Astrology is Not Future Telling Only,It Is Much More ….!( Part 2 )

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” सा विद्या या विमुक्तये ”

विद्या वही जो मुक्त करे .सवाल यह की किससे मुक्त करे ? किससे मुक्ति ?

.प्रख्यात दार्शनिक रूसो के अनुसार ” मनुष्य के प्राकृतिक विकास के लिए उसे सामाजिक और राजनितिक बंधनो से मुक्त करना चाहिए “. मुक्ति का एक अर्थ आज़ादी भी है . .मुक्ति का एक अर्थ मोक्ष भी .   मुक्ति ..मोक्ष ..चौथा पुरुषार्थ .मुक्त शब्द व्यापक अवस्थाओं का सूचक है .

शिक्षा शब्द का व्यापक रूप है विद्या .शिक्षा का अर्थ है ज्ञान प्राप्त करना . शिक्षा की जगह education शब्द का प्रयोग सही नहीं है .education , लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है ” आंतरिक ज्ञान का विकास करना “. education , अभ्युदय की बात नहीं करता . नर्सरी लेवल से शुरुआत की बात नहीं करता .जिस प्रकार शिक्षा के लिए प्रयुक्त किये जाने वाला शब्द education  बिलकुल अलग अर्थ प्रदान करता है ठीक उसी तरह कई ऐसे शब्द हैं जिनकी विवेचना जरूरी है .एक शब्द है धर्म ,इसके लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है religion . इसी तरह एक शब्द है आध्यात्मिकता ,इसके लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है spirituality . ज्योतिष के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला शब्द astrology .

धर्म .. बहुत ही व्यापक है इसका अर्थ . जैसे राजधर्म , मानवीय धर्म, माता,पिता, भाई , बंधु ,बांधव,पत्नी,संतान का धर्म, हिन्दू,मुस्लिम,सिख ,ईसाई वाला धर्म या फिर सहज धर्म जैसे जल की शीतलता या अग्नि की उष्णता .हर हेतु के लिए धर्म का शास्त्रीय विवेचन है .  religion शब्द  हमें यह व्यापकता नहीं देता.

इसी प्रकार शब्द है आध्यात्मिकता .इसके लिए प्रयोग में लाया जाने वाला शब्द है spirituality  जो की latin  शब्द spirit से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है breathe , सांस . आध्यात्मिकता सिर्फ सांस नहीं है . यह व्यापक है .बहुत विस्तृत है यह .

इसी तरह ज्योतिष के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है astrology जो की ग्रीक शब्द astron से लिया गया है जिसका अर्थ है star .

कुछ श्लोक वेदों से . ज्योतिष शब्द की व्याख्या वेदों के अनुसार देखिये कितना व्यापक है ..

1  – ” प्रति अग्नि  ऊषसा अग्रं अख्यात  वीअभातिनां सुअमना रत्नध्धेयं .

यातं अश्विना सुअकृतः दूरोनं उत् सूर्य ज्योतिषां देवः ऐति ”

 

2  – ” इदं श्रेष्ठं ज्योतिषां ज्योतिः आ अगात्त चित्रः प्रकेत अजनिष्ट विडम्बा .

यथा प्रसूता सवितुः सवाय एव रात्रि उषसे योनिं अरैक .”

 

3  – ” ऋतेन यौ रितवृद्धौ ऋतस्य ज्योतिषः पति ता मित्रावरुणा हुवे ”

 

4  – ” देवाः चित्त ते असूर्यं प्रदचेतसः बृहस्पते यज्ञियं भागं अनशु .

असरहाइव सूर्यः ज्योतिषः मह विश्वेषां ेइत जनिता ब्रह्माणं असि ”

 

ऋग्वेद मूल रूप से अग्नि की व्याख्या करता ग्रन्थ है वहां ज्योतिष शब्द की चर्चा बरबस ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित करता है .ऋग्वेद ,ज्योतिष शब्द के माध्यम से ऊर्जा के सिद्धांत को समझाता है .. ” ऊर्जा का न तो सृजन होता है न विनाश बल्कि ऊर्जा का रूपांतरण होता है . परिवर्तन से रूपांतरण .

समय की मांग है अंग्रेजी के इस रुतबे से बाहर आकर सोचने का .

मूल की ओर लौटने का .

और समग्रता में चीजों को जानने का .

यह जानने का की शास्त्रों द्वारा वर्णित सिद्धांत मात्रा धरोहर हैं ,जिन्हे सहेजे जाना चाहिए ,  यह हमारी वौद्धिकता के लिए उत्प्रेरक भी हैं ? जब यह हमें उत्प्रेरित करने लगे , हमारी शंकाओं का निस्तारण करने लगे ,संवेदनाओं को जगाने लगे और हमें उसकी अनुभूति   होने लगे तब सही मायनो में हम बंधनो से मुक्त होंगे और सिर्फ कह ही नहीं सकेंगे बल्कि जान पाएंगे .. ” सा विद्या या विमुक्तये ”

विद्या वही जो मुक्त करे .

Re(visit),Re(think),Re(interpret)….