विन्द्य मुहूर्त

राव सर जब भगवान राम की कुंडली की चर्चा कर रहे थे उसमें उन्होंने माँ सीता के अपहरण और विन्द मुहूर्त की चर्चा की थी।
बाल्मीकी रामायण में जटायु ने कहा –
येन याति मुहूर्तेन सीतामादाय रावण: ।
विप्रणष्टं धनं क्षिप्रं तत्स्वामी प्रतिपद्धते ।।
विन्दो नाम मुहूर्तो$सौ न च काकुत्स्थ सो$बुधत ।
क्या है यह विन्द मुहूर्त ??
एक मुहूर्त माने दो घटी अर्थात् 48 मिनट ।दिन में पंद्रह मुहूर्त होते हैं।इनमें ग्यारहवाँ मुहूर्त विन्द मुहूर्त कहलाता है। इस मुहूर्त में अपहृत वस्तु उसके स्वामी को अवश्य प्राप्त होती है।

5 comments

  1. 11th Muhurta …. roughly within 48 minutes after 10 Muhurtas completed. That means .. after 48*10= 480 minutes and within 528 minutes after sunrise. In older times, Muhurta might have been calculated based on total duration between sunrise and sundown. So it may have been more than 48 minutes/muhurta in Chaitra month.Anyway, with birth time between 480 minutes (8 hrs) and 8 hrs 48 minutes after sunrise, the Sun should have been in roughly 9th house in present day context. Unless they were following unequal division of Zodiac. regardsChakraborty

  2. विष्णु पुराण में मुहूर्त की चर्चा विस्तार से की गई है। वहाँ बहुत ही स्पष्ट रूप से कहा गया है की दिनों के घटने बढ़ने का असर मुहूर्त पर नहीं होता है।मुहूर्त हमेशा समान हुआ करते हैं। वहाँ उन्होंने दिनमान ,रात्रिमान ,प्रात:काल ,संगव काल ,अपराह्नकाल ,मध्याह्न काल,सायं काल आदि की चर्चा बहुत ही खूबसूरत तरीके से किया है।RegardsKrishna

  3. बात यहाँ जन्म का नहीं,वस्तुओं के खोने का समय और उससे संबंधित मुहूर्त की हो रही है।

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