Article-370 and its Reverberations

धारा 370 और article 35A के बाद जम्मू कश्मीर सिर्फ देश ही नहीं बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के साथ साथ United Nation में भी चर्चा का विषय बना हुआ है .
जम्मू कश्मीर पर अब तक चीन ,अमेरिका ,ब्रिटैन ,फ्रांस और रूस इन पांच महाशक्तियों में से किसी ने भी भारत के कदम को गलत नहीं ठहराया है .हाँ चीन ने जरूर कुछ आपत्ति की है लेकिन वह जम्मू कश्मीर को लेकर नहीं है .लद्दाख के बारे में है .चीन का दावा है की भारत ने उसकी जमीन लद्दाख में दबा रखी है जबकि हमारा दावा है की उसने हमसे कई गुना जमीन हथिया राखी है .ऐसे में विदेश मंत्री S JAISHANKAR की चीन यात्रा राजनीतिक ही नहीं बल्कि कूटनैतिक दृष्टिकोण से भी अहम् है .ऐसे में पाकिस्तान बेबस है की वह क्या करे . 14 अगस्त को पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म इमरान खान साहब का भाषण और पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने POK में जाकर भाषण दिया है वह पाकिस्तान के कमजोर अंतर्राष्ट्रीय सूरत का आइना है .लेकिन इस मुद्दे पर पाकिस्तान के सारे सत्तारूढ़ और विपक्षी दल एक हो गए हैं यह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता . पाकिस्तान ने 1963 में POK में से 5 हज़ार वर्ग किलोमीटर जमीन चीन को दिया है तो चीन का साथ और उधर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को अफ़ग़ानिस्तान और तालिवान से अमेरिका का पीछा छुड़ाना है तो उसमे उसे पाकिस्तान की मदद चाहिए .इन्हे भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता .
10 और 12 अगस्त के अपने आर्टिकल  मैंने सर्वतोभद्र चक्र के द्वारा विश्लेषित करते वक़्त मैंने लिखा है की “when mars will enter poorva phalguni on 30th August 2019 it will be starting of a period on which we should watchful of natural calamity/ border dispute/ infilteration/ internal suffering and mass destruction ”
अब प्रश्न यह उठता है की क्या यह कश्मीर का पुनर्जन्म है या सरकार द्वारा उठाया गया ऐसा कदम जो कुछ और AGITATION को न्योता देने वाला है .जहाँ तक स्वायत्तता का सवाल है तो सिर्फ कश्मीर को ही क्यों ,यह सवाल भी उठ सकता है | नागालैंड में भी स्थिति अच्छी नहीं है .
इन सभी सवालों के लिए Astrologically मैंने 10/12 अगस्त को कुछ चर्चा की है .

इन सबसे ज्यादा चिंता वाली बात ..( दशा/ CPC’2019 & 2020/ सर्वतोभद्र चक्र

1- छुप के वार अर्थात छद्म युद्ध की सम्भावना से इंकार नही .

2- देश की दिनी दिन कमजोर होती जाती अर्थ व्यवस्था को लेकर है .कमजोर होती अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार की तरफ से 28 अगस्त के बाद सुधारवादी कदम उठाये जाने का संकेत

3- कुछ बातों की नीव डाली है अभी . हर कुछ रातो रात नहीं होता . आने वाले समय में भारत में भी तख्ता पलट जैसी घटना घाट सकती है .

4- भारत द्वारा अपने कूटनीतिक प्रयासों में तेजी लाये जाने की सम्भावना .

5- एक महत्वपूर्ण संकेत भाषा को लेकर है .और इसमें न्यायपालिका की अहम् भूमिका नजर आ रही है .ऐसा भी हो सकता है की अदालतों में मूल फैसला ही हिंदी में लेना शुरू कर दे .क़ानून की पढाई हिंदी भाषा में भी हो इसकी व्यवस्था हो जाए .