ञानिक बारिश की चर्चा करने लगते हैं . जबकि ज्योतिषशास्त्र इसे कही आगे जाकर बात करता है . मई , जून से पहले यह नवंबर ,दिसंबर में हमें ले कर जाता है और ,कब और कितनी होगी बारिश ,कहाँ बरसेंगे मेघ ,इसकी जानकारी देता है .सूर्य के धनु राशि में गोचर के समय खासकर पूर्व आषाढ़ नक्षत्र में गोचर के समय बनने वाले बादल की चर्चा करता है . इस महीने में वह बादलों के गर्भ धारण की बात करता है . सूर्य , हवाओं के सम्बन्ध से मेघों का गर्भ धारण कैसा होगा ? मेघों के गर्भ नाश की स्थिति तैयार हुई या स्वस्थ्य गर्भ धारण हुआ ,इसकी चर्चा ज्योतिषशास्त्र विस्तार से करता है .इस समय जो मेघ स्वस्थ गर्भ धारण करते हैं वही मेघ 195 दिनों के बाद अर्थात जून में बरसते हैं . इसमें हमें क्या करना है ? जिस प्रकार खेतों में बीजारोपण से पहले खेत को अच्छे तरीके से तैयार किया जाता है ,उसे समुचित साधन मुहैय्या कराया जाता है .उसकी देख भाल की जाती है ठीक उसी प्रकार बादलों के गर्भ धारण के समय हमें समुचित संसाधनों को मोहैया कराना होगा .प्रकृति के पांच महत्वपूर्ण अवयवों की पहचान और उनके बीच संपर्क स्थापित करना होगा . इस संपर्क को स्थापित करने हेतु विख्यात ज्योतिषशास्त्री वराहमिहिर के सिद्धांतो के साथ साथ खुद के अवलोकन और निरीक्षण को शामिल करना होगा .

वैसे भी इस बार गर्मी अपने रिकॉर्ड स्तर पर है और आगे भी यह रहने वाला है। इस गर्मी से राहत कब ?? बारिश कब ??

शुक्र ,बुध चंद्र मंगल राहु और सूर्य का एक दूसरे के साथ बनाये जाने वाले योग बारिश की स्थिति को दर्शाने वाले हैं ..

मौनसून के पूर्वार्ध में कम बारिश लेकर उत्तरार्ध में अच्छी बारिश के बावजूद गर्मी विगत सालों के अपेक्षा ज्यादा ही रहने का संकेत ..

इस वर्ष बारिश के साथ तेज हवाओं का प्रकोप ज्यादा देखने को मिलेगा जिससे कि फसल को काफी नुकसान पहुँचेगा

इस तरह की खबरें विचलित करती हैं। ग्रहों ने हमें इस साल भी अच्छे मानसून के नही होने का संकेत पहले दिया है। सूर्य के आद्रा प्रवेश का शनिवार को होना और पूर्व अषाढ़ नक्षत्र का शनि और केतु से मिलना जहाँ एक ओर उम्मीद से कम वर्षा का योग बना रहे हैं वहीं इसी दौरान शुक्र का हस्त नक्षत्र में combustion से बाहर आना अकाल की स्थिति तैयार कर रहा है। बिहार,उत्तर प्रदेश,हिमाचल प्रदेश और मध्य भारत में उम्मीद से कम बारिश की संभावना।

पूरे मानसून ( monsoon )के समय में सबसे ज्यादा बारिश की स्थिति कब ??

1 – 25 जुलाई से 14 अगस्त के बीच .( between 25th July to 14th August )

दिसम्बर माह के अंतिम सप्ताह में मौसम का असंतुलन और प्रकृति का असंतुलन खासकर तटीय इलाकों में चिंता का विषय।

कुल मिलाकर कहें तो मौनसून के erratic होने के साथ साथ सामान्य से थोड़ा कम रहने का संकेत ..

परिणाम ..सूखे और अकाल की स्थिति ..

तो देखा आपने कितना व्यापक है ज्योतिषशास्त्र .जरूरत है इसकी ओर वापस लौटने की .मृतप्राय होती जाती प्रकृति चक्र को जीवंतता प्रदान करने की .

प्रकृति से जुड़ने का .एक रोचक लेकिन महत्वपूर्ण जानकारी आप सभी से साँझा करना चाहूंगी .कभी आपने गौर किया की सूर्यः के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही चिड़ियाँ अपना घोसला पेड़ पर बनाना शुरू कर देती है और वह भी शाखाओं पर एक खास तरीके से .ऐसा क्यों ? क्योंकि चिड़िया को भली भांति बारिश के आने की जानकारी है और उसकी दिशा की भी जानकारी है. सोचिये की एक चिड़ियाँ बगैर पढ़े लिखे कैसे जान पाती है इतना सब ? ऐसा इसलिए की वह प्रकृति से ,पर्यावरण से प्रत्यक्ष रूप में जुड़ पति है .सीधा सम्बन्ध है उसका प्रकृति के साथ .छोटी सी अनपढ़ चिड़िया हमें एक बहुत सारगर्भित सन्देश दे जाती है . वह क्या ??

बंद कमरों से हम बाहर निकलें .एअरकंडिशनर( air conditioner)  को बंद करें और सीधा सीधा प्रकृति से connect होएं .प्रकृति से जुड़ेंगे तो ही प्रकृति को समझ पाएंगे ,प्रकृति को बचा पाएंगे .क्योंकि बचेगी प्रकृति तो बचेंगे हम

2020 भी किसानों के लिए बारिश के मामलों में अच्छी संभावनाओं को लेकर आता हुआ नही दिखता है ..इस साल उत्तर और पश्चिम में खंड वृष्टि तथा पूर्व और दक्षिण में दुर्भिक्ष की स्थिति ..

ऐसे समय में वायु के देव से यही प्रार्थना कि जब भी बारिश का अच्छा योग बने अपनी रूख सकारात्मक रखें और मेघ को हवाओं का समर्थन दें ..